इंटरनेशनल लग्जरी ब्रांड बुल्गारी की ज्वेलरी क्रिएटिव और जेम्स बायिंग डायरेक्टर लूसिया सिल्वेस्त्री और ब्रांड की ग्लोबल एंबेसडर प्रियंका चोपड़ा जोनास हाल ही में भारत की एक ऐसी रंगीन यात्रा पर निकलीं, जहाँ से बुल्गारी की रचनात्मकता की जड़ें जुड़ी हैं। बुल्गारी के लिए हर हाई ज्वेलरी रचना की शुरुआत होती है एक चमकदार चिंगारी से — एक ऐसा रत्न जिसकी ऊर्जा, रंग और आकर्षण कल्पनाओं को जन्म देता है और डिज़ाइन की दिशा तय करता है। इस बार यह रचनात्मक जादू शुरू हुआ भारत के जयपुर शहर से, जहाँ ‘पॉलीक्रोमा’ हाई ज्वेलरी कलेक्शन के लिए परिपूर्ण रत्नों की तलाश की गई, जिसे मई में पेश किया गया था।

इंटरनेशनल ब्रांड बुल्गारी की प्रीमियम हाईएंड ज्वैलरी के लिए रियल जेम्स चुनने जयपुर आईं प्रियंका चोपड़ा

प्रियंका चोपड़ा की रत्नों से सजी एक भावनात्मक खोज

इस जीवंत खोज में लूसिया सिल्वेस्त्री के साथ जुड़ीं प्रियंका चोपड़ा जोनास, जिन्होंने न सिर्फ एक कलाकार के रूप में, बल्कि एक भारतीय के रूप में अपनी जड़ों को फिर से महसूस किया। जयपुर — जिसे “गुलाबी नगरी” कहा जाता है — सदियों पुरानी रत्न शिल्प परंपरा, असाधारण शिल्पकारों और बेशकीमती रत्नों का केंद्र है।

रुबेलाइट्स, पन्ना, टूमरलाइन और नीलम जैसे बहुमूल्य रत्नों से भरे इस शहर की गलियों में प्रियंका ने लूसिया के साथ मिलकर रत्नों की पारंपरिक कटिंग प्रक्रिया को नजदीक से देखा और उसकी बारीकियों को समझा। यह यात्रा उनके लिए आत्मिक रूप से जुड़ाव और गर्व का क्षण थी।

बुल्गारी की रचनात्मक दुनिया में रंग सिर्फ सौंदर्य का हिस्सा नहीं होता — वह उसकी आत्मा होता है। यह भावनाओं, ऊर्जा, गति और पहचान की एक भाषा है। हर रत्न को उसकी चमक, आकार, रंग और स्पंदन के आधार पर चुना जाता है — एक गहरे अंतर्ज्ञान से प्रेरित होकर। लूसिया कहती हैं, “जैसे ही मुझे वह सही रत्न दिखाई देता है, उसी पल सपना शुरू हो जाता है। रंग में कुछ खास बात होती है — यह यादें जगाता है, विचारों को जन्म देता है और डिज़ाइन को कागज़ पर आने से पहले ही जीवंत बना देता है।”

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जयपुर के स्थानीय रत्न व्यापारियों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ लूसिया के दशकों पुराने रिश्ते इस खोज को और भी खास बना देते हैं। इन रिश्तों में सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि गहरा विश्वास और सम्मान छिपा है। उन्हीं की बदौलत प्रियंका को वह दुनिया देखने को मिली जो आम तौर पर लोगों की नजरों से छिपी रहती है — रत्नों और कारीगरों के बीच की मूक बातचीत, खोज की खुशी और सिर्फ एक चमकदार रत्न से जन्म लेने वाली असीम रचनात्मक संभावनाएं।

जयपुर में चुने गए ये रत्न अब रोम के सफर पर निकलते हैं — लूसिया सिल्वेस्त्री की डेस्क तक, जहाँ असली जादू आकार लेता है। यहाँ लूसिया रंगों और रत्नों के असंख्य संयोजनों के साथ प्रयोग करती हैं, जब तक कि सही संतुलन नहीं मिल जाता जो हर रचना को जीवंत बना दे। वह तब तक किसी डिज़ाइन को अंतिम रूप नहीं देतीं, जब तक यह तय न हो जाए कि यह रत्न किस रूप में सबसे ज़्यादा बोल पाएगा। जब यह संतुलन मिल जाता है, तो लूसिया डिज़ाइन सेंटर के साथ मिलकर स्केच तैयार करती हैं। इन स्केचेस को फिर बुल्गारी के मास्टर कारीगर जीवंत रूप देते हैं — यह एक ऐसा सामूहिक प्रयास होता है जो समर्पण, परिश्रम और रचनात्मक जुनून से पूर्णता की ओर बढ़ता है।

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यह यात्रा सिर्फ रत्नों की नहीं, बल्कि कल्पना और संस्कृति के मिलन की भी थी — एक ऐसी दुनिया की झलक, जहाँ भारत की शाश्वत भावना मिलती है बुल्गारी की आधुनिक रचनात्मक दृष्टि से। प्रियंका और लूसिया की यह रंगों भरी यात्रा इस बात की गवाही है कि कैसे एक चमकदार रत्न न केवल आभूषण का हिस्सा बनता है, बल्कि एक कहानी, एक भावना और एक विरासत को भी गढ़ता है।