फ़िल्म :- एक दीवाने की दीवानियत

कलाकार :- हर्षवर्द्धन राणे, सोनम बाजवा

निर्देशक :- मिलाप मिलन ज़वेरी

रेटिंग :- 3.5/5

Ek Deewane Ki Deewaniyat Movie Review: सॉलिड परफॉर्मेंस के साथ मास अपील रखती है एक दीवाने की दीवानियत

शॉर्ट में एक दीवाने की दीवानियत का प्लॉट :-

एक दीवाने की दीवानियत एक पागल प्रेमी की कहानी है।
विक्रमादित्य भोसले (हर्षवर्धन राणे) जन शक्ति पार्टी का एक ताकतवर नेता है, जिसे ज़िंदगी में अब तक जो भी चाहा, वह मिला है। लेकिन जब उसकी मुलाकात मशहूर अभिनेत्री अदा रंधावा (सोनम बाजवा) से होती है, तो उसकी ज़िंदगी एक खतरनाक मोड़ ले लेती है।
एक आर्मी विज़िट के दौरान दोनों के बीच आकर्षण जगता है, मगर जब अदा उसके प्रपोज़ल को ठुकरा देती है, तो यह अस्वीकृति विक्रमादित्य को भीतर तक तोड़ देती है। ‘ना’ सुनने से इनकार करते हुए, वह पागलपन, अहंकार और विनाश से भरी एक जुनूनी प्रेम कहानी में डूब जाता है।
आगे क्या होता है, यही फिल्म की बाकी कहानी है।

एक दीवाने की दीवानियत मूवी रिव्यू :-

मुश्ताक शेख और मिलाप मिलन ज़वेरी की कहानी रॉ, बेबाक और मेलोड्रामेटिक है । दोनों की पटकथा तेज़ रफ़्तार में आगे बढ़ती है । इंटेंस टकरावों और इमोशनल एलिमेंट्स से भरी हुई जिससे फिल्म की रफ़्तार कभी धीमी नहीं पड़ती । हालांकि, कुछ हिस्सों में लेखन और गहराई पा सकता था। मिलाप मिलन ज़वेरी के डायलॉग्स जोशीले, नाटकीय और दमदार हैं वही स्टाइलिश पंचलाइंस जिन पर सिंगल-स्क्रीन दर्शक सीटियाँ बजाने से खुद को रोक नहीं पाएंगे।

मिलाप मिलन ज़वेरी का निर्देशन पूरी तरह मासी टोन में है। उन्होंने कमर्शियल एंटरटेनमेंट और भावनात्मक कहानी के बीच संतुलन बनाते हुए यह सुनिश्चित किया है कि प्रेम कहानी ही फिल्म की धड़कन बनी रहे। फिल्म का ट्रीटमेंट जोश से भरा, ऊँचे सुर में और पूरी तरह सिनेमाई है।
क्योंकि ट्रेलर में कहानी ज़्यादा उजागर नहीं की गई थी, दर्शकों के लिए कई मोड़ सरप्राइज़ की तरह आते हैं। इंटरमिशन पॉइंट चौंकाने वाला है और यह सेकेंड हाफ के लिए प्लॉट तैयार करता है, जो दिलचस्प और नाटकीय बनता है।

वहीं कमियों की बात करें तो, फिल्म में कुछ किरदारों के व्यवहार एक वर्ग को असहज कर सकते हैं। मेकर्स ने इस पहलू को फिल्म में एड्रेस किया है, लेकिन वह थोड़ा देर से और सीमित असर के साथ आता है। सेकेंड हाफ थोड़ा लंबा लगता है, और प्री-क्लाइमैक्स में किरदार का दिल बदलना उतना विश्वसनीय नहीं लगता। अंत में, फिल्म की टोन ज़्यादा हाई और नाटकीय है जो मसाला पसंद करने वाले दर्शकों को खूब भाएगी, लेकिन मल्टीप्लेक्स ऑडियंस को यह थोड़ी पुरानी शैली की लगेगी।

परफॉरमेंस :-

हर्षवर्धन राणे ने प्रेमी से पागलपन की हद तक पहुँचने वाले व्यक्ति का रूपांतरण बेहद प्रभावशाली ढंग से पेश किया है । उनकी आँखें और बॉडी लैंग्वेज शब्दों से ज़्यादा बोलती हैं वे जुनून, असुरक्षा और दर्द को बखूबी उकेरते हैं। सोनम बाजवा ने एक परतदार किरदार में शानदार काम किया है। उन्होंने अदा के रूप में गरिमा, दृढ़ता और भावनात्मक गहराई का संतुलन बखूबी निभाया है। यह परफॉर्मेंस साबित करता है कि सोनम बॉलीवुड में लंबी और सशक्त पारी खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शाद रंधावा (सावंत) हमेशा की तरह भरोसेमंद हैं। सचिन खेड़ेकर (गणपत राव) ने मजबूत सपोर्ट दिया है। आनंद नारायण महादेवन (अदा के पिता), शैलेश कोर्डे (गोविंद गोकले) और राजेश खेड़ा (रहेजा) ने अपने किरदारों में अच्छा काम किया है, लेकिन फिल्म के आगे बढ़ने के साथ उनके किरदार फीके पड़ जाते हैं।

संगीत और तकनीकी पहलू:

फिल्म का संगीत इसकी सबसे बड़ी यूएसपी में से एक है। ‘दीवानियत’ टाइटल ट्रैक प्रभाव छोड़ता है, जबकि ‘खूबसूरत’ अपने खूबसूरत फिल्मांकन और सही मौके पर इस्तेमाल के कारण standout बनता है।‘बोल कफारा क्या होगा’, ‘दिल दिल दिल’, ‘मेरा हुआ’ और ‘हम बस तेरे हैं’ जैसे गाने भावनात्मक रूप से असरदार हैं और फिल्म के पागलपन भरे रोमांस में रूह जोड़ देते हैं।
जॉन स्टीवर्ट एडुरी का बैकग्राउंड स्कोर तनाव और भावना दोनों को उभारता है धड़कते बीट्स और इमोशनल अंडरटोन के साथ।

निगम बोंबज़न की सिनेमैटोग्राफी फिल्म को भव्य लुक देती है। तजमुल शेख और अंशिता मनोत का प्रोडक्शन डिज़ाइन समृद्ध है, जबकि अवनी प्रताप गुम्बर और रजत मंचंदा के कॉस्ट्यूम्स स्टाइलिश और किरदारों के मूड से मेल खाते हैं।

अजय ठाकुर पठानिया का एक्शन सीमित है लेकिन जरूरत के मुताबिक असरदार है। माहिर ज़वेरी की एडिटिंग क्रिस्प है, हालांकि दूसरे हाफ में फिल्म थोड़ा खिंचती महसूस होती है।

क्यों देंखे एक दीवाने की दीवानियत ?

कुल मिलाकर, एक दीवाने की दीवानियत एक जोशीली और बिंदास मासी एंटरटेनर है जिसमें जुनून, ड्रामा और शानदार परफॉर्मेंस का जबरदस्त संगम है। दमदार म्यूज़िक और गहराई लिए इमोशन इसे और प्रभावशाली बनाते हैं। एक्सटेंडेड वीकेंड, नियंत्रित बजट और बी व सी सेंटर्स के दर्शकों के लिए इसके हाई मनोरंजन स्तर को देखते हुए, मिलाप मिलन ज़वेरी की यह लव स्टोरी बॉक्स ऑफिस पर एक लाभदायक डील साबित हो सकती है।