3.5 Very Good

Ajab Prem Ki Ghazab Kahani

अजब प्रेम की गजब कहानी : हंसी के गुब्बारे

"अंदाज अपना अपना" जैसी क्लासिक कॉमेडी फिल्म देने वाले राजकुमार संतोषी कई सालों से इस कथा प्रकार से दूर थे. उनकी बहुत सारी फिल्मे भी बिच में फ्लॉप हुयी. इसीबीच ऐसे देखा गया के एक अच्छी संजीदा फिल्म से भी जादा बिज़नस एक औसत दर्जे की कॉमेडी फिल्म कर लेती है. शायद यही सोच कर एक हित फिल्म देने की आस में राजकुमार संतोषी लेकर आये है, रणबीर कपूर और कैटरिना कैफ की "अजब प्रेम की गजब कहानी".

शीर्षक से ही मजेदार लगने वाली ये फिल्म क्या दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने में कामयाब हो पाई है? क्या इस फिल्म में वोह बात है जो दर्शकों को राजकुमार संतोषी का लोहा मनवा सके?

कथा सारांश :

प्रेम (रणबीर कपूर) नामक एक मस्तमौला जवान अपने कलंदर दोस्तों के साथ ऊटी में एक "हैप्पी क्लब" नाम का ग्रुप चलाता है. प्रेम इस क्लब का स्वघोषित प्रेजिडेंट है और सदा ही वोह टैग अपने शर्ट पे लगा के घूमता है. इस क्लब का काम है मुसीबत में फसे प्रेमियों की मदत करवा के उन्हें मिलाना. इसी चक्कर में वो अपने दोस्त के लिए एक लड़की को उठा कर के उनकी शादी करा देता है.

ये सब देख के जेनी (कैटरिना कैफ) नामक एक सुंदरी प्रेम और उसके दोस्तों को अगवाह करने वाली टोली समझ बैठती है. जेनी के पिताश्री प्रेम के ही दिलाये हुए फ्लैट को रेंट पे लेते है. प्रेम जेनी से मन ही मन में मुहोब्बत कर बैठता है पर कुछ कह नहीं पता. लेकिन वोह उसकी हर बात मनाता है और उसके लिए कुछ भी करने को हमेशा तैयार रहता है. इसी चक्कर में वोह जो उत पतंग हरकते करता है वही कहने है इस फिल्म की.

पटकथा:

कहानी तो छोटी और साधी लगती है पर राजकुमार संतोषी ने पटकथा को कुछ इसतरह निखारा है के फिल्म दर्शको को पकडे रखती है और हँसाने पे मजबूर भी करती है. पर कुछ कुछ गिग्स याने कॉमेडी दृश्य कामयाब होते है तो कुछ फीके पड़ते है.

कथा में नायक नायिका के पास आने और दूर जाने के सिलसिले बार बार होने के कारण कभी कभी कम असरदार लगते है. और विल्लैन का ट्रैक बिच में ही घुसेडासा लगता है.

आर. डी. तेलंग लिखित संवाद मजेदार है जो साधे दृश्यों में भी जान डालते है.

दिग्दर्शन:

राजकुमार संतोष का संजीदा फिल्मों के साथ साथ कॉमेडी में भी कोई हाथ नहीं पकड़ सकता ये उन्होंने फिर से साबित कर दिया है. कैरिकेचर तरीके से शूट की गयी ये फिल्म बच्चों और बूढों सहित सभी को भर पेट हँसाएगी. राजकुमार संतोषी फिर से ये दिखा देते है के उटपटांग हरकतें और अश्लील हावभाव और संवादों के बिना भी कॉमेडी फिल्म बनायीं जा सकती है. एकदम साफ़ सुथरी और हंसी से भरपूर फिल्म बनाने के लिए राजकुमार संतोषी का हार्दिक अभिनन्दन.

पर ये बात जरुर है के वोह फिल्म को और क्रिस्प बना सकते थे. एक दो गाने कम कर सकते थे और कुछ कम असरदार कॉमेडी को हटा सकते थे. फिल्म की लम्बाई कम हुयी तो चलता मगर असर कम नहीं होना चाहिए. दर्शकों को कुछ और सोचने का मौका नहीं मिलना चाहिए.

अभिनय:

ये फिल्म पूरी की पूरी रणबीर कपूर के अभिनय गुणों को उजागर करती है. रणबीर ने जिस फुर्ती और समझदारी से इस किरदार को निभाया है के उनके जेनरेशन का कोई भी अभिनेता उनके सामने फीका पड़ जाए. रणबीर स्क्रीन पे अपने प्रभाव से चमका देते है. उन्होंने एक पार्टी में डांस वाले दृश्य को आने वाले कई सालों के लिए यादगार बना दिया है. ये ऐसा दृश्य है जिसमे लोग हस्ते हस्ते कुर्सी से निचे गिरने की संभावना है. रणबीर वाकई अगले सुपर स्टार है.

उनके अलावा कैटरिना ने भी पहली बार कॉमेडी करते हुए भी अच्छी अदाकारी दिखाई है. वोह दिखती भी ऐसे है के किसीको भी दीवाना कर दे. बाकि सभी चरित्र कलाकारों ने भी पूरी ईमानदारी और लगन से अपना कम निभा कर फिल्म में पूरी तरह से योगदान दिया है. दर्शन जरीवाला, स्मिता जयकर, गोविन्द नामदेव आदि ने अच्चा अभिनय किया है. साजीद डॉन के किरदार में जाकिर हुसैन फिट नहीं बैठते. उनके जगह किसी और को ये मौका देना चाहिए था. उपेन पटेल ठीक ठाक है.

रणबीर के हैप्पी क्लब के मेम्बेर्स का किरदार करने वाले अभिनेतावों का अभिनन्दन. उन्हें अच्छे खांसे दृश्य और संवाद मिले है और उन्होंने उसमे चार-चाँद लगा दिए है.

चित्रांकन और स्पेशल एफ्फेक्ट्स :

चित्रांकन उत्तम दर्जे का है और निर्माण की गुणवत्ता को दर्शाता है. कैरिकेचर स्टाइल रहने के कारण राजकुमार संतोषी ने स्पेशल एफ्फेक्ट्स का खुले दिल से कॉमेडी करने में उपयोग किया है. और ५ मिनिट का वोह दृश्य जहा प्रेम ऑफिस जाता है वोह दर्शकों को हँसा हँसा के लोटपोट कर देता है.

संगीत और पार्श्वसंगीत:

प्रीतम का संगीत जबरदस्त है और हिट है. पर्श्वशंगीत दृश्यानुरूप है.

संकलन:

संगणकीय संकलन सॉफ्टवेर के अच्छे गुणों का उपयोग करते हुए संकलक ने जो स्टाइल उसे किया है वोह फिल्म को और जादा मोशन देना है और कहानी का फ्लो सही रखता है. पर वही.. अनावश्यक और गति में बाधा डालने वाले दृश्य और गाने उन्होंने कम करने चाहिए थे.

निर्माण की गुणवत्ता:

टिप्स के तौरानी भाइयों द्वारा निर्मित ये फिल्म कम लगत में ऊँचे दर्जे की गुणवत्ता और असरदार मनोरंजन का एक अच्छा उदाहरण है. फिल्म की बजट कण्ट्रोल में रख कर फिल्म के कंटेंट की और जादा ध्यान देकर उन्होंने एक मिसाल कायम की है. और इसीकारण फिल्म सभी को मुनाफा देगी.

लेखा-जोखा:

*** (३.५ तारे)
एक तारा साफ़ सुथरी मनोरंजक पेशकश के लिए जो पूरी फॅमिली एक साथ देख सकते है. एक तारा करिकेचर स्टाइल के दिग्दर्शन के लिए राजकुमार संतोषी को. एक तारा खास रणबीर कपूर के अदाकारी को. और आधा तारा सभी के अभिनय और फिल्म के संगीत को.

आप सभी घरवालों और दोस्तों के साथ ये फिल्म जरुर देखिये. आपका वीकएंड हंसी के गुब्बारों से खेलते हुए बीतेगा.

चित्रपट समीक्षक:
--- प्रशेन ह.क्यावल