कोरोना संकटकाल में सुपरहीरो बनकर लगातार लोगों की मदद कर रहे सोनू सूद की दरियादिली ने हर किसी का दिल जीत लिया । महामारी के दौरान लॉकडाउन में दूसरे शहरों में फंसे हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूरों को अपने खर्चे पर उन्हें उनके घर पहुंचाने से लेकर बेरोजगार हुए प्रवासियों को घर और रोजगार दिलाने वाले सोनू सूद कई तरह से जरूरतमंद लोगों की मदद की। इतना ही नहीं सोनू ने होनहार गरीब बच्चों के लिए स्कॉलरशिप कार्यक्रम भी शुरू किया ताकि वे बच्चें अपनी मनपसंद पढ़ाई कर सके । अपनी इसी नेक दरियादिली के कारण सोनू मसीहा बनकर उभरे । लेकिन सोनू खुद को मसीहा नहीं मानते और इसलिए उन्होंने अपनी किताब का टाइटल भी यही रखा है ‘आई एम नो मसीहा’ ।

सोनू सूद की किताब में जरूरतमंदों की मदद करने का अनुभव
सोनू का मानना है कि वो कोई मसीहा नहीं हैं । सोनू ने अपनी लॉकडाउन जर्नी को शेयर करते हुए एक किताब लिखेंगे जिसका नाम है 'I Am No Messiah' (मैं मसीहा नहीं हूं) । इस किताब की सह-लेखिका हैं मीना अय्यर । लॉकडाउन के दौरान अनेक जरूरतमंदों की मदद के अनुभव को सोनू ने इस किताब में शेयर करेंगे ।
मैं ये नहीं मानता हूं कि मैं किसी भी तरह का मसीहा हूं
सोनू ने कहा कि, “मैं नहीं मानता हूं कि मैं मसीहा हूं । मैं ये मानता हूं कि मैं उनकी जर्नी का एक हिस्सा हूं । हर एक प्रवासी का जो जिंदा है और बड़े शहरों में आकर अपने परिवार के लिए रोटी कमाना चाहता है । इसलिए मैं पूरी तरह ये विश्वास करता हूं कि मैंने पिछले 6 महीनों में उनके साथ जो कनेक्शन बनाया है, उसने मुझे उनमें से एक बना दिया है । मैं ये नहीं मानता हूं कि मैं किसी भी तरह का मसीहा हूं ।”
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ब्रांड्स मार्केट की पहली पसंद बन चुके सोनू को उनके चाहने वालों ने भगवान तक का दरजा भी दे दिया है ।
















