बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार लीक ही हटकर फ़िल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं । कमर्शियल फ़िल्मों के अलावा अक्षय की सोशल मैसेज वाली फ़िल्मों को भी लोग काफ़ी पसंद करते हैं । हाल ही में अक्षय कुमार की रियल लाइफ़ बेस्ड मिशन रानीगंज: द ग्रेट भारत रेस्क्यू सिनेमाघरों में रिलीज हुई । रानीगंज कोलफील्ड्स में आई आपदा की वास्तविक कहानी पर आधारित इस फिल्म के प्रमोशन के दौरान अक्षय ने मिशन रानीगंज के अलावा अन्य विषयों पर भी खुलकर बात की । मिशन रानीगंज से पहले अक्षय कुमार की कोर्टरूम ड्रामा ओएमजी 2 सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी जिसे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा काफ़ी कट्स और बदलावों को झेलना पड़ा था साथ ही फ़िल्म को '' सर्टिफिकेट दिया गया । मिशन रानीगंज के प्रमोशन के दौरान, जब अक्षय से पूछा गया कि यह उन्हें परेशान करता है कि 18 साल से कम उम्र के युवा इतनी महत्वपूर्ण फिल्म नहीं देख सके ।

बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को लेकर अक्षय कुमार ने कहा, “मुझे ये कहकर हतोत्साहित मत करो कि मेरी फिल्म कितना कमाएगी ; मैंने सैनिटरी पैड पर फिल्म बनाई, किसी के बाप में दम नहीं था कि सैनिटरी पैड पर फिल्म बनाएं”

समाज को बदलने के लिए ऐसी फ़िल्में बनाते हैं अक्षय कुमार

अक्षय कुमार ने इस पर कहा, “ठीक है, नियम तो नियम हैं । उन्हें (केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड) लगा कि यह एक एडल्ट फिल्म है। लेकिन क्या आप लोगों को लगा कि यह एक एडल्ट फिल्म थी ? यह एक ऐसी फिल्म थी जिसे युवाओं को दिखाया जाना चाहिए क्योंकि मैंने इसे उनके लिए बनाया है । शुक्र है, यह कल नेटफ्लिक्स पर आने वाली है। महत्वपूर्ण बात यह है कि लोगों को इसके बारे में पता होना चाहिए ।

अक्षय ने इस विषय पर आगे चर्चा करते हुए यह भी बताया कि क्या उन्हें ऐसी अपरंपरागत फिल्मों का समर्थन करते समय दबाव का सामना करना पड़ता है जो शायद बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाती हैं । अक्षय ने कहा, “जब मैंने टॉयलेट - एक प्रेम कथा (2017) बनाई, तो हर किसी ने मुझसे कहा, ‘ये कोई टाइटल हुआ? क्या तुम पागल हो ? क्या आप मुझसे कह रहे हैं कि आप शौचालय पर फिल्म बना रहे हैं ?’ मैं आगे बढ़ा और इसे बनाया । मुझे यह सोचकर हतोत्साहित न करें कि मेरी फिल्में कितना बिजनेस करेंगी । मुझे साहस दीजिए कि मैं कम से कम यह सोचूं कि इस तरह की फिल्में इसलिए बनाई जाती हैं ताकि हम दर्शकों को बता सकें कि यह समाज को बदलने का समय है ।

उन्होंने आगे कहा, “मैंने सैनिटरी पैड पर एक फिल्म (पैडमैन; 2018) बनाई। किसी के बाप में दम नहीं था कि सेनेटरी पैड पर फिल्म बने । कोई हाथ भी नहीं लगाता था पैड को । मैं उस व्यक्ति का नाम नहीं बताऊंगा लेकिन मैं किसी के साथ खड़ा था । हम सभी पैड लेकर खड़े थे । उन्हें भी एक पैड दिया गया था । उनके पीए ने मेरे कान में कहा, ये इनके हाथ में मत दिलाओ। अच्छा नहीं लगता ।