इतिहास की सबसे बड़ी तिशेषिा यह है तक िह अक्सर उन क्षणों में रचा जािा है तजन्हें उस िक्त कोई असाधारण नहीं समझिा। एक बच्चे का पहल़ी बार तिद्यालय में प्रिेश भ़ी देखने में एक साधारण स़ी गतितितध लगि़ी है। तकिंिु जो आँखें थोडा गहरा देखि़ी हैं, िे जानि़ी हैं तक उस एक कदम में तकिऩी प़ीत़ियों का भाग्य समाया होिा है। िह द्वार केिल एक बच्चे के तलए नहीं खुलिा बतकक उसके साथ उस पररिार की सिंभािनाएँ खुलि़ी हैं, उस समाज की आकािंक्षाएँ खुलि़ी हैं और आने िाले कल की अनतगनि सिंभािनाएँ भ़ी उस क्षण जन्म लेि़ी हैं। यह़ी कारण है तक जब हम गुजराि के ित्काल़ीन मुख्यमिंत्ऱी एििं हमारे िितमान मानऩीय प्रधानमिंत्ऱी श्ऱी नरेंद्र मोद़ी ज़ी की दूरदृति से प्रारिंभ हुए शाला प्रिेशोत्सि और कन्या केलिण़ी रथयात्रा के 23 िषों के इस गौरिशाल़ी सफर पर दृतिपाि करिे हैं िो यह तकस़ी सरकार के अतभयान की सफल-गाथा मात्र नहीं लगि़ी बतकक यह उस सामातजक रूपािंिरण की कहाऩी प्रि़ीि होि़ी है तजसने गुजराि की कई प़ीत़ियों के ज़ीिन को नई तदशा और नई धुऱी प्रदान की है।

िषत 2003 में, जब ित्काल़ीन मुख्यमिंत्ऱी और िितमान में देश के यशस्ि़ी मानऩीय प्रधानमिंत्ऱी श्ऱी नरेंद्र मोद़ी ज़ी ने इस अतभयान की नींि रख़ी, िब राज्य अनेक सामातजक और तिकासात्मक चुनौतियों का सामना कर रहा था। तशक्षा का क्षेत्र भ़ी उन महत्िपूणत चुनौतियों में से एक था। िषत 2001-02 में तिद्यालय छोडने की दर 37 प्रतिशि से अतधक थ़ी अथाति् लगभग हर ि़ीसरा बच्चा तशक्षा की मुख्यधारा से बाहर हो जािा था। अनेक पररिार तशक्षा की उपयोतगिा को लेकर अभ़ी भ़ी सिंशय में थे और बेतियों की तशक्षा सामातजक एििं आतथतक बाधाओिं के बोझ िले और भ़ी अतधक प्रभातिि थ़ी।
ऐसे समय में हमारे लोकतप्रय जननेिा मानऩीय श्ऱी नरेंद्र मोद़ी ज़ी ने शाला प्रिेशोत्सि के रूप में एक ऐसा तिचार सामने रखा, जो सुनने में भले ह़ी सरल था, लेतकन उसके पररणाम आगे चलकर अत्यिंि क्ािंतिकाऱी तसद्ध हुए। "वशक्षा केवल सरकार का ववषय नहीं बवकक समाज का संककप बनना चावहए।" यह मानऩीय श्ऱी नरेन्द्र मोद़ी ज़ी का िह़ी तिचार था तजसने इस अतभयान को एक प्रशासतनक कायतक्म से ऊपर उठाकर जन-अतभयान का स्िरूप तदया। शाला प्रिेशोत्सि की सबसे तितशि और अनुकरण़ीय तिशेषिा यह रह़ी तक इसने शासन और समाज के ब़ीच की दूऱी को तमिा तदया। मुख्यमिंत्ऱी से लेकर मिंतत्रयों िक, तिधायकों से लेकर IAS, IPS और IFS अतधकाररयों िक सभ़ी गाँि-गाँि पहु ँचे, पररिारों से तमले और बच्चों का हाथ थामकर उन्हें तिद्यालय के द्वार िक ले गए। और तपछले 23 िषों से यह परिंपरा तनबातध जाऱी है।

तकस़ी भ़ी तिचार की िास्ितिक शतक्त उसके शब्दों में नहीं बतकक उसके पररणामों में तदखाई देि़ी है। तपछले 23 िषों में शाला प्रिेशोत्सि और कन्या केलिण़ी रथयात्रा ने भ़ी अपऩी साथतकिा को इस़ी कसौि़ी पर तसद्ध तकया है। इस पहल की सबसे बड़ी उपलतब्ध केिल तिद्यालयों िक बच्चों की ब़िि़ी पहु ँच नहीं है, बतकक उन लाखों ज़ीिनों में आया िह सकारात्मक पररिितन है, तजसे शाला प्रिेशोत्सि और कन्या केलिण़ी रथयात्रा के माध्यम से तशक्षा ने सिंभि बनाया है। िषत 2003 में ित्काल़ीन मुख्यमिंत्ऱी के रूप में मानऩीय श्ऱी नरेन्द्र मोद़ी ज़ी की प्रेरणा से तजन बच्चों ने पहल़ी बार तिद्यालय का द्वार पार तकया था, आज उनमें से कोई डॉक्िर है, कोई इिंज़ीतनयर, कोई तशक्षक है िो कोई सफल उद्यम़ी; लेतकन इन सब की साझा पहचान यह है तक मानऩीय श्ऱी नरेन्द्र मोद़ी ज़ी की दूरदशी सोच और शाला प्रिेशोत्सि - कन्या केलिण़ी रथयात्रा जैसे प्रयासों ने उन्हें तशक्षा के माध्यम से अपने सपनों को साकार करने का अिसर प्रदान तकया।

तकस़ी समाज में सबसे गहरा और स्थाय़ी पररिितन िब आिा है जब उसकी बेतियाँ आगे ब़िि़ी हैं। यह़ी कारण है तक श्ऱी मोद़ी ज़ी ने प्रारिंतभक दौर में ह़ी यह समझ तलया था तक गुजराि के भतिष्य को सशक्त बनाना है िो बेतियों की तशक्षा को जनआिंदोलन का स्िरूप देना होगा। इस़ी सोच के साथ कन्या केलिण़ी रथयात्रा को शाला प्रिेशोत्सि का एक अतिभाज्य अिंग बनाया गया। तपछले दो दशकों में गुजराि में बेतियों की तशक्षा के प्रति सामातजक दृतिकोण में जो रूपािंिरण आया है िह केिल सरकाऱी प्रयासों का नहीं बतकक एक सामूतहक चेिना के जागरण का प्रमाण है। आज अतभभािक बेतियों को केिल तिद्यालय ह़ी भेजना नहीं चाहिे बतकक िे उन्हें उच्च तशक्षा की ऊँचाइयों िक पहु ँचिे हुए भ़ी देखना चाहिे हैं।

आदरण़ीय श्ऱी मोद़ी ज़ी द्वारा प्रारिंभ तकए गए इस सामातजक पररिितन के सिंककप को और सुदृ़ि करने के तलए राज्य सरकार ने नमो लक्ष्म़ी योजना प्रारिंभ की है, तजसके अिंिगति कक्षा 9 से 12 िक की बेतियों को 50,000 रुपये िक की आतथतक सहायिा प्रदान की जाि़ी है। साथ ह़ी, तिज्ञान तिषय में अध्ययनरि छात्रों को प्रोत्सातहि करने के उद्देश्य से नमो सरस्िि़ी तिज्ञान साधना योजना भ़ी लागू की गई है, तजसके अिंिगति कक्षा 11 और 12 में तिज्ञान सिंकाय में अध्ययन के इच्छुक तिद्यातथतयों को दो िषों के दौरान 25,000 रुपये िक की सहायिा प्रदान की जाि़ी है। क्योंतक हमारा सिंककप है तक आतथतक पररतस्थतियाँ अब तकस़ी भ़ी बच्चे की प्रतिभा और उसके सपनों की उडान में बाधा न बन सकें ।
तशक्षा का उद्देश्य बच्चों का तिद्यालय में केिल नामािंकन सुतनतिि करना नहीं होिा बतकक उसकी िास्ितिक साथतकिा िब तसद्ध होि़ी है जब बच्चा तिद्यालय में रहिे हुए स़ीखने की तजज्ञासा, सोचने की स्िििंत्रिा और अपने भ़ीिर तनतहि सिंभािनाओिं को पहचानने की दृति तिकतसि कर सके । इस़ी सोच के साथ िषत 2009 में ित्काल़ीन मुख्यमिंत्ऱी के रूप में मानऩीय श्ऱी नरेन्द्र मोद़ी ज़ी के नेितत्ि में प्रारिंभ हुआ गुणोत्सि आज गुणोत्सि 2.0 (GSQAC) के रूप में तिकतसि हो चुका है और तिद्यालयों में गुणित्ता आधाररि मूकयािंकन की एक सुदृ़ि परिंपरा स्थातपि कर चुका है। इस़ी क्म में राष्ऱीय तशक्षा ऩीति 2020 के अनुरूप तिकतसि स्कूल क्िातलि़ी असेसमेंि एिंड एश्योरेंस फ्रेमिकत (SQAAF) के अिंिगति तिद्यालयों की गुणित्ता के मूकयािंकन हेिु 211 मानक तनधातररि तकए गए हैं, जो बच्चों के समग्र तिकास, स़ीखने की गुणित्ता और शैक्षतणक उत्कतििा को सुतनतिि करने की तदशा में एक महत्िपूणत कदम हैं।

इिना ह़ी नहीं, राष्ऱीय तशक्षा ऩीति 2020 के अनुरूप गुजराि ने 5+3+3+4 शैक्षतणक सिंरचना भ़ी लागू कर द़ी है और बालिातिका का साितभौतमक तक्यान्ियन भ़ी हो रहा है। िहीं, आधुतनक िकऩीक ने भ़ी इस यात्रा में एक शतक्तशाल़ी भूतमका तनभाई है। तडतजिल रूप से उपलब्ध जन्म पिंज़ीकरण प्रणाल़ी और चाइकड रैतकिंग तसस्िम के एकीकरण से प्रत्येक बच्चे िक पहु ँच और उसकी सिि तनगराऩी सुतनतिि हो रह़ी है। इसके साथ ह़ी, गुजराि का तिद्या सम़ीक्षा केंद्र, जो भारि की पहल़ी आतिततफतशयल इिंिेतलजेंस सिंचातलि शैक्षतणक तनगराऩी व्यिस्था है, पूऱी तशक्षा प्रणाल़ी की ररयल-िाइम मॉतनिररिंग कर रहा है। इस़ी व्यिस्था के अिंिगति AI आधाररि अली िॉतनिंग तसस्िम सिंभातिि ड्रॉपआउि होने िाले बच्चों की पूित पहचान कर समय रहिे आिश्यक मागतदशतन को भ़ी सुतनतिि कर रहा है। इस िरह से, राज्य सरकार के ये प्रयास दशातिे हैं तक हमने शाला प्रिेशोत्सि की मूल भािना को आधुतनक युग में एक नई प्रासिंतगकिा द़ी है।

तकस़ी भ़ी अतभयान की सच्च़ी िाकि िब तसद्ध होि़ी है जब समाज स्ियिं उसका भाग़ीदार बन जाए। तपछले 23 िषों में जनिा और तितभन्न सिंस्थाओिं द्वारा तिद्यालयों को लगभग 326 करोड रुपये का योगदान प्राप्त हुआ है। इस़ी िरह, तिद्यालय प्रबिंधन सतमतियों में 75 प्रतिशि अतभभािकों की भाग़ीदाऱी और 50 प्रतिशि मतहला प्रतितनतधत्ि ने तशक्षा को िास्िि में एक सामुदातयक आिंदोलन का स्िरूप दे तदया है। इिना ह़ी नहीं, गुजराि सरकार की मुख्यमिंत्ऱी ज्ञान साधना और ज्ञान सेिु मेररि स्कॉलरतशप जैस़ी योजनाएँ आज उन मेधाि़ी तिद्यातथतयों के तलए आगे का मागत प्रशस्ि कर रह़ी हैं जो प्रतिभा िो रखिे हैं तकिंिु सिंसाधनों की कम़ी से सपनों को तिराम देने पर तििश हो सकिे थे। हमारे यशस्ि़ी प्रधानमिंत्ऱी श्ऱी नरेंद्र मोद़ी ज़ी ने एक बार कहा था, “यवद हमें ववकवसत भारत का वनमााण करना है, तो हमें अपने बच्चों के सपनों को शवि देनी होगी।” शाला प्रिेशोत्सि और कन्या केलिण़ी रथयात्रा की 23 िषों की यह यात्रा उस़ी तिचार का सबसे सज़ीि और प्रामातणक साक्ष्य है। एक ब़ीज बोने िाला जानिा है तक िह उसकी छाँि में नहीं बैठेगा, तफर भ़ी िह उसे पूरे तिश्वास के साथ धरि़ी में रोपिा है। शाला प्रिेशोत्सि और कन्या केलिण़ी रथयात्रा भ़ी आदरण़ीय मोद़ी ज़ी द्वारा बोया गया ऐसा ह़ी एक दूरदशी ब़ीज है, जो आज तशक्षा, समान अिसर और सामातजक जागरण के एक तिशाल ििितक्ष के रूप में हमारे सामने खडा है, तजसकी छाया में गुजराि की नई प़ीत़ियाँ अपने सपनों को आकार दे रह़ी हैं। समय ब़ीििा है, नेितत्ि बदलिे हैं, योजनाएँ भ़ी बदलि़ी हैं, लेतकन कुछ तिचार ऐसे होिे हैं जो प़ीत़ियों की तनयति का तहस्सा बन जािे हैं। यह पहल उस़ी तिचार की ज़ीििंि अतभव्यतक्त है तजसने लाखों बच्चों को अिसर, लाखों बेतियों को आत्मतिश्वास और पूरे समाज को एक नई तदशा प्रदान की है। भतिष्य की प़ीत़ियाँ जब गुजराि की तिकास यात्रा का इतिहास तलखेंग़ी िो प्राथतमक तशक्षा के क्षेत्र में आदरण़ीय श्ऱी नरेन्द्र मोद़ी ज़ी के ये प्रयास हमेशा सामातजक क्ािंति के रूप में स्मरण तकए जाएँगे। -
भूपेन्द्द्र प ेल
मुख्यमिंत्ऱी, गुजराि
















