‘आयशा’ जेन ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ के उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ ‘à¤à¤®à¥à¤®à¤¾â€™ पर आधारित है जो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने लगà¤à¤— 200 वरà¥à¤· पूरà¥à¤µ (सनॠ1815 में) लिखा था। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ दौर के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• बदलाव और à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¤•रण किया गया है, लेकिन इस बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने की à¤à¥€ कोशिश की गई है कि उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ की आतà¥à¤®à¤¾ के साथ छेड़छाड़ नहीं हो।
दिलà¥à¤²à¥€ में रहने वाली आयशा (सोनम कपूर) मैच मेकर है और ये उसका शौक है। दूसरों के मामले में वह हद से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दखल देती है। शैफाली (अमृता पà¥à¤°à¥€) à¤à¤• बहनजी टाइप लड़की है, जिसकी जोड़ी वह रणधीर गंà¤à¥€à¤° (सायरस साहूकार) के साथ जमाने की कोशिश करती है। इस काम में पिंकी (इरा दà¥à¤¬à¥‡) नामक उसकी सहेली मदद करती है।
शैफाली के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ रणधीर आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ हो इसके लिठआयशा मिडिल कà¥à¤²à¤¾à¤¸ गरà¥à¤² शैफाली का हà¥à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ बदल देती है ताकि वह हॉट नजर आà¤à¥¤ लेकिन आयशा का यह पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ तब फेल हो जाता है जब रणधीर उसे पà¥à¤°à¤ªà¥‹à¤œ करता है। आयशा उसे ठà¥à¤•रा देती है तो रणधीर को पिंकी अचà¥à¤›à¥€ लगने लगती है।
इसके बाद वह कई जोडि़याठजमाने की कोशिश करती है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिलती है और सबसे वह बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ मोल ले लेती है। अंत में जब वह अकेली रह जाती है तब उसे अहसास होता है कि जोड़ी जमाई नहीं जा सकती है।
उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ का फिलà¥à¤®à¥€à¤•रण करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल काम है और ये बात ‘आयशा’ में à¤à¥€ महसूस होती है। इमोशंस खà¥à¤²à¤•र सामने नहीं आ पाते हैं। पà¥à¤¯à¤¾à¤° के मामले में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° किरदार कनà¥à¤«à¥à¤¯à¥‚ज नजर आते हैं। पूरी फिलà¥à¤® में आयशा और अरà¥à¤œà¥à¤¨ लड़ते रहते हैं, लेकिन फिलà¥à¤® के अंत में आयशा को अचानक महसूस होता है कि वह अरà¥à¤œà¥à¤¨ को चाहती है। शायद इस डर से वह अरà¥à¤œà¥à¤¨ को अपना लेती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उसके सामने कोई विकलà¥à¤ª नहीं था।
सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤ªà¥à¤²à¥‡ कà¥à¤› इस तरह लिखा गया है कि फिलà¥à¤® जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लंबी हो गई है और कहानी धीमी रफà¥à¤¤à¤¾à¤° से आगे बढ़ती है।
फिलà¥à¤® के सारे कैरेकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ उस वरà¥à¤— का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करते हैं जिनके पास पैसों की कमी नहीं है। पारà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤, कà¥à¤²à¤¬, पिकनिक, बà¥à¤¯à¥‚टी पॉरà¥à¤²à¤°, शादियाà¤, फैशन, सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤²à¤¿à¤‚ग और गॉसिपिंग के इरà¥à¤¦à¤—िरà¥à¤¦ उनका जीवन घूमता है। आयशा को à¤à¥€ कà¥à¤› काम नहीं है इसलिठवह मैच मेकिंग के लिठलोगों को ढूà¤à¤¢à¤¤à¥€ रहती है ताकि उसकी लाइफ में मसाला रहे। उचà¥à¤š वरà¥à¤— की लाइफ सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² को अचà¥à¤›à¥€ तरह से दिखाया गया है।
फिलà¥à¤® की निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• राजशà¥à¤°à¥€ ओà¤à¤¾ ने सà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤Ÿ की बजाय सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤²à¤¿à¤‚ग पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दिया है। यदि वे थोड़ा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ सà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤Ÿ पर à¤à¥€ देती तो फिलà¥à¤® बेहतरीन बन सकती थी। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कलाकारों से अचà¥à¤›à¤¾ अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ करवाया। सारे किरदारों और वातावरण को बेहतरीन तरीके से पेश किया गया है। सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤²à¤¿à¤‚ग के मामले में फिलà¥à¤® लाजवाब है। डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥‡à¤¸, लाइफ सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤², à¤à¤¸à¥‡à¤¸à¤°à¥€à¤œà¤¼, रंगों का संयोजन आà¤à¤–ों को सà¥à¤•ून देते हैं। कासà¥à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚म डिजाइनरà¥à¤¸ परà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ कà¥à¤°à¥ˆà¤¶à¥€ और कà¥à¤£à¤¾à¤² रावल का काम उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय हैं।
फिलà¥à¤® का संगीत पà¥à¤²à¤¸ पाइंट है। अमित तà¥à¤°à¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€ ने अचà¥à¤›à¥€ धà¥à¤¨à¥‡à¤‚ बनाई हैं और ‘आयशा’ तथा ‘गल â€à¤®à¥€à¤ ी मीठी बोल’ हिट हो चà¥à¤•े हैं। डिà¤à¤—ो रॉडà¥à¤°à¤¿à¤—à¥à¤œ की सिनेमॉटोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ फिलà¥à¤® को रिच लà¥à¤• देती है। संवाद चà¥à¤Ÿà¥€à¤²à¥‡ हैं।
फीमेल à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ का फिलà¥à¤® में दबदबा है। सोनम कपूर पूरी फिलà¥à¤® में छाई रहीं। अà¤à¤¯ देओल के लिठअवसर कम थे, लेकिन वे अपना असर छोड़ने में कामयाब रहे। इरा दà¥à¤¬à¥‡, अमृता पà¥à¤°à¥€, सायरस, अरà¥à¤£à¥‹à¤¦à¤¯ सिंह à¤à¥€ किसी से कम नहीं रहे।
‘आयशा’ को गà¥à¤¡ फिलà¥à¤® की बजाय गà¥à¤¡ लà¥à¤•िंग फिलà¥à¤® कहना बेहतर होगा।


