एक्ट्रेस सई मांजरेकर ने हाल ही में उन ज़रूरी जीवन की सीखों के बारे में बात की जो उन्होंने अपने पिता, दिग्गज अभिनेता, निर्देशक और लेखक महेश मांजरेकर से सीखी हैं। सई मांजरेकर कहती हैं कि जिस घर में सिनेमा रोज़ की बातचीत का हिस्सा था, वहां उन्हें शोहरत या संपर्क नहीं, बल्कि मज़बूती, आत्मविश्वास और अपने पैरों पर खड़े होने की ताक़त मिली।

सई मांजरेकर के फ़िल्मों में आने के लिए पापा महेश मांजरेकर ने कभी नहीं बनाए शॉर्टकट्स ; “पापा ने कहा था, मैं तुम्हारे लिए किसी को फोन नहीं करूंगा और न ही मिलवाऊंगा”

सई मांजरेकर की प्रेरणा हैं पापा महेश मांजरेकर

सई ने बताया, “मेरे पिता हमेशा मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं, लेकिन कभी भी शॉर्टकट नहीं बने। मुझे याद है, जब मैंने पहली बार उनसे एक्टिंग करने की बात की थी, उन्होंने साफ कहा – ‘अगर तुम्हें एक्टर बनना है तो यह तुम्हारा फ़ैसला होगा। मैं तुम्हें अपने किसी दोस्त से नहीं मिलवाऊंगा और न ही तुम्हारे लिए किसी को फोन करूंगा।’ उस समय यह सुनना थोड़ा मुश्किल था, लेकिन आज मैं समझती हूं कि यह सीख कितनी अहम थी। मैंने रिजेक्शन झेलना सीखा, अजनबियों के बीच ऑडिशन देना सीखा, बाकी सबकी तरह लाइनों में खड़ा होना सीखा और अपने दम पर हर मौका कमाना सीखा। इसने मुझे हर रोल की अहमियत और भी गहराई से समझाई।”

सई के लिए, महेश मांजरेकर जैसे कलाकार के बीच बड़ा होने का असली तोहफ़ा सिर्फ़ सेट पर उन्हें काम करते देखना नहीं था, बल्कि उनका अनुशासन, विनम्रता और हर प्रोजेक्ट के प्रति जुनून देखना था।

सई कहती हैं, “ऑन-स्क्रीन पापा ने मुझे क्राफ्ट का सम्मान करना सिखाया। ऑफ-स्क्रीन उन्होंने मुझे खुद का, अपने साथ काम करने वालों का और सफ़र का सम्मान करना सिखाया, चाहे वो कितना भी कठिन क्यों न हो। उन्होंने दिखाया कि एक आर्टिस्ट होना किसी मंज़िल तक पहुंचना नहीं है, बल्कि लगातार सीखते रहना, बदलते रहना और अपनी सच्ची आवाज़ के साथ ईमानदार बने रहना है।”

अपने पिता की इन सख़्त लेकिन अमूल्य सीखों के साथ सई मांजरेकर आज भी अपने करियर को उसी दृढ़ता और सादगी से आगे बढ़ा रही हैं, और यह साबित कर रही हैं कि कभी-कभी सख़्त मोहब्बत ही सबसे गहरी छाप छोड़ती है।