मिलकन इंस्टीट्यूट के 12वें एशिया समिट में दुनिया भर के बड़े लीडर्स के बीच, भारतीय अभिनेत्री और जलवायु अधिवक्ता भूमि पेडनेकर ने अपनी निजी कहानी, हिम्मत और ज़िम्मेदारी की बात से सबको प्रभावित किया । इसके साथ ही भूमि पेडनेकर ने फ़िल्मों में आने की अपनी प्रेरणा का भी जिक्र किया ।

मिलकन एशिया समिट में भूमि पेडनेकर
भूमि पेडनेकर ने बताया कि जब वह एक्ट्रेस बनने का सपना देखती थीं, तो उन्हें परदे पर अपनी तरह की महिलाएँ नहीं दिखती थीं। उन्होंने दर्शकों को बताया कि, “मुझे हमेशा से पता था कि मैं एक एक्टर बनना चाहती हूँ, लेकिन बड़े होते हुए मुझे परदे पर अपने जैसी लड़कियाँ नहीं दिखीं। मुझे लगा ही नहीं कि मैं रिप्रेजेंट हो रही हूँ, और जब भी मैंने लोगों को अपने सपने के बारे में बताया, तो वे मुझ पर हँसे । उस रिजेक्शन ने मुझे और ज़्यादा फ़्यूल किया । मैंने सोचा, मैं तुम्हें करके दिखाऊँगी।”
भूमि ने कहा कि उनकी पहली फ़िल्म दम लगा के हईशा ने उन्हें सिनेमा की असली ताकत दिखाई। उन्होंने कहा कि भारत में कई सामाजिक टैबू हैं, जिन पर लोग बात नहीं करते, लेकिन सिनेमा लोगों के दिल खोलता है और हमदर्दी पैदा करता है। जब यह हमदर्दी एक्शन में बदल जाती है, तो वह एडवोकेसी बन जाती है।
वह अपनी स्टारडम का इस्तेमाल बॉडी पॉज़िटिविटी से लेकर जलवायु न्याय तक के लिए कर रही हैं। समिट में उनकी बात ने यह दिखाया कि विकासशील देशों की महिलाएँ अपनी कल्चरल इन्फ्लूएंस और पक्के इरादे के दम पर किस तरह बदलाव ला सकती हैं।
















