डिज़्नी की करोड़ों की कमाई करने वाली फ़्रैंचाइज़ी ज़ूटोपिया का बहुप्रतीक्षित दूसरा भाग समाज में मौजूद पक्षपात और उससे निपटने के तरीक़ों पर एक बेहद प्रासंगिक कहानी लेकर आ रहा है। लगभग एक दशक बाद, जब पहले भाग ने पूरी दुनिया के दर्शकों का दिल जीता था, ज़ूटोपिया 2 मूल फ़िल्म के केंद्र में रहे पूर्वाग्रह और सह-अस्तित्व के मुद्दों को और गहराई से छूती है।

निर्देशक बायरन हॉवर्ड ने बताई ज़ूटोपिया की USP
निर्देशक बायरन हॉवर्ड का कहना है कि इस फ़्रैंचाइज़ी की सबसे बड़ी ताक़त इसकी दंतकथा जैसी कहानी कहने की शैली है। वैश्विक प्रचार के दौरान उन्होंने ए.एफ.पी. (समाचार संस्था) से कहा कि जानवरों की भूमिकाएँ फ़िल्मकारों को “मानव स्वभाव और हमारी ग़लतियों का आईना दिखाने” का अवसर देती हैं।
नई फ़िल्म ज़ूटोपिया शहर में शिकारियों और शिकारों के बीच की असहज शांति को फिर से परखती है। तरक्की हुई है, लेकिन रूढ़ियाँ आज भी ज़िद की तरह क़ायम हैं।
जूडी हॉ्प्स अपने पुराने साथी निक वाइल्ड से फिर जुड़ती है, जिसकी चालाकी जो पहले ठग रह चुका है इस बार भी बेहद काम आती है। उनकी साझेदारी की परीक्षा तब होती है जब शहर के शताब्दी उत्सव के दौरान एक बड़ा चोरी का मामला सामने आता है। पहला शक एक साँप पर जाता है ऐसी प्रजाति जिसे ऐतिहासिक रूप से ज़ूटोपिया में प्रवेश से रोका गया था। लेकिन जांच आगे बढ़ने पर सच्चाई और उलझी हुई निकलती है: असल आरोपी, गैरी, सिर्फ़ अपने परिवार की प्रतिष्ठा वापस पाना चाहता है।
सह-निर्देशक जैरेड बुश कहते हैं कि यह चरित्र सबसे आम पूर्वाग्रहों को चुनौती देता है। उनके अनुसार गैरी “हमारे द्वारा बनाए गए सबसे कोमल और संवेदनशील पात्रों में से एक” है। जैसे-जैसे कहानी बढ़ती है, जूडी और निक को अपने ही अंतर का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी दोस्ती और उनका नज़रिया दोनों एक मुश्किल मोड़ पर आ जाते हैं। हॉवर्ड कहते हैं कि वे चाहते थे कि इन दोनों के मन में यह सवाल उठे- “क्या हमारी अलग-अलग सोच इतनी बड़ी है कि हमारी साझेदारी नहीं टिक पाएगी?”
बुश का कहना है, “लोग हमेशा दुनिया को एक ही नज़र से नहीं देखते। पर जब हम एक-दूसरे से बातें करने को तैयार रहते हैं, तो यही अंतर हमें तोड़ते नहीं, मज़बूत बनाते हैं।”
ज़ूटोपिया 2 भारत में 28 नवम्बर को अंग्रेज़ी, हिन्दी, तमिल और तेलुगु में प्रदर्शित होगी।
















