‘कारà¥à¤¤à¤¿à¤• कॉलिंग कारà¥à¤¤à¤¿à¤•’ की मà¥à¤–à¥à¤¯ à¤à¥‚मिका में हैं फरहान अखà¥à¤¤à¤°à¥¤ कारà¥à¤¤à¤¿à¤• à¤à¤• सीधे-सादे, हारे हà¥à¤ मधà¥à¤¯à¤® परिवार के लड़के की कहानी है, जिसमें आतà¥à¤®à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸ नाम की कोई चीज नहीं है और जो जिंदगी में हमेशा मजाक का पातà¥à¤° बना रहता है।
à¤à¥‹à¤²à¤¾-à¤à¤¾à¤²à¤¾ और निषà¥à¤•पट कारà¥à¤¤à¤¿à¤• चà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤ª काम करने में यकीन रखता है, लेकिन उसके दिल के à¤à¤• कोने में अपनी खूबसूरत और आकरà¥à¤·à¤• सहकरà¥à¤®à¥€ शोनाली मà¥à¤–रà¥à¤œà¥€ (दीपिका पादà¥à¤•ोण) के लिठपà¥à¤¯à¤¾à¤° पलने लगता है, पर वह कà¤à¥€ उसका इजहार नहीं कर पाता, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उसमें आतà¥à¤®à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸ की कमी है। और शोनाली को यह à¤à¥€ नहीं पता कि पिछले चार साल से कोई कारà¥à¤¤à¤¿à¤• उसके दफà¥à¤¤à¤° में काम करता है।
अब अचानक जो बदलाव होते हैं उनसे कारà¥à¤¤à¤¿à¤• कि जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। और यह काम होता है à¤à¤• फोन कॉल के जरिà¤à¥¤ कारà¥à¤¤à¤¿à¤• का à¤à¤• हमनाम उसे फोन करता है और उससे वह सब कà¥à¤› करवाता है जो वह खà¥à¤¦ चाहता है।
यहां तक तो à¤à¤¸à¤¾ लगता है कि फिलà¥à¤® आतà¥à¤®à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸ सिखाने का पाठà¤à¤° है। लेकिन कहानी में रोमांच तब बॠजाता है जब कारà¥à¤¤à¤¿à¤• को बदलनेवाला कारà¥à¤¤à¤¿à¤• उसका दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ हो जाता है। अब फिलà¥à¤® à¤à¤• नाटकीय मोड़ लेती है और बेचारा कारà¥à¤¤à¤¿à¤• खà¥à¤¦ ही अपनी जिंदगी को बचाने की जदà¥à¤¦à¥‹à¤œà¤¹à¤¦ में लग जाता है और ये कà¥à¤·à¤£ दिल को छू लेनेवाले हैं।
लेखक-निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• विजय ललवानी ने ‘कारà¥à¤¤à¤¿à¤•...’ को बड़े ही पà¥à¤¯à¤¾à¤° से बनाया है। उनकी हॉलीवà¥à¤¡ शैली बेहद दिलचसà¥à¤ª है और संपादन à¤à¥€ चà¥à¤¸à¥à¤¤ है। कहानी में नयापन नहीं है, लेकिन उसकी शैली और संवाद उसे दरà¥à¤¶à¤¨à¥€à¤¯ बना देते हैं। सिनेमाटोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ à¤à¥€ आकरà¥à¤·à¤• है।
फिलà¥à¤® आपको कारà¥à¤¤à¤¿à¤• का हमदरà¥à¤¦ बना देती है। जब à¤à¥€ फोन बजता है आप à¤à¥€ परेशान हो जाते हैं।
निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• हमारे दिमाग दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ खेले जानेवाले खेल से पैदा हà¥à¤ˆ कहानी के रोमांच को बहà¥à¤¤ ही पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ रूप से फिलà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥‡ में सफल रहे हैं। हालांकि मधà¥à¤¯à¤¾à¤‚तर तक दरà¥à¤¶à¤•ों को पता चल जाता है कि फिलà¥à¤® कà¥à¤¯à¤¾ बताना चाहती है, लेकिन इसके बावजूद रोमांच और रहसà¥à¤¯ अंत तक बना रहता है। आपको अंत तक पता ही नहीं चलता कि आखिर यह सब कैसे हो रहा है। सच जानने के लिठआपको फिलà¥à¤® ही देखनी होगी।
फरहान अखà¥à¤¤à¤° ने इस फिलà¥à¤® में खà¥à¤¦ को और शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ साबित किया है। परà¥à¤¦à¥‡ पर वे खूब जंचते हैं और यह à¤à¥€ साबित होता है कि किसी à¤à¥€ तरह के किरदार में डूब जाने का मादà¥à¤¦à¤¾ उनमें है। à¤à¤• बेहतरीन अदाकार अपने निरà¥à¤®à¤¾à¤£ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में है और फरहान इसे जारी रखते हैं तो यह समय बेहतर है।
दीपिका पादà¥à¤•ोण मन को लà¥à¤à¤¾à¤¤à¥€ हैं और à¤à¤• बिंदास बाला के रूप में अपनी à¤à¥‚मिका बखूबी निà¤à¤¾à¤¤à¥€ हैं। इस फिलà¥à¤® में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ दिखाने के लिठजà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ अवसर नहीं थे, लेकिन फरहान के साथ आकरà¥à¤·à¤• जोड़ी बनाने में वे सफल हà¥à¤ˆ हैं।
राम कपूर, विवन à¤à¤¤à¥‡à¤¨à¤¾, तराना, शेफाली छाया और विपिन शरà¥à¤®à¤¾ ने अपनी-अपनी à¤à¥‚मिकाà¤à¤‚ बखूबी निà¤à¤¾à¤ˆ हैं।
लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ गाने फिलà¥à¤® की धीमी रफà¥à¤¤à¤¾à¤° में राहत पहà¥à¤‚चाते हैं।
लेकिन ‘कारà¥à¤¤à¤¿à¤•...’ किसी रहसà¥à¤¯à¤®à¤¯ या थà¥à¤°à¥€à¤²à¤° फिलà¥à¤® की अपेकà¥à¤·à¤¾à¤“ं पर खरी नहीं उतरती, लेकिन यह कहानी आपके मन को छूती जरूर है।
विजय ललवानी ने दिखाया है कि किसी संवेदनशील विषय को रà¥à¤ªà¤¹à¤²à¥‡ परà¥à¤¦à¥‡ पर उतारने के लिठकेवल ‘तारे जमीन पर’ और ‘माई नेम इज खान’ जैसे रासà¥à¤¤à¥‡ ही नहीं हैं। हां, इतना है कि रहसà¥à¤¯ खà¥à¤² जाने के बाद ‘कारà¥à¤¤à¤¿à¤•...’ दà¥à¤¬à¤¾à¤°à¤¾ नहीं देखी जा सकती।








