अभिनेता रणदीप हुड्डा ने तीन साल की लंबी रिकवरी के बाद एक बार फिर घुड़सवारी शुरू कर दी है। अपनी पहली निर्देशित फिल्म स्वातंत्र्य वीर सावरकर की शूटिंग के दौरान उन्हें गंभीर घुटने की चोट लगी थी। यह हादसा तब हुआ जब फिल्म वित्तीय समस्याओं के कारण रोक दी गई थी। इस दौरान रणदीप के घुटने के कई लिगामेंट फट गए, जिसके चलते उन्हें लंबे समय तक रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ा।

रणदीप हुड्डा को घुड़सवारी के दौरान लगी गंभीर चोट
वीर सावरकर के किरदार के लिए रणदीप ने काफी वज़न कम किया था, जिससे उनकी कमज़ोरी बढ़ गई। इसी वजह से एक दिन घुड़सवारी के दौरान वह बुरी तरह गिर गए। इस हादसे में उनकी चोट इतनी गंभीर थी कि वह बेहोश हो गए और उनके सभी लिगामेंट टूट गए। हालांकि इन मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। रणदीप ने अपनी खुद की बचत से फिल्म को पूरा किया, घुटने में ब्रेसेस पहनकर कई इंटेंस एक्शन सीन्स शूट किए और यहां तक कि कुछ दृश्यों में दौड़ते भी नज़र आए, जिससे उनकी चोट और बढ़ गई।
कोकिलाबेन अस्पताल में महीनों चले इलाज और कठिन रिहैब के बाद रणदीप अब अपने सबसे पसंदीदा खेल—घुड़सवारी में वापसी कर चुके हैं। वह एक अनुभवी घुड़सवार हैं और पोलो और शो जंपिंग जैसे खेलों से लंबे समय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते हैं और खुद के पोलो क्लब भी चलाते हैं।
अब जब रणदीप एक बार फिर सैडल में लौट आए हैं, तो उम्मीद है कि वह जल्द ही प्रतियोगी घुड़सवारी में वापसी कर सकते हैं।
उन्होंने खुद कहा है—“खेल के बिना जीवन अधूरा है, और प्रतिस्पर्धा के बिना कोई भी खेल पूरा नहीं होता।”अपनी रिकवरी और संघर्ष के सफर को याद करते हुए रणदीप ने घुड़सवारी और जीवन के बीच एक गहरी समानता बताते हुए कहा, “जैसे जिंदगी में, वैसे ही घुड़सवारी में भी, चाहे कितनी भी रुकावटें और गिरावटें आएं, आपको दोबारा सैडल में लौटना ही पड़ता है।”
उनकी यह वापसी सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि उनकी अडिग इच्छाशक्ति और जुनून का प्रेरणादायक उदाहरण है। अब जब उनका उत्साह फिर से जाग उठा है, यह देखना दिलचस्प होगा कि वह प्रतिस्पर्धी घुड़सवारी में दोबारा कब उतरते हैं और अपने नाम नई उपलब्धियां जोड़ते हैं।
















