अपने गहरे और दमदार अभिनय के लिए मशहूर एक्टर रणदीप हुड्डा ने अब एक नई रचनात्मक राह पकड़ ली है – लेखन। उन्होंने बताया कि भले ही एक्टिंग उनका पहला प्यार है, लेकिन लेखन उनके लिए सबसे संतोषजनक क्रिएटिव प्रोसेस बन गया है, जहां वह अपने दिल से जुड़ी कहानियों को लिख पा रहे हैं।

अब राइटर भी बने रणदीप हुड्डा ; अपने अब तक के फिल्मी अनुभव पर लिख रहे हैं कहानी ; दर्शकों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ी सच्ची कहानियों से कराएंगे रूबरू

रणदीप हुड्डा बने राइटर

कई सालों तक अलग-अलग किरदार निभाने के बाद अब रणदीप अपने अनुभवों और आस-पास देखी गई बातों को कहानियों में बदल रहे हैं, जिनमें इंसानी भावनाओं की गहराई और उनके आसपास की दुनिया का सच झलकता है। वह फिलहाल मुंबई के अंधेरी में वर्सोवा और आराम नगर पर आधारित शॉर्ट स्टोरीज़ की सीरीज़ पर काम कर रहे हैं – ये जगहें अनगिनत सपनों और संघर्षों की गवाह रही हैं।

इन कहानियों में हर रविवार बांसुरी बेचने वाले सड़क किनारे खड़े बांसुरी वाले की कहानी, मुंबई में स्ट्रगल करते एक्टर्स का सफर, कास्टिंग काउच की कड़वी सच्चाई और ऐसी कई कहानियां शामिल हैं, जिन्हें अक्सर देखा तो जाता है, लेकिन शायद ही कोई सुनाता है।

इस नए सफर के बारे में रणदीप ने कहा, “इन सालों में मैंने लेखन से गहरा जुड़ाव महसूस किया है। यह किसी भी क्रिएटिव प्रोसेस का सबसे अच्छा हिस्सा बन गया है। एक्टिंग में मैं दूसरों की लिखी कहानियों का हिस्सा बनता हूं, लेकिन लेखन में मैं अपनी देखी, जीयी और महसूस की गई कहानियां खुद गढ़ सकता हूं। वर्सोवा और आराम नगर इंसानी महत्वाकांक्षा और सर्वाइवल के गवाह रहे हैं, और मैं इन कहानियों को सामने लाना चाहता था।”

रणदीप आगे कहते हैं, “हर रविवार मैं एक बांसुरी वाले को देखता हूं, जो एक ही कोने पर खड़ा होकर बांसुरी बजाता है, जिसकी धुनें शहर की आवाज़ों में कहीं खो जाती हैं। उसके पीछे एक दुनिया है – स्ट्रगल कर रहे एक्टर्स, रोज़ की चुनौतियां, छोटे-छोटे सपने और टूटते दिल। इन कहानियों को लिखना मुझे एक उद्देश्य और हमारे आसपास की ज़िंदगी की परतों को समझने का तरीका देता है।”

रणदीप हुड्डा का लेखन की ओर यह कदम उनके क्रिएटिव एक्सप्रेशन को और बढ़ाता है, और दर्शकों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ी सच्ची और गहराई वाली कहानियों से रूबरू कराता है।