अमिताभ बच्चन की हालिया रिलीज फ़िल्म झुंड दर्शकों को काफ़ी पसंद आ रही है । सैराट निर्देशक नागराज मंजुले की झुंड एक अनूठी स्पोर्ट्स ड्रामा फ़िल्म है जो जीवन में खेल के महत्व को दर्शाती है । 4 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई झुंड को पॉजिटिव रिव्यूज तो मिले ही साथ पॉजिटिव वर्ड ऑफ़ माउथ की वजह से फ़िल्म को हर जगह सराहा जा रहा है । इतना ही बॉलीवुड के मिस्टर परफ़ेक्शनिस्ट कहे जाने वाले आमिर खान ने भी झुंड की बहुत तारीफ़ की । लोगों को मनोरंजन के अलावा झुंड एक स्ट्रॉन्ग मैसेज भी देती है साथ ही जीवन में खेल के महत्व को दर्शाती है । अमिताभ बच्चन ने भी खेल को बहुत महत्वपूर्ण बताया है । बॉलीवुड हंग़ामा के साथ हुए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अमिताभ ने बताया कि अब खेल कूद कर भी आप नवाब बन सकते हैं ।

अमिताभ बच्चन ने बताई खेल की महत्ता
बिग बी ने कहा कि, अब ये कहावत पुरानी हो गई कि, खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब, पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब । अब सब कुछ बदल गया है क्योंकि अब खेल कूद कर भी आप नवाब बन सकते हैं ।
जिस तरह से पिंक फ़िल्म के बाद उसके डायलॉग 'नो मीन्स नो' ने काफ़ी लोगों को प्रभावित किया था ठीक उसी तरह झुंड के बाद लोगों के जीवन में खासकर ऐसे लोग जो सही दिशा न मिल पाने के कारण गलत रास्ते पर चले जाते हैं, उनकी जिंदगी में स्पोर्ट्स एक नई उम्मीद लेकर आएगा । इस पर अमिताभ ने कहा, “खेल जीवन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है । अनप्रिवलेज्ड बच्चों को समाज ने कभी समझा नहीं और उनके सामने एक दीवार खड़ी कर दी । तो मेरा ये कहना था फ़िल्म में कि जब तक ये दीवार टूटेगी नहीं तब तक ये आप तक नहीं पहुंच पाएंगे । समाज द्दारा बनाई गई इस दीवार को तोड़ना पड़ेगा । आपको इन्हें अवसर देना होगा । यदि आप इन्हें खेल कूद से भी रोक देंगे तो ये अपनी गलत आदतों से कभी मुक्ति नहीं पाएंगे ।
देश में छोटे छोटे शहरों से खिलाड़ी निकल रहे हैं
अमिताभ ने आगे खेल की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि, “स्पोर्ट्स में आप देख सकते हैं कि हमारे देश में छोटे छोटे शहरों से खिलाड़ी निकल रहे हैं । ये क्रिकेट खेलते हैं, फ़ुटबॉल खेलते हैं, बास्केटबॉल खेलते हैं, जो कभी हवाईजहाज में नहीं चढ़े, कभी शहर नहीं देखा । इतने गरीब थे कि उनके पास एक बैट खरीदने के लिए पैसा नहीं था वो आज आईपीएल में खेल रहे हैं । अपने खेल में प्रतिभा की वजह से वो आज करोडों कमा रहे हैं । तो ये बातें नौजवान पीढ़ी को प्रभावित करती है । बचपन से ये सुनते आए थे कि खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब, पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब । अब ये कहावत नहीं चलती । अब सब कुछ बदल गया है क्योंकि अब खेल कूद कर भी आप नवाब बन सकते हैं ।”
















