नॉन हॉलीडे रिलीज, तमाम विवाद झेलने और बॉक्स ऑफ़िस पर कई फ़िल्मों से मुकाबला करने के बावजूद द कश्मीर फाइल्स एक विजेता बनकर उभरी । डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री की फ़िल्म द कश्मीर फाइल्स बॉक्स ऑफ़िस पर हर दिन सफ़लता के नए इतिहास रच रही है । लेकिन विवेक रंजन अग्निहोत्री के लिए ऐसी सच्चाई को पर्दे पर दिखाना इतना आसान नहीं था । भले ही द कश्मीर फाइल्स ने महज 13 दिनों में 200 करोड़ का आंकड़ा छू लिया है लेकिन इस सक्सेस को पाना विवेक रंजन अग्निहोत्री के लिए आसान नहीं था ।

द कश्मीर फाइल्स को बनाने में विवेक रंजन अग्निहोत्री को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, घर भी रखना पड़ा गिरवी

विवेक रंजन अग्निहोत्री ने द कश्मीर फाइल्स के लिए झेली मुश्किलें

डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री ने बताया कि द कश्मीर फाइल्स के बनाते वक्त और बनने के बाद उन्होंने काफी मुश्किलों का सामना किया । इस बात का खुलासा खुद विवेक रंजन अग्निहोत्री ने अपने हाल ही में दिए इंटरव्यू में किया । हालांकि द कश्मीर फाइल्स की सफ़लता के बाद डायरेक्टर का इंटरव्यू लेना इतना आसान नहीं था लेकिन फ़िल्म को मिल रही अपार सफ़लता ने विवेक को जरा भी नहीं बदला है ।

इस बारें में विवेक ने कहा, "आप मुझे उस समय से जानते हैं जब मैंने 2005 में चॉकलेट बनाई थी। उस समय भी मैं बॉलीवुड के सांचे में फिट नहीं हो पाया था। जब मैंने 17 साल पहले अपनी जर्नी शुरू की थी तो मैंने फैसला किया था कि मैं अपनी तरह की फिल्में बनाउंगा और मैं कभी भी स्टार पावर वाली फ़िल्में नहीं बनाऊंगा। मेरा दृढ़ विश्वास है कि सिनेमा लेखक और निर्देशक का माध्यम है।"

 दुनियाभर के लोग कश्मीरी पंडितों तक पहुंच रहे हैं

द कश्मीर फाइल्स कोई फिल्म नहीं है। यह एक आंदोलन है। विवेक उसके रास्ते में आई शानदार सफलता से बेहद खुश हैं । “दुनिया भर के दर्शक पिन ड्रॉप साइलेंस में फिल्म देख रहे हैं। 3 घंटे 50 मिनट कोई मज़ाक नहीं है। दुनियाभर के लोग कश्मीरी पंडितों तक पहुंच रहे हैं । यह फ़िल्म कनाडा में इतना अच्छा काम क्यों कर रही है ? शुरूआत में वहां सिर्फ़ दो शोज थे फ़िल्म के और अब 90 से अधिक शोज में फ़िल्म दिखाई जा रही है । फ़िल्म हर जगह चर्चा का विषय है ।”

रामू (राम गोपाल वर्मा) ने द कश्मीर फाइल्स की सफलता पर एक वीडियो बनाया है जिसमें वह कहते हैं कि वह मेरी फिल्म से नफरत क्यों करते हैं । यह एक शानदार समीक्षा है। हम चार साल से द कश्मीर फाइल्स पर काम कर रहे थे। हमने इस फ़िल्म को बनाने में अपना सब कुछ लगा दिया यहां तक की अपना घर भी गिरवी रख दिया । फ़िल्म के लिए रिसर्च के लिए हम दुनिया के कई हिस्सों में गए । और इतने खर्चे के बाद भी हमें नहीं पता था कि इसका आउटपुट क्या निकलेगा ।”

विवेक ने यह भी बताया कि द कश्मीर फ़ाइल्स के लिए प्रोड्यूसर को बोर्ड पर लाना भी अपने आप में चुनौतीपूर्ण था । “लेकिन अंत में हमारे पास अभिषेक अग्रवाल थे जो बिना शर्त इस फ़िल्म में पैसा लगाने के लिए राजी हुए । इसके बाद जब फ़िल्म आधी हो गई तो जी भी बतौर प्रोड्यूसर फ़िल्म का हिस्सा बना । बॉलीवुड निर्माता चाहते थे कि मैं ठेठ पॉटबॉयलर बनाऊं जो हम करने को तैयार नहीं थे। हमने तय किया कि हम अपनी खुद की रिसर्च पर आधारित फिल्म खुद से बनाए गए फंड से बनाएंगे। 2010 में यह हमारा फैसला था। उसके बाद हमने ट्रैफिक जाम, द ताशकंद फाइल्स और अब द कश्मीर फाइल्स बनाई । और उसके बाद द दिल्ली फ़ाइल्स बनाएंगे ।”