ये बात 100 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ पॉसिबल है कि यदि उदय चोपड़ा के अलावा किसी और ने ‘पà¥à¤¯à¤¾à¤° इमà¥à¤ªà¥‰à¤¸à¤¿à¤¬à¤²â€™ लिखी होती तो आदितà¥à¤¯ चोपड़ा सà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤Ÿ को रदà¥à¤¦à¥€ की टोकरी में डाल देते। लेकिन à¤à¤¾à¤ˆ की जिद के आगे संà¤à¤µà¤¤: उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥à¤•ना पड़ा हो। ये सोचकर à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने फिलà¥à¤® बनाने की इजाजत दे दी हो कि इस फà¥à¤²à¥‰à¤ª कहानी पर फिलà¥à¤® बनाने के बाद उदय हीरो और लेखक बनने की जिद छोड़ देंगे। ये बात à¤à¥€ साबित हो गई है कि कहानी उदय ने ही लिखी होगी, किसी और की कहानी पर अपना नाम नहीं लगाया होगा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¤¸à¥€ कहानी वे ही लिख सकते हैं।
उदय ने कà¥à¤¯à¤¾ लिखा है, आप à¤à¥€ पढि़à¤à¥¤ अà¤à¤¯ (उदय चोपड़ा) à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ इंसान है, जिसे कोई लड़की शायद ही पसंद करे कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वह अतà¥à¤¯à¤‚त ही साधारण है। मन ही मन वह अलिशा (पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤‚का चोपड़ा) को चाहता है, जो कॉलेज की सबसे हॉट गरà¥à¤² है।
à¤à¤• गाने के बाद कॉलेज की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ खतà¥à¤® और सब अपनी-अपनी राह पर। सात साल मेहनत कर अà¤à¤¯ à¤à¤• सॉफà¥â€à¤Ÿà¤µà¥‡à¤¯à¤° बनाता है, जिसे वरà¥à¤£ (डीनो मोरिया) बड़ी आसानी से चà¥à¤°à¤¾à¤•र सिंगापà¥à¤° में à¤à¤• कंपनी को बेचने जाता है जहाठअलिशा काम करती है। अलिशा अब तलाकशà¥à¤¦à¤¾ है और उसकी 6 साल की बेटी है।
PRअà¤à¤¯ à¤à¥€ सिंगापà¥à¤° पहà¥à¤à¤š जाता है। कà¥à¤› गलतफहमी होती है और अलिशा उसे नौकर समठकर अपने घर में रख लेती है। इस नौकर से वह अपने दिल की सारी बात कहती है। उससे राय माà¤à¤—ती है। अंत में उसे पता चलता है कि अà¤à¤¯ उसके कॉलेज में था उसे सात वरà¥à¤· से पà¥à¤¯à¤¾à¤° कर रहा है। दोनों à¤à¤• हो जाते हैं और वरà¥à¤£ की चोरी पकड़ जाती है।
कहानी के अनà¥à¤°à¥‚प, सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤ªà¥à¤²à¥‡ और निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¨ à¤à¥€ खराब है। सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤ªà¥à¤²à¥‡ से उतार-चढ़ाव गायब है। सब कà¥à¤› बड़ी आसानी से होता है। सॉफà¥à¤Ÿà¤µà¥‡à¤¯à¤° की चोरी और उससे वापस अपनी चीज पाने में जो रोमांच होना चाहिठथा वो नदारद है। लव सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€ à¤à¤•दम नीरस है। फिलà¥à¤® की अंतिम रील तक हीरो का पà¥à¤¯à¤¾à¤° à¤à¤•तरफा है। अंत में हीरोइन उस पर अचानक मेहरबान हो जाती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚, इसके पीछे कोई ठोस कारण नहीं है।
हीरोइन के घर नौकर बनकर हीरो बेहद खà¥à¤¶ है। न तो वह अपना सॉफà¥à¤Ÿà¤µà¥‡à¤¯à¤° पाने की कोशिश करता है और न हीरोइन का दिल जीतने की। इससे फिलà¥à¤® बेहद धीमी और उबाऊ बन गई है।
फिलà¥à¤® में किरदारों की कमी à¤à¥€ खलती है। कहानी पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤‚का, उदय और डीनो के इरà¥à¤¦à¤—िरà¥à¤¦ घूमती रहती है। उदय और डीनो जैसे अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¤¾à¤“ं को आप जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देर बरà¥à¤¦à¤¾à¤¶à¥à¤¤ नहीं कर सकते हैं।
कॉमेडी के नाम पर डाइनिंग टेबल पर खाना परोसने का à¤à¤• लंबा दृशà¥à¤¯ रखा गया है। सीन देखकर हà¤à¤¸à¥€ जरूर आती है, लेकिन निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• और लेखक की कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ पर। निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• के रूप में जà¥à¤—ल हंसराज कà¥à¤› कमाल नहीं दिखा पाà¤à¥¤ सà¥à¤à¤¾à¤· घई की तरह अपना चेहरा उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¥€ फिलà¥à¤® में दिखाया है।
PRà¤à¤• आधà¥à¤¨à¤¿à¤• लड़की का किरदार पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤‚का ने अचà¥à¤›à¥€ तरह निà¤à¤¾à¤¯à¤¾ है, हालाà¤à¤•ि कà¥à¤› जगह वे ओवरà¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग कर गई। उदय चोपड़ा ने पूरी कोशिश की, लेकिन बात नहीं बन पाई। डीनो मारियो ठीक-ठाक रहे। अनà¥à¤ªà¤® खेर ने उदय चोपड़ा बनने की कोशिश की कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि फिलà¥à¤® में बाप-बेटे को à¤à¤• जैसा दिखाया गया है।
फिलà¥à¤® का लà¥à¤• यà¥à¤¥à¤«à¥à¤² है। सलीम-सà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤¨ ने कà¥à¤› अचà¥à¤›à¥€ धà¥à¤¨à¥‡à¤‚ बनाई हैं। ‘अलिशा’ और ‘टेन ऑन टेन’ अचà¥à¤›à¥‡ बन पड़े हैं, लेकिन फिलà¥à¤® में इनकी पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग ठीक से नहीं की गई है।
फिलà¥à¤® अपने नाम के अनà¥à¤°à¥‚प है। इससे पà¥à¤¯à¤¾à¤° इमà¥à¤ªà¥‰à¤¸à¤¿à¤¬à¤² है।








