आगामी स्पोर्ट्स महिला केंद्रित फ़िल्म शाबाश मिट्ठू को प्रमोट कर रही तापसी पन्नू, फ़िल्मों के अलावा अपनी बेबाकी को लेकर भी लोगों के बीच छाई रहती है । हाल ही में बॉलीवुड हंग़ामा के साथ हुए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में तापसी पन्नू ने लैंगिग समानता पर खुलकर बात की । साथ ही बताया कि फिल्म का बजट पुरुष-प्रधान और महिला-प्रधान फिल्मों के बीच की असमानता को दर्शाता है । वहीं तापसी पन्नू ने बताया कि जितनी स्क्रीन्स एक हीरो की फ़िल्म को मिलती है उतनी एक हीरोइन की फ़िल्म को नहीं मिलती ।

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तापसी पन्नू को पसंद आया ओटीटी का दौर

पुरुष प्रधान और महिला प्रधान फ़िल्मों के बीच लोगों द्दारा अंतर किए जाने पर तापसी ने कहा कि ओटीटी के आने से पुरुष प्रधान और महिला प्रधान फ़िल्मों के बीच का अंतर खत्म हो गया है अब यहां सब बराबर है । ओटीटी का दौर हर किसी कलाकार के लिए सेलिब्रेशन जैसा है । इस पर तापसी ने कहा, “महिला कलाकारों के लिए ओटीटी का दौर जश्न मनाने जैसा है क्योंकि, वहां कोई रिस्क फ़ैक्टर नहीं है । क्योंकि थिएटर में रिलीज होने का जो कलेक्शन करने का एक डर होता है, ओटीटी के आने से वो अब खत्म हो गया है । ओटीटी के आने से रिस्क टेकिंग फ़ैक्टर बढ़ गया है । फ़िल्म चाहे पुरुष प्रधान हो या महिला प्रधान, ओटीटी रिलीज से रिटर्न का खतरा नहीं रहता । इसके लिए सब समान है ।”

तापसी ने आगे कहा कि, “अगर कोई फ़िल्म सेम डे पर रिलीज हो रही हो तो, जितनी स्क्रीन्स एक हीरो की फ़िल्म को मिलती है उतनी एक हीरोइन की फ़िल्म को नहीं मिलती । मेरी खुद की फ़िल्म यदि हीरो की फ़िल्म के साथ रिलीज हुई है तो उसे कम ही स्क्रीन्स मिली है । लेकिन ओटीटी पर ऐसा नही है यहां सब समान है । क्योंकि यहां कॉन्टेंट तय करेगा कि किस को फ़िल्म देखनी है या नहीं । ओटीटी के आने से सब कुछ कॉन्टेंट ने ले लिया है । यही कारण है कि ओटीटी की वजह से महिला कलाकार को भी ज्यादा पहचाना जा रहा है ।”

शाबाश मिट्ठू की बात करें तो, श्रीजीत मुखर्जी के निर्देशन में बनी यह फिल्म महिला क्रिकेटर मिताली राज के जीवन और क्रिकेटर बनने के उनके सपने देखने की यात्रा से प्रेरित है । यह फिल्म 15 जुलाई को रिलीज होने के लिए पूरी तरह से तैयार है ।