*गुजरात पुलिस ने ड्रग्स से जुड़े मामलों की जांच प्रक्रिया को मजबूत करने और कन्विक्शन रेट को बढ़ाने के लिए एआई-आधारित टूल लॉन्च किया*

Gujarat Police tightens

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*भारत में किसी भी राज्य पुलिस या जांच एजेंसी द्वारा उपयोग किया जाने वाला यह अपनी तरह का पहला एआई-आधारित टूल है*

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*गुजरात पुलिस ड्रग्स संबंधित अपराधों को नेस्तनाबूद करने के लिए प्रतिबद्ध है, हम ड्रग्स नेटवर्क की कमर तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे : उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी*

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*गांधीनगर, 10 अप्रैल :* गुजरात पुलिस ने राज्य में नारकोटिक्स से जुड़े अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए नारकोटिक्स एनालिसिस एंड आएजी-बेस्ड इंवेस्टिगेशन टूल (एनएआरआईटी एआई) नामक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य नारकोटिक्स से जुड़ी जांच को प्रभावी बनाना और अदालत में ट्रायल के दौरान मामले को अधिक मजबूत बनाकर आरोपियों को सजा दिलाना है।

‘एनएआरआईटी एआई’ एक रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन (आरएजी) आधारित सिस्टम है, जो नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) कानूनी ढांचे के तहत जटिल नारकोटिक्स मामलों को संभालने में जांच अधिकारी और एजेंसी की सहायता करता है।

खास बात यह है कि यह टूल हर मामले के संदर्भ में कानूनी प्रावधानों, केस लॉ और जांच प्रक्रियाओं को एकीकृत करके जांच अधिकारियों को रियल-टाइम विश्लेषण कर कानूनी सलाह भी देता है।

यह भारत में किसी भी राज्य पुलिस या कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला अपनी तरह का पहला एआई-आधारित टूल है।

इस एप्लीकेशन को पश्चिम रेलवे पुलिस, वडोदरा मंडल ने मुंबई स्थित एआई स्टार्टअप के सहयोग से विकसित किया है।

*उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी ने कहा, “गुजरात राज्य ड्रग्स से जुड़े अपराधों को नेस्तनाबूद करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पूरे नेटवर्क की कमर तोड़ने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों की प्रभावी जांच सुनिश्चित करने और आरोपियों के खिलाफ मजबूत कानूनी शिकंजा कसने के लिए हमने आवश्यक सभी व्यवस्थाएं की हैं और टेक्नोलॉजी की मदद से यह कार्य और मजबूत होगा।”*

गुजरात के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री के.एल.एन. राव और सूरत शहर पुलिस आयुक्त श्री अनुपम सिंह गहलोत के मार्गदर्शन में तैयार इस एप्लीकेशन की पहल पश्चिम रेलवे, वडोदरा के पुलिस अधीक्षक श्री अभय सोनी ने की है।

मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल और उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने नारकोटिक्स संबंधित अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है और ऐसे गंभीर अपराधों को रोकने और इसकी कड़ी जांच सुनिश्चित करने के लिए सभी व्यवस्थाएं की गई हैं।

इस एप्लीकेशन को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पश्चिम रेलवे, वडोदरा के पुलिस अधीक्षक श्री अभय सोनी ने कहा, “पहले, जांच केवल विशेष प्रशिक्षण प्राप्त पुलिस स्टाफ के द्वारा की जाती थी, जिसके चलते काम का बोझ बढ़ जाता था और प्रशासनिक विलंब भी होता था। यह टूल नई रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन (आरएजी) आधारित टेक्नोलॉजी का उपयोग करके ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ के रूप में काम करेगा। इससे हर जांच अधिकारी सही और तय प्रक्रिया के मुताबिक जांच कर पाएगा। नतीजतन, एनडीपीएस मामलों में कन्विक्शन रेट यानी दोषसिद्धि दर में सुधार होगा। यह एप्लीकेशन सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के ऐतिहासिक मामलों, बेयर एक्ट्स (विधायिका द्वारा पारित कानूनों के आधिकारिक मूल पाठ) और सरकारी गाइडलाइंस का उपयोग करके बनाया और ट्रेन (प्रशिक्षित) किया गया है, इसलिए ‘हेलुसिनेशन’ यानी भ्रम या गलती होने की संभावना बहुत ही कम है। इससे जांच अधिकारी को वैज्ञानिक तरीके से जांच करने में सहायता मिलती है।”

पुलिस अधिकारियों ने आगे कहा, “ड्रग संबंधित मामलों की जांच में सबसे बड़ी चुनौती प्रक्रियात्मक नियमों का पालन करना है। अतीत में ऐसा देखा गया है कि ठोस सबूत होने के बावजूद जांच प्रक्रिया में रह गई कमियों के कारण आरोपी बरी हो जाते हैं। यह एप्लीकेशन हर जांच अधिकारी को एक विस्तृत रिपोर्ट देगा, जिसका उपयोग अंतिम निर्णय लेते समय किया जा सकेगा। इससे प्रक्रियात्मक कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी, जांच की गुणवत्ता बेहतर होगी और अंततः एनडीपीएस मामलों में दोषसिद्धि दर बढ़ेगी।”

*ऐसे मिलेगी जांच अधिकारियों को मदद*

सबसे पहले, पुलिस अधिकारी को एफआईआर को इस एप्लीकेशन में अपलोड करना होगा। अपलोड होने के बाद सिस्टम एक विश्लेषण रिपोर्ट तैयार करेगा। यह रिपोर्ट मामले के मजबूत पक्षों और कमियों का मूल्यांकन करेगी और कानूनी उपाय सुझाएगी।

यह टेक्नोलॉजी एनडीपीएस से संबंधित मामलों में पुलिस कर्मियों को जांच के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगी। यह हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के आधार पर सुझाव देगी, कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करेगी और कानूनी दृष्टि से एफआईआर में निहित कमजोरियों की पहचान करेगी। इसके अलावा, यह टेक्नोलॉजी सबूतों की एक चेकलिस्ट के साथ ही यह सलाह भी देगी कि क्या करें और क्या न करें।। यह एप्लीकेशन जांच अधिकारियों को प्रक्रियात्मक भूलों को टालने में मददगार सिद्ध होगी।

*क्या करता है यह नया एआई-आधारित सिस्टम*

यह एप्लीकेशन एफआईआर की जानकारी को इनपुट के तौर पर लेकर मामले का विस्तार से विश्लेषण करने के साथ-साथ रिपोर्ट भी बनाता है। यह मॉडल नई रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन (आरएजी) आधारित एआई टेक्नोलॉजी का उपयोग करके विकसित किया गया है। यह एनडीपीएस मामलों में जमानत और ट्रायल संबंधित हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के बेयर एक्ट्स, एनडीपीएस एक्ट, 1985 तथा सरकारी गाइडलाइंस और सर्कुलर्स पर आधारित है।

आरएजी टेक्नोलॉजी आधारित यह एआई सिस्टम केवल उसे दिए गए डेटाबेस का उपयोग करके एफआईआर का विश्लेषण तैयार करता है। यह ओपन-सोर्स इंटरनेट सर्च पर निर्भर नहीं रहता, इसके कारण ‘हेलुसिनेशन’ यानी भ्रम या गलती की संभावना खत्म हो जाती है। यह एप्लीकेशन गुजरात हाईकोर्ट के एआई के उपयोग से जुड़े हालिया दिशा-निर्देशों का पालन करता है और इन दिशा-निर्देशों के अनुसार इसे एक निजी एआई सिस्टम के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो खास तौर पर गुजरात पुलिस के लिए विकसित किया गया है और आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं है।

*कोर्ट ट्रायल में भी देगा मार्गदर्शन*

यह एप्लीकेशन जांच के लिए दिशा-निर्देश देने के अलावा अदालत में बचाव पक्ष की संभावित दलीलों का पूर्वानुमान लगा सकता है। यही नहीं, यह हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक केस लॉ के आधार पर उनका जवाब भी सुझाता है। आरएजी-आधारित एआई टेक्नोलॉजी ‘हेलुसिनेशन’ यानी भ्रम को कम करती है और कानूनी प्रावधानों एवं केस लॉ पर आधारित सटीक परिणाम देती है।