ओम राउत के लिए नेटफ्लिक्स फ़िल्म इंस्पेक्टर झेंडे सिर्फ़ एक क्राइम ड्रामा नहीं, बल्कि एक भावनात्मक सफर है। बचपन में वे अपने पिता डॉ. भरत कुमार राउत से इंस्पेक्टर मधुकर जेंडे की बहादुरी की कहानियाँ सुनते आए हैं। वही किस्से आज उनकी फ़िल्म का आधार बने।

प्रोड्यूसर ओम राउत का इंस्पेक्टर झेंडे को स्पेशल ट्रिब्यूट ; पिता से बचपन में सुने असली इंस्पेक्टर झेंडे के बहादुरी के किस्से पर बनाई फ़िल्म

ओम राउत का इंस्पेक्टर झेंडे से खास जुड़ाव

सेट पर एक यादगार पल तब बना, जब असली इंस्पेक्टर झेंडे, रील इंस्पेक्टर झेंडे (मनोज बाजपेयी) से मिले और ओम के पिता भी उस मुलाक़ात का हिस्सा बने।

ओम कहते हैं, “पिता जी की कहानियाँ बचपन से हमारे घर का हिस्सा रही हैं। आज उन्हें यह सम्मान मिलता देखना और इंस्पेक्टर झेंडे को सेट पर पाना, मेरे लिए ज़िंदगी का पूरा चक्र पूरा होने जैसा है।”

मनोज बाजपेयी, जिम सर्भ और दमदार कलाकारों की टोली के साथ, चिन्मय मांडलेकर द्वारा निर्देशित यह फ़िल्म ओम राउत के लिए अपने पिता के नायक को सलाम करने और उस विरासत को दुनिया तक पहुँचाने का जरिया है।