दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने धर्मेंद्र के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें अपना करीबी सह-कलाकार और बेहद सच्चा इंसान बताया। दोनों ने सत्यकाम और चुपके चुपके जैसी क्लासिक फिल्मों से लेकर कई यादगार प्रोजेक्ट्स में साथ काम किया था। लेकिन शर्मिला टैगोर को धर्मेंद्र के साथ करण जौहर की रॉकी और रानी की प्रेम कहानी न कर पाने का अफ़सोस ज़िन्दगी भर रहेगा ।

शर्मिला टैगोर ने धर्मेंद्र को याद किया
शर्मिला जी ने बताया कि उन्हें करण जौहर की रॉकी और रानी की प्रेम कहानी में धर्मेंद्र के साथ काम करने का मौका मिला था, लेकिन बीमारी के कारण वह यह फिल्म नहीं कर पाईं। उन्होंने कहा, “मैं बीमार पड़ गई थी, इसलिए फिल्म नहीं कर सकी। हमारी आखिरी फिल्म सनी थी, जिसमें उन्होंने अपने बेटे सनी देओल के लिए एक छोटा-सा गेस्ट अपीयरेंस किया था।”
शर्मिला टैगोर ने आगे कहा कि हाल ही में एक डॉक्यूमेंट्री के सिलसिले में भी उनकी धर्मेंद्र से बातचीत हुई थी। “एक महिला मेरे ऊपर डॉक्यूमेंट्री बना रही थीं और वह धर्मेंद्र जी से बात करना चाहती थीं। उन्होंने मेरे बारे में बहुत अच्छी बातें कही थीं। काश हमें एक-दूसरे के साथ और भी काम करने और जुड़ने के मौके मिलते।”
धर्मेंद्र के निधन से दुखी शर्मिला जी ने कहा, “हमारा जन्मदिन भी एक ही दिन था। हमने सात फिल्मों में साथ काम किया । मुझे पता था उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, लेकिन उनके जाने की खबर बहुत दुखद है।”
धर्मेंद्र के साथ अपनी शुरुआती फिल्मों को याद करते हुए उन्होंने कहा, “हमने पहली बार देवर में काम किया, फिर उसी साल अनुपमा किया, दोनों गंभीर विषयों पर थीं । इसके बाद मेरे हमदम मेरे दोस्त जैसी पूरी तरह कमर्शियल फिल्म भी की। उनके साथ शूटिंग हमेशा बहुत आसान रहती थी। वह स्क्रीन पर जितने सहज थे, उतने ही ऑफ-स्क्रीन भी। सेट पर कभी ‘स्टार’ जैसा बर्ताव नहीं किया।”
उन्होंने धर्मेंद्र से पहली मुलाकात का वाक़िया भी साझा किया, “मैं वक्त की शूटिंग कर रही थी, वहीं उनकी मुलाकात हुई। वह बिल्कुल भी स्टार की तरह कपड़ों में नहीं थे। किसी ने उनकी तारीफ़ की तो उन्होंने बड़े प्यार से उसे गले लगा लिया। उनकी वही सच्चाई मेरे मन में बस गई।”
अपने साथ के काम में से वह चुपके चुपके को सबसे यादगार बताती हैं। “जहाँ भी जाती हूँ, लोग चुपके चुपके को अपनी पसंदीदा फिल्म बताते हैं। मुझे यकीन है धर्मेंद्र को भी ऐसे ही प्रतिक्रियाएँ मिलती होंगी। जब मैं बीमार थी, तब मैंने यह फिल्म फिर से देखी—मैं खूब हँसी। आज भी उतनी ही फ्रेश लगती है। हम बहुत कम ऐसी कॉमेडी बनाते हैं जो सच में टाइमलेस हों।”
















