
जैसे की सुल्तान, कमाई के मामले में आगे बढ़ती ही जा रही है इसलिए इसके निर्देशक अली अब्बास जफ़र ने गिनती करना बंद कर दिया है । एक दवाब बढ़ता है, क्या ये 300 करोड़ का आंकड़ा छूएगी, क्या ये 300 करोड़ के भी पार जाएगी ?..यह मेरे लिए हो रहा है । मैं जानता हूं कि एक फ़िल्ममेकर के रूप में सुल्तान मुझे एक खास स्थायित्व देती है । मैं ये भी जानता हूं कि एक महान आदमी ने सफ़लता के बारें में क्या कहा था, शक्ति के साथ-साथ जिम्मेदारी भी आती है, अली बहुत ही विन्रमता के साथ कहते हैं ।
अली दर्शकों की उम्मीदों से परेशान हैं । सुल्तान के बाद और बड़ी फ़िल्म देने की उम्मीद मुझसे की जाएगी । मैं इसके बारें में सोचना नहीं चाहता । मैं खुश हूं कि ये फ़िल्म दर्शकों के साथ जुड़ी हुई है । और जब असल जिंदगी के पहलवान जैसे संग्राम सिंह कहते हैं, जब सलमान पहलवानी के दावं पेच करते हैं तो वह बहुत प्रमाणिक लगते हैं । मुझे लगता है हमने वो सब हासिल कर लिया है जो हमने करने का बीड़ा उठाया था ।
अचानक कुश्ती का खेल राष्ट्रीय मनोरंजन दायरे में बात करने का मुद्दा हो गया है ।
अली कहते हैं, जब लोग कहते हैं , चक दे इंडिया ने हॉकी को प्रोत्साहित किया, सुल्तान पहलवानी को प्रोत्साहित करेगी, ये सब बातें मुझे बहुत प्रफुल्लित करती हैं । सलमान और शाहरुख जैसे स्टार थिएटर में खेल के बारें में फ़िल्म देखने के लिए जो कि क्रिकेट या फ़ुटबॉल पर नहीं है , दर्शकों को लाते हैं ।
अली को लगता है कि सुल्तान गैर शहरी और शहरी दोनों क्षेत्र में दर्शकों को समान उत्साह के साथ जोड़ती है । उसमें एक मिट्टी की खुशबू है । यदि मैंने इस बारें में एक फ़िल्म बनाई है, फ़ेंसिंग या बॉक्सिंग, तो मुझे नहीं लगता कि ये ऐसा ही असर छोड़ेगी । हर भारतीय पहलवानी के साथ एक तादात्म्य स्थापित करता है । हम सब जानते हैं कुश्ती एक खेल है ।
"पहलवानी अखाड़े में और लंगोटी में सलमान खान को दिखाना आसान नहीं था । जब मैं पीछे देखता हूं तो लगता है मैंने ये कैसे कर दिया । लेकिन अब, जब फ़िल्म को इतनी तारीफ़े मिल रहीं हैं तो सब इसके लायक लगता है । "निर्देशक अली एक दबी आवाज़ में प्रार्थना करते हैं ।
अली के पास अब बहुत सारे दोस्त हैं । "मेरे माता-पिता मुंबई की फिल्मी दुनिया से पूरी तरह अप्रभावित हैं । लेकिन जब लोग उन्हें मेरे होमटाउन देहरादून की गलियों में रोककर उनसे पूछते हैं कि उनके बेटे ने उनको गौरावान्वित किया है , तो उन्हें काफ़ी अच्छा लगता है । जब मेरे माता-पिता खुश होते हैं तो मैं खुश होता हूं । अचानक बहुत सारे लोग मुझे पहचानने का दावा करते हैं । मुझे लगता है मेरी जिंदगी और करियर अब शुरू हो चुका है । "
















