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बॉलीवुड में अपने 13 साल के करियर में नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी ने अनेक फ़िल्मों में बेहद जटिल भूमिकाएं निभाई हैं लेकिन कोई भी भावनात्मक और शारीरिक रूप से थकाऊ नहीं थी जितनी रमन राघव थी ,  1960 के दशक का वास्तविक किलर , जिसने 1960 के दशक में गिरफ़्तार होने से पहले एक-एक करके 40 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था ।

दहशत का दूसरा नाम रह चुका साइको सीरियल किलर रमन राघव का किरदार फ़िल्म रमन राघव में नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी निभा रहे हैं  और इस किरदार को निभाना नवाज़ुद्दीन के लिए कफ़ी मुश्किल रहा ।

अभिनय के बोझ के खिलाफ़ भावनात्मक रूप से बोलते हुए नवाज ने कहा कि , हर बार जब मैं रमन के उन नीच लाइने बोलता और उसके द्दारा किए गए हिंसात्मक भयानक कृत्यों को करता तब मैं अपने आपको मैं अशुद्ध महसूस करता था  और ऐसा लगता था कि मेरे अंदर कुछ मर गया । ऐसे निर्दयी इंसान होने की मैं एक्टिंग कैसे कर सकता है और कैसे बोल सकता हूं ।

इस किरदार ने नवाज को  शारीरिक रूप से बीमार बना दिया । मैं अस्पताल भी जा पहुंचा । मुझे लगा कि मेरा अंदर से दम घुट रहा था । एक दिन एक सीन करने के दौरान मैं  बेहोश हो गया था । और जब मुझे अस्पताल ले जाया गया और मुझे बताया गया कि मैं अर्द्दचेतन अवस्था में रमन राघव की लाइनों को बुदबुदा रहा था ।

नवाज ने फ़ैसला किया कि वे फ़िर कभी इतना भ्रष्ट और हिंसक किरदार अदा नहीं करेंगे ।

रमन राघव का किरदार अदा करने के बाद नवाजुद्दीन की भावनात्मक और शारीरिक हालत बिल्कुल वैसी ही हो गई थी जैसी देवदास में पागल अवसादग्रस्त किरदार निभाने के बाद  दिलीप कुमार की हो गई थी । आत्महत्या की उदासी से बाहर आने के लिए मनोचिकित्सक की मदद लेनी पड़ी ।

नवाज का कहना है कि , दिलीप साहब को किन हालातों से गुजरना पड़ा मैं इस बात से वाकिफ़ हूं । देवदास के बाद दिलीप साहब ने  प्रसन्नचित भूमिकाएं निभाई  आज़ाद और कोहिनूर में  । रमन राघव के बाद मैं सोहेल खान की अली फ़िल्म में काम कर रहा हूं जो पूरी तरह से मेरे लिए तनाव दूर करने वाली होगी ।