*मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल :-*

*• वंदे मातरम गीत कभी अप्रासंगिक नहीं होगा*
*• आजादी के आंदोलन को गति देने का कारण बना वंदे मातरम अब अमृत काल में उसी जोश और जज्बे से विकसित भारत-आत्मनिर्भर भारत के लिए नया प्रेरक बल बनेगा*
*• गुलामी के कालखंड में रचित वंदे मातरम के शब्द और अर्थ गुलामी की छाया तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि आज भी सुसंगत और प्रासंगिक हैं, वंदे मातरम गीत की हर पंक्ति में भारत माता का अर्थपूर्ण भक्ति गान है*
*• प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वंदे मातरम गीत की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशव्यापी समारोह के माध्यम से हमें देश के महान नायकों का पुण्य स्मरण और भारत माता की भाव वंदना करने का पुनः अवसर दिया है*
*• राष्ट्र विरोधी शक्तियों और दुश्मनों का नाश करने वाली भारत माता ‘बहुबलधारिणीं’ और ‘रिपुदलवारिणीं’ है*
*गांधीनगर, 23 फरवरी :* मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने वंदे मातरम गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के गौरवशाली अवसर के जश्न का संकल्प सोमवार को गुजरात विधानसभा में पेश करते हुए साफ कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से देश भर में जिस गीत की रचना के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है, उस वंदे मातरम की प्रत्येक पंक्ति में भारत माता का अर्थपूर्ण भक्ति गान है।
इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि वंदे मातरम गीत की ताकत ही इतनी है कि भले ही यह गुलामी के कालखंड में रचा गया हो, लेकिन इसके अर्थ और शब्द गुलामी की छाया तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि आज भी उतने ही सुसंगत और प्रासंगिक हैं कि यह वंदे मातरम गीत कभी अप्रासंगिक नहीं होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आजादी के आंदोलन को गति देने का कारण बना वंदे मातरम अब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस अमृत काल में उसी जोश और जज्बे से विकसित भारत-आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए नया प्रेरक बल बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी ने वंदे मातरम की रचना कर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र चेतना के साथ स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया था और जन-जन में ऐसा विश्वास जगाया था कि ऐसा कोई संकल्प नहीं है, जो पूरा न हो सके और ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है, जिसे हम हासिल न कर सकें।
उन्होंने कहा कि हर गीत का अपना एक मूल भाव और मुख्य संदेश होता है। इस वंदे मातरम का विषय भारत माता है। इस गीत में मां भारती की वंदना इस कल्पना के साथ हुई है कि मां भारती की गुलामी के बंधन टूटेंगे और उसके बच्चे ही उसके भाग्य विधाता बनेंगे।
इतना ही नहीं, मूल सभ्यता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता की रक्षा की प्रेरणा के लिए रचित इस गीत से तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की चूलें हिल गई थी और उसने वंदे मातरम गीत पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस दौर में वंदे मातरम गाने वालों को जेल में डाल दिया जाता था और उन पर कोड़े बरसाए जाते थे। श्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि ऐसे जुल्म के बावजूद वंदे मातरम स्वतंत्रता का जयघोष और लाखों देशवासियों के सपनों के समृद्ध भारत का मंत्र बन गया था।
मुख्यमंत्री ने वंदे मातरम गीत में भारत माता की जल, फल और धन-धान्य से भरपूर, विद्यादायिनी सरस्वती, समृद्धि दायिनी मां लक्ष्मी और अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाली मां दुर्गा के रूप में की गई भक्ति-वंदना का उल्लेख करते हुए वंदे मातरम गीत की रचना से लेकर 1950 में संविधान सभा द्वारा इस गीत को राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा देने तक के रोमांचक इतिहास का विस्तार से जिक्र किया।
श्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि देश की आजादी के लिए अनेक प्रसिद्ध और गुमनाम सपूत वंदे मातरम का नारा लगाते हुए फांसी के फंदे पर झूल गए थे और सर्वोच्च बलिदान दिया था। इस गीत की प्रेरणा से देशवासियों में भारत माता के लिए कुर्बान होने की भावना और भारत भक्ति उजागर हुई थी। ऐसे त्याग, तपस्या और बलिदान से भारत को गुलामी से स्वतंत्रता तो मिली, लेकिन दशकों तक मां भारती का उचित सम्मान और गौरव उपेक्षित ही रहा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश का सेवा दायित्व संभालते ही देशवासियों में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्र प्रथम के भाव की चेतना जगी है। उन्होंने विरासत का विशिष्ट सम्मान किया है और ‘मेरी मिट्टी-मेरा देश’, ‘हर घर स्वदेशी-घर घर स्वदेशी’, ‘हर घर तिरंगा-घर घर तिरंगा’ जैसे अभियानों के साथ ही हजारों वर्षों की अटल आस्था और श्रद्धा के पुनर्जागरण के प्रतीक ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के माध्मय से जन-जन में सांस्कृतिक चेतना भी सुदृढ़ की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दुश्मनों ने उकसाया, तब ‘बहुबलधारिणीं’ यानी अनेक भुजाओं को धारण करने वाली ‘रिपुदलवारिणीं’ यानी शत्रु समूह का नाश करने वाली भारत माता ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए उन्हें मुंहतोड़ जवाब देकर समूची दुनिया को हमारे पराक्रम की पराकाष्ठा दिखाई। उन्होंने आगे यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वंदे मातरम गीत की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशव्यापी समारोह के माध्यम से हमें देश के महान नायकों का पुण्य स्मरण और भारत माता की वंदना करने का पुनः अवसर दिया है।
मुख्यमंत्री ने सदन में सदस्यों के वंदे मातरम के नारों की गूंज के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की एक काव्य रचना का भी गर्व से स्मरण किया, जिसमें श्री मोदी ने वंदे मातरम के प्रति अटल श्रद्धा और राष्ट्र भावना को कुछ इस तरह अभिव्यक्त किया था- “वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, यह हमारी आन, बान और शान है। आजादी के महायज्ञ की आहुति है। राष्ट्रभक्ति की मशाल है। विकास की निरंतर धड़कती अडिग पहचान है। प्रजा जीवन की हर प्रभात की प्रबुद्ध चेतना का स्वर है।”
















