अभिनेत्री संदीपा धर एक कड़वी सच्चाई को उजागर कर रही हैं — भारत में हर साल लगभग 23 लाख लड़कियां केवल उचित माहवारी (पीरियड्स) स्वच्छता सुविधाओं की कमी के कारण स्कूल छोड़ देती हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि केवल 36% महिलाएं ही सुरक्षित सैनिटरी उत्पादों तक पहुँच रखती हैं। बाकी महिलाओं को पुराने कपड़े, राख या भूसे जैसे असुरक्षित विकल्पों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

माहवारी स्वच्छता और समानता के लिए आगे आईं संदीपा धर
संदीपा हमें याद दिलाती हैं कि हमारे देश में बुनियादी स्वच्छता आज भी एक विशेषाधिकार है। और जो लोग साधन, प्रभाव या मंच रखते हैं — उनके पास कुछ करने की ज़िम्मेदारी है।
“आइए, माहवारी से जुड़ी बातों को सामान्य बनाएं । ऐसी पहलों का समर्थन करें जो सैनिटरी उत्पाद उपलब्ध कराती हैं और माहवारी समानता की दिशा में काम करती हैं।”
उनका मानना है कि हर छोटा कदम मायने रखता है — चाहे वह एक पैकेट हो, एक बातचीत, या एक छोटा-सा दान। “यह हमारी बहनों, बेटियों, दोस्तों और उन लाखों लड़कियों के लिए हमारा कर्तव्य है जो इससे बेहतर की हक़दार हैं ।”
अपनी आवाज़ उठाकर, संदीपा धर हम सभी को प्रेरित कर रही हैं कि हम एक ऐसा संसार बनाएं जहाँ किसी लड़की को अपनी सेहत और शिक्षा के बीच चुनाव न करना पड़े।
















