4.5 Excellent

Raajneeti

“राजनीति” न सिर्फ “महाभारत” है, बल्कि “ गॉडफादर” भी है... लेकिन महाभारत और गॉडफादर, दोनों से परिचित होने के बावजूद “राजनीति” में यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि आधुनिक कौरव और पाण्डव इसमें किस तरह के खेल खेलेंगे।
फिल्म की कहानी लगातार पलटती रहती है, मोड़ लेती रहती है। इतना, कि आप अंदाज नहीं लगा सकते कि आगे क्या होने वाला है। यह फिल्म न सिर्फ मनोरंजन करती है, बल्कि समझ भी बढ़ाती है।

“राजनीति” एक अच्छा निर्माण है। वह निश्चित ही उन लोगों के लिए नहीं है जो फिल्म देखने जाते समय दिमाग घर पर छोड़ कर जाते हैं।

प्रकाश झा, उच्चस्तरीय सिनेमा के लिए जाने जाते हैं और यह फिल्म उस पैमाने पर खरी उतरती है। सिनेमा का मतलब ही होता है पर्दे पर दिलचस्प कहानियां उतारना, और सिर्फ इसी वजह से राजनीति, ऊंचे अंक पाने की हकदार है। साथ में बड़े सितारे और उनका खरा अभिनय सोने पर सुहागे जैसा है।

मैं इस फिल्म की तगड़ी सिफारिश करूंगा; जाइए, “राजनीति” देखने, आप निराश नहीं होंगे।

फिल्म में भास्कर सान्याल (नसीरुद्दीन शाह) एक तेजतर्रार वामपंथी नेता है। वह अपने दम पर बड़े से बड़े नेता को चुनौती देने का दमखम रखता है इसलिए उससे लोग डरते हैं। लेकिन एक निजी गलती के कारण वह स्वनिर्वासित जीवन जीने पर मजबूर हो जाता है।

फिल्म लौटती है वर्तमान में- पृथ्वी (अर्जुन रामपाल) एक ताकतवर राजनीतिक परिवार का उत्तराधिकारी है और सर्वोच्च पद पाने के लिए बेकरार है। लेकिन उसका चचेरा भाई वीरेन्द्र ( मनोज वाजपेई) उसका सबसे बड़ा राजनीतिक प्रतिद्वंदी साबित होता है। वह एक ऎसा शख्स है जो मानता है कि उसका जन्म ही शासन करने के लिए हुआ है और वह शिखर तक पहुंचने के लिए कुछ भी करने से नहीं हिचकेगा।

परिवार और राजनीतिक प्रतिद्वंदी का सामना करता हुआ वीरेन्द्र एक नया खेल खेलता है। वह सूरज (अजय देवगन) को चुनता है जो दिल में गुस्सा और दिमाग में नेतृत्व लिए हुए एक युवक है। सूरज को वीरेनद्र की असली पहचान का पता नहीं है और यह राज उसे बहुत, बहुत देर बाद पता चलता है।

पृथ्वी का भाई समर ( रणबीर कपूर) इन सबसे अलग-थलग है। उसकी कोई राजनीतिक मह्त्वाकांक्षा नहीं है लेकिन वह पारिवारिक प्रतिद्वंद्विता के भंवर में फंस जाता है। लेकिन, यही समर फिर उभरता है राजनीतिक युद्ध का मंजा हुआ खिलाड़ी बन कर। इंदु (कैटरीन कैफ) एक धनी उद्योगपति की बेटी है। वह भी इसी भंवर में फंस जाती है। और इन सबके बीच है बृज गोपाल (नाना पाटेकर), जो दिन पर दिन खूनी होते जाते राजनीतिक्र युद्ध में समर और पृथ्वी का गुरु बनता है।

इतने दिग्गज सितारों को इकट्ठा करना और ऎसी कहानी चुनना जो इनकी अभिनय प्रतिभा के साथ न्याय कर सके, आसान नहीं। लेकिन प्रकाश झा इस चुनौती पर खरे उतरते हैं। जैसा कि मैंने पहले कहा, “राजनीति” में कोई भी पात्र बेदाग नहीं है, वे या तो धुंधले हैं या घोर काले। सफेद कपड़े लेकिन कारनामे सफेद नहीं।

लभभग तीन घंटों की यह फिल्म दर्श्क को शुरू से अंत तक बांधे रखती है। अंजुम राजाबली और प्रकाश झा की पटकथा लोकतंत्र का कुरूप चेहरा बेहद वास्तविक ढंग से सामने लाने में सफल हुई है। लगातार घुमाव लेती कहानी, गिरगिट से भी ज्यादा तेजी से रंग बदलते पात्र और उनके द्वारा खेली जाने वाली खून की होली इस फिल्म के मुख्य पहलू हैं। वास्तव में , फिल्म में कुछ दृश्य बेजोड़ हैं लेकिन उनके बारे में लिखना फिल्म देखने का मजा कम कर देगा।

अगर पटकथा बढ़िया है तो संवाद बेजोड़ हैं। हर पंक्ति जहरबुझी और दृश्यों में नई जान डालने वाली है। फिल्म में गीत- संगीत की जगह नहीं है और “मोरा पिया” जैसा लोकप्रिय गीत भी टुकड़ों में इस्तेमाल किया गया है।

छायांकन उत्कृष्ट श्रेणी का है। यह देखते हुए कि फिल्म के हर दृश्य में 3-4 अभिनेता फ्रेम में रहते हैं, “राजनीति” जैसी फिल्म का छायांकन आसान नहीं था।

राजनीति को मल्टी-स्टार फिल्म कहना गलत होगा। यह मल्टी- एक्टर फिल्म है और हर अभिनेता ने बेहतरीन अभिनय किया है। फिल्म में इंडस्ट्री के दिग्गज नाम शामिल हैं लेकिन उनमें भी छाप छोड़ने में सफल रहे हैं रणबीर कपूर, अर्जुन रामपाल और मनोज बाजपेयी।

अजय देवगन फिल्म के दूसरे हिस्से में थोड़ा पीछे चले गए लेकिन दाद देनी होगी कि उन्होंने ऎसा होने को स्वीकार किया और अपना किरदार पूरी लगन से निभाया। नाना पाटेकर बेहतरीन हैं। वे सबसे ज्यादा जहरबुझे संवाद बोलते हैं, मुस्कान के साथ जो सिर्फ उनकी काबिलियत का अभिनेता ही कर सकता था। इस रोल में आप किसी और की कल्पना ही नहीं कर सकते।
कैटरीन कैफ अव्वल नंबर की हैं। हर दृश्य में उनकी लगन और ईमानदारी झलकती है। इस फिल्म में वे ग्लैमर का चोला उतार कर अभिनेत्री के रूप में परिवर्तित हो गई हैं।
नसीरुद्दीन शाह एक छोटे से रोल में भी अच्छे हैं।

सहायक कलाकारों में भी एक से बढ़ कर एक नाम हैं और हर किरदार आपकी स्मृति में जम जाता है। खास कर दयाशंकर पांडे, चेतन पंडित, दर्शन जरीवाला, श्रुति शेठ, किरण करमरकर और विनय आप्टे।

कुल मिला कर “राजनीति” गहरा असर छोड़ती. वास्तव में सराहनीय प्रयास, यह बेहतरीन फिल्म छोड़ने लायक नहीं।