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Critics Review
Reviews
raju_hindutanii
krishan_paul
ravi_123
vikas_mee
Jitesh.t
deepu.lalwani
‘लफंगे परिंदे’ उन लोगों की कहानी है…
‘लफंगे परिंदे’ उन लोगों की कहानी है जो मà¥à¤‚बई की चकाचौंध से दूर तंग गलियों में रहते हैं। जहाठआदमी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ और जगह कम है। वाडी या चाल में इनके छोटे-छोटे घर होते हैं। इन गलियों में रहने वाले बचà¥à¤šà¥‡/यà¥à¤µà¤¾à¤“ं में à¤à¤• खास किसà¥à¤® की सà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤¨à¥‡à¤¸ रहती है। à¤à¤¸à¤¾ ही à¤à¤• चिकना नौजवान है नंदू (नील नितिन मà¥à¤•ेश) जिसे वन शॉट नंदू कहा जाता है। वह वहाठफाइटिंग करता है जहाठलड़ने वालों पर पैसा लगाया जाता है। आà¤à¤–ों पर पटà¥à¤Ÿà¥€ बाà¤à¤§ नंदू पहले तो खूब मार खाता है, लेकिन बाद में à¤à¤• ही मà¥à¤•à¥à¤•े से विरोधी को चारों खाने चितà¥à¤¤ कर देता है। पिंकी पालकर (दीपिका पादà¥à¤•ोण) को सà¥à¤•ेट पहनकर डांस करने का शौक है और रियलिटी शो जीतकर नाम कमाना चाहती है। अपराध की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में नंदू कदम रखता है और पहले ही दिन उसकी कार से à¤à¤• लड़की टकरा जाती है और वह अंधी हो जाती है। बताने की जरूरत नहीं है कि वह पिंकी ही रहती है। यह बात सिरà¥à¤« नंदू को पता रहती है। आतà¥à¤®à¤—à¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¿ से पीड़ित नंदू पिंकी की आà¤à¤– बनता है और उसका सपना पूरी करने में मदद करता है। लेकिन à¤à¤• दिन उसका राज खà¥à¤² जाता है और वह पिंकी की नजरों में गिर जाता है। किस तरह से पिंकी और वह à¤à¤• होते हैं यह फिलà¥à¤® का सार है। मूल रूप से यह à¤à¤• लव सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€ है, जिसकी पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि में सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤Ÿ फाइटिंग और डांस का तड़का लगाया गया है। साथ में मà¥à¤‚बइया फà¥à¤²à¥‡à¤µà¤° दिया गया है। ये मà¥à¤‚बई में रहने वाले वो लोग हैं जो गणपति जोर-शोर से मनाते हैं, डांडिया खेलते हैं और तेज धूप में पसीने से लथपथ रहते हैं। शानपटà¥à¤Ÿà¥€, खोपचे, येड़ा, सटकेला शबà¥à¤¦ बोलते हैं। गà¥à¤²à¤•ंद, डीजल और चडà¥à¤¡à¥€ जैसे कà¥à¤› किरदारों के नाम है। कहानी को लेकर कई सवाल खड़े किठजा सकते हैं और कही-कही ‘रब ने बना दी जोड़ी’ की à¤à¥€ याद आती है। दरअसल निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• पà¥à¤°à¤¦à¥€à¤ª सरकार ने सारा फोकस नंदू और पिंकी की लव सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€ पर किया है कि किस तरह दोनों à¤à¤•-दूसरे के करीब आते हैं और दोनों में पà¥à¤¯à¤¾à¤° के बीज अंकà¥à¤°à¤¿à¤¤ होते हैं। यह हिसà¥à¤¸à¤¾ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अचà¥à¤›à¥‡ तरीके से फिलà¥à¤®à¤¾à¤¯à¤¾ और दरà¥à¤¶à¤•ों को बाà¤à¤§à¤•र रखा है। पिंकी, नंदू और उनके दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के बीच कई à¤à¤¸à¥‡ दृशà¥à¤¯ हैं, जो à¤à¤°à¤ªà¥‚र मनोरंजन करते हैं। जैसे नंदू का सà¥à¤•ेटिंग सीखने की कोशिश करना, दोनों का सिनेमा देखने जाना। लेकिन कहानी के अनà¥à¤¯ पहलूओं जैसे à¤à¤•à¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट के बाद पà¥à¤²à¤¿à¤¸ का नंदू तक पहà¥à¤à¤šà¤¨à¤¾ या रियलिटी शो में पिंकी का विजेता बनना जैसे मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ को निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• ने हलà¥à¤•े से लिया है। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ किसी तरह निपटाया गया है। यहाठकहानी à¤à¥€ कमजोर पड़ती है और निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¨ à¤à¥€à¥¤ इसके बावजूद à¤à¥€ â€à¤«à¤¿à¤²à¥à¤® देखते समय इसलिठठीक लगती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि नंदू-पिंकी की पà¥à¤°à¥‡à¤® कहानी को अचà¥à¤›à¤¾ खासा फà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ दिया गया है। नील नितिन मà¥à¤•ेश और दीपिका पादà¥à¤•ोण ने à¤à¤²à¥‡ ही लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ हासिल कर ली हो, लेकिन अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ के कई पाठइनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अà¤à¥€ सीखना है। नील के अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ में उनकी पिछली रिलीज फिलà¥à¤®à¥‹à¤‚ के मà¥à¤•ाबले सà¥à¤§à¤¾à¤° नजर आता है। दीपिका सà¥à¤‚दर लगी हैं, लेकिन दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤¹à¥€à¤¨ लड़की का रोल उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¸à¥‡ निà¤à¤¾à¤¯à¤¾ मानो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सब कà¥à¤› दिख रहा हो। चूà¤à¤•ि कहानी में बताया गया है कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दिखाई नहीं दे रहा है इसलिठहमें ये मानना पड़ता है, वरना दीपिका के अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ से कही à¤à¥€ ये बात नजर नहीं आती है कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नजर नहीं आ रहा है। नंदू के दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ और पियूष मिशà¥à¤°à¤¾ का अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• है। छोटे से रोल में केके मेनन à¤à¥€ हैं। आर आनंद का संगीत फिलà¥à¤® का पà¥à¤²à¤¸ पाइंट है। कà¥à¤› गीत अचà¥à¤›à¥‡ बन पड़े हैं और इनका फिलà¥à¤®à¤¾à¤‚कन à¤à¥€ बढ़िया है। सà¥à¤µà¤¾à¤¨à¤‚द किरकिरे ने उमà¥à¤¦à¤¾ गीत लिखे हैं। à¤à¤¨ नटराजन सà¥à¤¬à¥à¤°à¤®à¤£à¥à¤¯à¤® की सिनेमेटोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ आà¤à¤–ों को अचà¥à¤›à¥€ लगती है। संवाद कई बार गà¥à¤¦à¤—à¥à¤¦à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उमà¥à¤®à¥€à¤¦ से ‘लफंगे परिंदे’ न देखी जाठतो यह अचà¥à¤›à¥€ लग सकती है।
Read more Lesssshukla51
I never watch this types of worst movie in my life. Why Pradeep Sarkar torcher to pulic and making…
I never watch this types of worst movie in my life. Why Pradeep Sarkar torcher to pulic and making the film, I think Pradeep sarkar will himself retire in the bollywood. He is the bad director which i saw in my whole life. All movie of Pradeep Sarkar is flop and torcher to public. This movie is only for Rahul Mahajan.
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