लोक संगीत हमारी परंपरा और भावनाओं से जुड़ा होता है। जब बॉलीवुड इसे नए रंग और धुन में पेश करता है, तो यह पुरानी यादों के साथ नई पीढ़ी के दिल में भी जगह बना लेता है। फिल्म धुरंधर का नया टाइटल ट्रैक इसका ताज़ा उदाहरण है। इसकी जोशीली बीट्स और आधुनिक अंदाज़ ने पुराने पंजाबी लोक गीत को आज के दौर का हिट गाना बना दिया है । यहाँ पाँच ऐसे गाने हैं जिन्होंने लोक संगीत को नए रंग में ढालकर सभी का दिल जीता ।

1. टाइटल ट्रैक – धुरंधर
पंजाबी लोकगीत “ना दिल दे परदेसी नू”*से प्रेरित इस गाने में शशवत सचदेव का संगीत, हनुमानकाइंड का रैप और जस्मिन की आवाज़ का शानदार मेल है। पारंपरिक सुरों को हिप-हॉप बीट्स के साथ मिलाकर इसे बेहद जोशीला बनाया गया है।
2. “छल्ला” – जब तक है जान
रब्बी शेरगिल की soulful आवाज़ और ए.आर. रहमान के संगीत ने इस पंजाबी फोक गाने को अमर बना दिया। इसमें परदेसी दिल की तड़प और मिट्टी की खुशबू दोनों महसूस होती हैं।
3. “नैना दा क्या कसूर” – अंधाधुन
अमित त्रिवेदी का यह गाना सादगी में भी गहराई लिए हुए है। लोक संगीत की झलक और आधुनिक लय इसे खास बनाती है, जबकि आयुष्मान खुराना की आवाज़ इसमें मिठास घोलती है।
4. “अंबरसरिया” – फुकरे
सोना महापात्रा ने इस क्लासिक गीत को अपने अंदाज़ में गाकर नया रूप दिया है। हल्के संगीत और मधुर गायन ने इसे पुराना होते हुए भी ताज़ा एहसास दिया।
5. “लौंग दा लश्कारा” – पटियाला हाउस
ढोल, भांगड़ा और जोश से भरा यह गाना शंकर-एहसान-लॉय का धमाकेदार अंदाज़ दिखाता है। यह लोक संगीत की पारंपरिक ऊर्जा को पूरी तरह आधुनिक रूप देता है।
बॉलीवुड बार-बार लोक संगीत की ओर लौटता है, क्योंकि ये धुनें हमारी मिट्टी से जुड़ी हैं। हर नया रूप हमें याद दिलाता है कि परंपरा और आधुनिकता मिलकर भी उतनी ही मधुर लग सकती हैं।
















