हिंदी सिनेमा के दिग्गज फ़िल्ममेकर संजय लीला भंसाली ने फ़ाइनली अब राहत की सांस ली है । क्योंकि उनकी महत्वाकांक्षी बहुप्रतिक्षित फ़िल्म गंगूबाई काठियावाड़ी की शूटिंग अब पूरी हो चुकी है । तमाम रुकावटों के बाद फ़ाइनली आलिया भट्ट अभिनीत गैंगस्टर ड्रामा गंगूबाई काठियावाड़ी की शूटिंग खत्म हो गई है ।

तमाम रुकावटों के बाद फ़ाइनली खत्म हुई आलिया भट्ट की गंगूबाई काठियावाड़ी की शूटिंग, संजय लीला भंसाली ने ली राहत की सांस

संजय लीला भंसाली ने खत्म की गंगूबाई काठियावाड़ी की शूटिंग

पिछले दो सालों से चल रही गंगूबाई काठियावाड़ी की शूटिंग के बारें में बात करते हुए भंसाली ने कहा, “हमने 27 दिसंबर 2019 गंगूबाई काठियावाड़ी की शूटिंग शुरू की थी । इसके बाद मार्च 2020 में हमें कोरोना के कारण शूटिंग रोकनी पड़ी थी । पहले हम अक्टूबर 2020 को फ़िल्म रिलीज करने वाले थे । अब फ़ाइनली हमने 26 जून को शूटिंग खत्म कर दी है ।”

तो क्या राज कपूर, वी शांताराम, डेविड लीन और बाज लुहरमन सहित सिनेमा के महानतम लोगों की तुलना में भंसाली के लिए गंग़ूबाई को शूट करना सबसे कठिन साबित हुआ ?

मेरी हर एक फिल्म अपने हिस्से की मुश्किल लेकर आती है

इसके जवाब में भंसाली ने कहा, “मुझे नहीं पता कि यह सबसे कठिन थी या नहीं । क्योंकि मेरी हर एक फिल्म अपने हिस्से की मुश्किल लेकर आती है ।” भंसाली ने माना कि पद्मावत की शूटिंग भी उन्होंने तमाम विरोधों के बीच पूरी की थी । पद्मावत की शूटिंग के दौरान भंसाली पर कुछ वर्ग समूहों द्दारा आरोप लगाए गए कि वह राजपूतों के इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं इस वजह से उन्हें पद्मावत की शूटिंग के दौरान तमाम तरह के आरोपों और विरोधों को झेलना पड़ा ।

बाधाएं मुझे और मजबूत बनाती हैं

पद्मावत के दौरान अपने खिलाफ हुए हिंसक विरोध को याद करते हुए भंसाली ने कहा, “वो सब बहुत मुश्किलों भरा था । इस सब के बीच, मैं अपनी माँ के बारे में अधिक चिंतित था और खुश था कि वह मेरे साथ थी । मुझे नहीं पता कि मैं उनके बिना कैसे यह सब सहन कर पाता । वह कहती रही, ‘मेरे बेटे के साथ ऐसा क्यों हो रहा है ? वो इतनी अच्छी फिल्में बनाता है ।’ उस वक्त मेरी मां मेरी ताकत थीं और आज भी हैं ।”

एक फ़िल्ममेकर के रूप में आने वाली बाधाओं को भंसाली अपने लिए सकारात्मक तरीके से लेते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इससे उन्हें एक बेहतर फ़िल्ममेकर बनने में मदद मिलती है । इस बारें में भंसाली ने कहा, “कभी-कभी मुझे लगता है कि एक व्यक्ति और फिल्म निर्माता के रूप में ये बाधाएं मुझे और मजबूत बनाती हैं । हर बार जब मेरी अंडरप्रोडक्शन फिल्म पर हमला हुआ तो मैंने अपने दर्द और पीड़ा को बेहतर काम करने के लिए एक प्रोत्साहन के रूप में इस्तेमाल किया । गंगूबाई काठियावाड़ी के शूटिंग शेड्यूल के साथ कोविड ने जो कहर बरपाया, उस दौरान मैंने अपनी सारी चिंता को एक सही आकार देने में लगाया । मुझे लगता है कि दुख हमेशा मेरी रचनात्मकता के लिए एक प्रोत्साहन रहा है ।”