ऑल लिविंग थिंग्स एनवायरनमेंटल फ़िल्म फ़ेस्टिवल यानी ALT EFF, जो पर्यावरण और समाज से जुड़ी कहानियों को सामने लाने वाला भारत का प्रमुख मंच है, इस वर्ष दो महत्वपूर्ण फ़िल्मों को प्रदर्शित करेगा, ह्यूमन्स इन द लूप जिसकी एग्ज़िक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं किरण राव और पन्हा, मराठी शॉर्ट फ़िल्म जिसे वन इंडिया स्टोरीज़ ने बनाया है और जिसमें दिया मिर्ज़ा की विशेष भूमिका है। पन्हा एक मार्मिक कहानी है एक छोटे से गाँव के मासूम बच्चे की, जिसके परिवार का आम का बाग़ बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स के चलते उजड़ने के कगार पर है। यह फ़िल्म विकास और परंपरा के बीच संघर्ष को बड़े ही संवेदनशील ढंग से पेश करती है और विस्थापन, खोने के दुख और ग्रामीण लोगों की जिजीविषा को उजागर करती है।

किरण राव और दिया मिर्ज़ा ने जताई खुशी
वहीं ह्यूमन्स इन द लूप एक फीचर फ़िल्म है, जिसमें किरण राव एग्ज़िक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं। यह फ़िल्म एक आदिवासी महिला की कहानी के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पारंपरिक ज्ञान के रिश्ते को दिखाती है। यह फ़िल्म यह सवाल उठाती है कि तेज़ी से बढ़ती तकनीक की दुनिया में इंसानी मेहनत और पुरखों के ज्ञान की कितनी अहमियत बची है।
ALT EFF की प्रोग्रामिंग डायरेक्टर और सह-संस्थापक अनाका ने दोनों फ़िल्मों के चयन पर खुशी जताते हुए कहा, “हम ऐसे सिनेमा को सामने लाना चाहते हैं, जो हमें सोचने पर मजबूर करे कि हम प्रकृति के साथ कैसे जी रहे हैं। पन्हा और ह्यूमन्स इन द लूप दो अलग तरह की कहानियाँ हैं, एक गाँव की मिट्टी से जुड़ी, दूसरी डिजिटल दुनिया की लेकिन दोनों ही संतुलन और संवेदना का अहम संदेश देती हैं।”
अभिनेत्री, निर्माता और पर्यावरण की अग्रणी समर्थक दिया मिर्ज़ा ने कहा, “पन्हा मेरे दिल के बेहद करीब है। यह फ़िल्म उन सच्चाइयों को दिखाती है जिनसे देश के कई परिवार रोज़ गुज़र रहे हैं, विकास और संरक्षण के बीच की नाज़ुक जंग। ALT EFF इस कहानी को ऐसे दर्शकों तक पहुँचाएगा जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की चिंता करते हैं, इसके लिए मैं आभारी हूँ।”
फ़िल्म निर्माता किरण राव ने ह्यूमन्स इन द लूप के बारे में कहा, “यह फ़िल्म हमारे आज के समय की बात करती है, जहाँ मशीनों की दौड़ में इंसानों की समझ और आदिवासी ज्ञान को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। तकनीक का मतलब इंसानों की भलाई होना चाहिए, उल्टा नहीं। मुझे बेहद खुशी है कि ALT EFF जैसी सोच रखने वाला महोत्सव हमारी फ़िल्म को दर्शकों तक पहुँचा रहा है।”
ऑल लिविंग थिंग्स एनवायरनमेंटल फ़िल्म फ़ेस्टिवल ऐसे सिनेमा को आगे बढ़ाता आ रहा है जो पर्यावरण, जैव विविधता और धरती के भविष्य पर संवाद को मज़बूत बनाता है, और बदलाव की राह में कला को एक महत्वपूर्ण साधन मानता है।
















