फ़िल्म :- सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी

कलाकार :- वरुण धवन, जाह्नवी कपूर, रोहित सराफ, सान्या मल्होत्रा

निर्देशक :- शशांक खेतान

रेटिंग :- 3.5/5

Sunny Sanskari Ki Tulsi Kumari Movie Review: फैमिली और यंगस्टर्स के लिए फेस्टिव सीजन की परफेक्ट ट्रीट है सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी

संक्षिप्त में सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी का प्लॉट :-  

सनी (वरुण धवन) अनन्या (सान्या मल्होत्रा) से प्यार करता है और उसे प्रपोज़ करता है। लेकिन अनन्या उसका प्रपोज़ल ठुकरा देती है। वह कहती है कि उनका रिश्ता महज़ एक सिचुएशनशिप था और इसमें कोई गंभीर प्यार नहीं था। साथ ही वह यह भी बताती है कि उसकी शादी सिंह इंडस्ट्रीज़ के विक्रम सिंह (रोहित सराफ) से तय हो चुकी है। सनी का दिल टूट जाता है और वह अपने दोस्त अभिनव शर्मा (बंटू) की मदद से विक्रम का पीछा करता है। इसी दौरान उन्हें पता चलता है कि विक्रम ने तुलसी (जाह्नवी कपूर) से ब्रेकअप कर लिया था। सनी तुलसी से मिलता है और एक प्लान बनाता है। दोनों तय करते हैं कि वे उदयपुर में होने वाली विक्रम और अनन्या की शादी में पहुंचेंगे और उन्हें जलाने की कोशिश करेंगे, ताकि उनकी शादी टूट जाए। इसके बाद क्या-क्या होता है, यही फिल्म की बाकी कहानी है।

सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी मूवी स्टोरी रिव्यू

शशांक खेतान की कहानी ठीक-ठाक है और इसमें ज़्यादा प्लॉट पॉइंट्स नहीं हैं। शशांक खेतान की स्क्रीनप्ले काफ़ी हद तक मनोरंजक है। उन्होंने फिल्म में केवल मज़ेदार पल ही नहीं, बल्कि कुछ गंभीर और इमोशनल सीक्वेंस भी डाले हैं, जो दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं। लेकिन साथ ही, लेखन में और भी गहराई हो सकती थी। शशांक खेतान और इशिता मोइत्रा के डायलॉग्स फिल्म की यूएसपी साबित होते हैं और कॉमिक एलिमेंट्स को मज़बूत बनाते हैं।

शशांक खेतान का डायरेक्शन हल्का-फुल्का और पूरी तरह से मेनस्ट्रीम है। थीम के बावजूद उन्होंने फिल्म को ज़्यादा से ज़्यादा मास एंटरटेनर जैसा बनाए रखने की कोशिश की है। अच्छी बात यह है कि फिल्म के जोक्स असरदार हैं और दर्शकों को हंसी आती है। जिस तरह से सनी तुलसी के लिए फीलिंग्स डेवलप करता है और अनन्या व विक्रम अपने रिश्ते को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं, वह देखने में मज़ेदार है। फिल्म का फिनाले थोड़ा अनएक्सपेक्टेड है और अच्छा प्रभाव छोड़ता है।

वहीं कमी की बात करें तो, ट्रेलर में ही कहानी का बहुत हिस्सा दिखा दिया गया था। इस वजह से फर्स्ट हाफ में आगे क्या होगा, इसका अंदाज़ा हो जाता है। दूसरा, फिल्म का दूसरा हाफ शुरुआत में ठहर सा जाता है; प्लॉट आगे नहीं बढ़ता। जंगल सफारी वाला सीक्वेंस भी मज़ेदार बन सकता था लेकिन उसमें दम नहीं है। इसके अलावा परिवार वाला एंगल और परम् (अक्षय ओबेरॉय) तथा राखी (मनीनी चड्ढा) का ट्रैक ज़बरदस्ती जोड़ा गया लगता है और नैरेटिव में उतना स्मूद नहीं बैठता, जैसा कि इसी स्पेस की धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी [2023] में हुआ था।

परफार्मेंस :-

वरुण धवन फिर से मैं तेरा हीरो [2014] और दुल्हनिया वाली स्पेस में लौटते हैं और भरपूर एंटरटेन करते हैं। खासकर फर्स्ट हाफ में वे कई सीन्स में पूरी तरह हावी रहते हैं। जाह्नवी कपूर बेहद खूबसूरत लगती हैं और अपनी एक्टिंग से प्रभावित करती हैं। इमोशनल सीन्स में वे और भी निखरकर सामने आती हैं। रोहित सराफ हैंडसम लगते हैं और उम्मीद के मुताबिक अच्छी परफॉर्मेंस देते हैं। सान्या मल्होत्रा ग्लैमरस लुक में छा जाती हैं और अपने अंदाज़ से असर छोड़ती हैं। मनीष पॉल (कुकू) जबरदस्त हंसी दिलाते हैं, वहीं अभिनव शर्मा अच्छा साथ निभाते हैं। अक्षय ओबेरॉय ठीक-ठाक हैं, लेकिन कमज़ोर लेखन से उनका किरदार उतना असरदार नहीं हो पाता। मनीनी चड्ढा, नज़नीन मदान (अनन्या की मां), कविता पैस (सनी की मां), रोहिताश गौर (सनी के पिता), धरना दुर्गा (तुलसी की स्कूल फ्रेंड) और बाकी कलाकार भी अच्छा काम करते हैं। प्राजक्ता कोली (डिम्पल) छोटे लेकिन प्यारे कैमियो में असर छोड़ती हैं।

संगीत और तकनीकी पहलू :-


फिल्म के गाने काफ़ी पेप्पी हैं। ‘इश्क़ मंज़ूर’ दिलचस्प है और ‘बिजूरिया’ उससे भी बेहतर, लेकिन यह पहले गाने के बाद आने के कारण उसका असर कुछ कम हो जाता है। ‘पनवाड़ी’ सबसे बेहतरीन है। ‘तुमसे बेहतर’ और ‘तू है मेरी’ ठीक-ठाक हैं, जबकि ‘परफेक्ट’ एंड क्रेडिट्स में सुनाई देती है। जॉन स्टीवर्ट एडुरी का बैकग्राउंड स्कोर मास अपील वाला है।

मनीषनंदन की सिनेमैटोग्राफी भव्य है। मनीष मल्होत्रा, कुणाल रावल, वर्षा चंदनानी और शिल्पा माखिजा की कॉस्ट्यूम डिज़ाइनिंग बेहद ग्लैमरस है। क्षमता गुतव और स्वप्निल सुरैकर का प्रोडक्शन डिज़ाइन टॉप-क्लास है। मनन सागर और चारु श्री रॉय की एडिटिंग भी क्रिस्प और स्मूद है।

क्यों देंखे सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी ?

कुल मिलाकर, सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी एक फन-फिल्ड एंटरटेनर है, जो युवाओं और फैमिली ऑडियंस दोनों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। फिल्म में दर्शकों को आकर्षित करने की पूरी क्षमता है, भले ही इसे कांतारा: अ लीजेंड – चैप्टर 1 जैसी बड़ी फिल्म से टक्कर लेनी पड़ रही हो। फिल्म की बॉक्स ऑफिस पर चमक इस बात पर निर्भर करेगी कि इसका वर्ड ऑफ माउथ कैसा रहता है और आने वाला लंबा त्योहारों का वीकेंड इसे कितना फायदा पहुंचाता है।