हिंदी सिनेमा की अब तक की सबसे कल्ट फ़िल्मों में से एक संजय दत्त स्टारर मुन्नाभाई एमबीबीएस (2003) को आज यानि 19 दिसंबर को रिलीज हुए पूरे 19 साल हो गए है । मुन्ना के रूप में संजय दत्त और सर्किट के किरदार में अरशद वरसी ने लोगों के दिलों में ऐसी जगह बनाई की लोगों के जहन में ये आज भी यादगार है । जहां एक तरफ़ फ़िल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस ने संजय दत्त के किरदार को एक नया मोड़ दिया था वहीं बहुत कम लोगों को पता होगा की इस फ़िल्म के लिए फ़र्स्ट च्वाइस संजय दत्त नहीं बल्कि अनिल कपूर थे । मुन्नाभाई एमबीबीएस की 19वीं वर्षगांठ पर हम आपके लिए राजकुमार हिरानी का एक पुराना इंटरव्यू लेकर आए हैं जिसमें उन्होंने खुद कहा की उनकी फ़िल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस में मुरली प्रसाद शर्मा उर्फ मुन्ना की भूमिका के लिए उनकी पहली पसंद कोई और नहीं बल्कि अनिल कपूर थे ।

मुन्नाभाई एमबीबीएस के लिए अनिल कपूर और शाहरुख़ खान थे फ़र्स्ट और सेकेंड च्वाइस
अपने इंटरव्यू में राजकुमार हिरानी ने कहा, “मेरी पहली पसंद अनिल कपूर थे, क्योंकि तेजाब (1988) जैसी फिल्मों में उन्होंने 'भाई' के कई रोल निभाए थे । उस समय, मैंने सोचा था कि वह इस भूमिका को करने के लिए सही व्यक्ति हो सकते हैं । लेकिन फिर, विनोद (विधु विनोद चोपड़ा) के निर्माता के रूप में कदम रखने के बाद भी फिल्म एक बड़ी जर्नी से गुजरी। (हमने शाहरुख खान से भी संपर्क किया) और आखिरकार, एक स्तर पर, संजू (संजय दत्त) इस भूमिका के लिए बिल्कुल परफ़ेक्ट लगे । ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके पास वह फ़िज़िक है जहां वह 'भाई' की तरह दिख सकते है । साथ ही, उनकी झुकी आँखें और आकर्षक मुस्कान के साथ, वह इस रोल के लिए परफ़ेक्ट लगे । अब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं और कह सकता हूं कि संजय ही इस फ़िल्म के लिए सही च्वाइस थे ।”
एक अन्य वीडियो में, उन्होंने बताया कि शाहरुख खान को मुन्नाभाई एमबीबीएस में मुख्य भूमिका निभाने का अवसर क्यों नहीं मिला । ब्लॉकबस्टर निर्देशक ने खुलासा किया, “जब मैंने विनोद को कहानी सुनाई, तो उन्होंने मुझसे कहा, 'शाहरुख को कहानी सुनाओ । वो ये रोल अच्छा करेगा'। तो मैंने उनसे कहा, 'शाहरुख मेरी फिल्म क्यों करेगा? मैं न्यूकमर हूं और उन्होंने मेरा काम नहीं देखा है।' उन्होंने जोर देकर कहा, 'सुना तो दो कहानी'। मुझे याद है कि जब मैं उनसे मिला तो वह देवदास (2002) की शूटिंग कर रहे थे। मैं उसे सुनाना चाहता था। लेकिन उन्होंने कहा कि चूंकि वह व्यस्त हैं, इसलिए मुझे स्क्रिप्ट को उनके लिए छोड़ देना चाहिए। मैं निराश था क्योंकि मैं वास्तव में उन्हें खुद नेरेशन देना चाहता था। फिर भी, मैंने उनके लिए स्क्रिप्ट छोड़ दी और चला गया ।”
राजकुमार ने आगे कहा, “शुक्र है कि शाहरुख ने स्क्रिप्ट पढ़ी और अगले दिन मुझे कॉल किया । उन्होंने मुझसे मिलने के लिए कहा । मैंने कॉल किया और उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें स्क्रिप्ट पसंद है। लेकिन वह सोचते रहे कि क्या मैं यह फिल्म बना पाऊंगा । फ़ाइनली, वह मान गए ।”
लेकिन एक समस्या और खड़ी हो गई। राजकुमार हिरानी ने कहा, “यह एक ऐसा समय था जब उन्हें अपनी गर्दन की सर्जरी के लिए लंदन जाना था । उन्होंने 6 महीने तक कोई काम नहीं लिया। इस बीच, उनके पास पहले से ही कई फिल्में चल रही थीं जैसे चलते चलते (2003), मैं हूं ना (2004), वीर-जारा (2004) आदि। उन्होंने मुझे सूचित किया कि वह इन लंबित फिल्मों को पूरा करेंगे और उसके बाद ही वह मेरी फिल्म के लिए काम शुरू कर सकते हैं । इसका मतलब था कि मुझे 2-2 ½ साल इंतजार करना पड़ता । विनोद ने इतने लंबे समय तक इंतजार करना अनुचित नहीं समझा क्योंकि गाने तैयार थे और अन्य तैयारी का काम भी पूरा हो चुका था ।”
इस तरह संजय दत्त फ़िल्म के लिए फ़ाइनल च्वाइस बने । मुन्नाभाई एमबीबीएस को इतना ज़्यादा पसंद किया गया कि 3 साल बाद, इसका दूसरा पार्ट आया, लगे रहो मुन्ना भाई (2006) और उम्मीद के मुताबिक़ भी इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफ़िस पर अपनी सफलता से इतिहास रच दिया । और अब सभी को इसके तीसरे पार्ट यानि मुन्नाभाई 3 का बेसब्री से इंताज़ार है लेकिन अभी तक इसे लेकर कोई कंफ़रमेशन नहीं हुआ है ।
• Anil Kapoor was Raju Hirani's first choice for Munnabhai MBBS.
• VVC suggested Srk's name to Hirani.
• Srk liked the story, but initially he was not confident of Hirani.
• After 6 months (surgery) Srk asked Hirani to wait for 2 more years.
• They went with Sanjay Dutt. pic.twitter.com/pY231gpulr
— ? (@spot_boyy) July 28, 2021
















