सैफ अली खान के बेटे इब्राहिम अली खान ने हाल ही में बोनी कपूर और श्रीदेवी की बेटी खुशी कपूर संग धर्मा प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित फिल्म नादानियां फ़िल्म के साथ अपना बॉलीवुड डेब्यू किया था । इब्राहिम अली खान और खुशी कपूर की फ़िल्म नादानियां डायरेक्ट OTT पर रिलीज हुई थी । लेकिन फ़िल्म क्रिटिक्स समेत दर्शकों को भी ये फ़िल्म पसंद नहीं आई । इसके बाद से ही इब्राहिम अली खान और खुशी कपूर को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया जा रहा है । लेकिन अब स्टार किड को बॉलीवुड में लॉन्च करने वाले फ़िल्ममेकर करण जौहर इब्राहिम और खुशी के सपोर्ट में आ गए हैं ।

करण जौहर ने किया इब्राहिम अली खान और खुशी कपूर को सपोर्ट
कारण जौहर ने आज अपनी पंजाबी और हिंदी फ़िल्म, अकाल का ट्रेलर लॉन्च किया इस मौके पर उन्होंने अपनी फ़िल्म नादानियां को मिले ख़राब रिव्यूज और स्टार किड्स को मिली आलोचना पर अपनी चुप्पी तोड़ी । करण जौहर ने नादानियां की ट्रोलिंग पर सबसे पहले रिएक्ट करते हुए कहा, “मैं सिर्फ ये कहूंगा कि कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना छोड़ो बेकार की बातें, बीत न जाए रैना ।”
इसके अलावा करण ने नादानियां को मिले ख़राब रिव्यूज पर फ़िल्म क्रिटिक्स पर निशाना साधते हुए कहा, “यहां बहुत सारे फ़िल्म क्रिटिक्स मौजूद हैं । वे जो भी लिखें, मेरा रिश्ता उनके साथ बदलता नहीं है । मेरा रिश्ता हमेशा एक जैसा रहा है । आपको फिल्म पसंद नहीं आई; यह आपका नजरिया है और इसके बारे में लिखना आपके काम का हिस्सा है । मैं इस साजिश के सिद्धांत पर विश्वास नहीं करता कि फिल्म को नीचे लाने के लिए आपा कोई मिशन था या नहीं । ट्रोल कभी-कभी ऐसा करते हैं । वो बेनाम लोग हैं । उनकी अपनी प्रॉब्लम्स होंगी । मुझे बस उन पर तरस आता है ।”
करण ने आगे कहा, “मैं फ़िल्म क्रिटिक्स को सलाम करता हूं। मैं उनका सम्मान करता हूं और यह बात हर कोई जानता है। मैं उन दुर्लभ फिल्म निर्माताओं में से हूं जो आलोचकों के पुरस्कारों में शामिल हुआ हूं। लेकिन कई बार ऐसा होता है जब मैं कुछ चीजें पढ़ता हूं और सोचता हूं, ‘वो किसी का बेटा है, वो किसी की बेटी है’। एक आलोचक ने लिखा, ‘मैं इस फिल्म को लात मारना चाहता हूं’! मुझे उन लोगों से दिक्कत है जो ऐसी चीजें लिखते हैं। मुझे ट्रोल्स, राय बनाने वालों और सामाजिक टिप्पणियों से कोई दिक्कत नहीं है। यह आपका अधिकार है और मैं इसे स्वीकार करता हूं। हमारी भी नादानियां हैं और गुस्ताखियां हैं। तो कभी गहराईयां हैं! लेकिन जब आप (बुरी) चीजें लिखते हैं, तो यह आप पर एक प्रतिबिंब है। यह फिल्म का प्रतिबिंब नहीं है। यह परेशान करने वाला है। कोई भी लात खाना नहीं चाहता क्योंकि लात मारना हिंसा है। जब आपको वास्तविक दुनिया में हिंसा की अनुमति नहीं है, तो आपको अपने शब्दों के माध्यम से हिंसक होने के लिए भी निंदा की जानी चाहिए।”
















