आशुतोष गोवारिकर अपने अगले निर्देशन के लिए कुछ प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं और हमने सुना है, इनमें से एक, युवा बुद्ध के जीवन पर आधारित है, जिसे प्रिंस सिद्धार्थ कहा जाता है । खबर है कि, टाइगर श्रॉफ़ को राजकुमार सिद्धार्थ का रोल अदा करने के लिए अप्रोच किया गया है । आपको बता दें कि यह फ़िल्म युवा राजकुमार के जीवन और उनके बुद्ध बनने के सफ़र के इर्द-गिर्द घूमती है ।

ट्रेड सूत्र के मुताबिक, "आशुतोष ने अगले निर्देशन के लिए तीन स्क्रिप्ट को अंतिम रूप दिया है और उनमें से एक है राजकुमार सिद्धार्थ । चूंकि यह एक पांचवीं और छठी शताब्दी ईसा पूर्व शताब्दी की फिल्म है, इसलिए फिल्म को गहन रिसर्च की आवश्यकता होगी, जिसके लिए आशु जाने जाते हैं । हर बार जब उन्होंने एक पीरियड फिल्म बनाई है, वह वास्तव में वहां गए और उन जगहों पर रहे जहां उन किरदारों का विकास हुआ । एक ऐसे युवा राजकुमार, जिसने तपस्वी बनने के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया, ने आशुतोष को फ़िल्म बनाने के लिए आकर्षित किया और अब उन्होंने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया है । उनका मानना है कि निभाने के लिए एकदम उपयुक्त है । हालांकि दोनों ही किरदार, पारिश्रमिक और डेट्स के बारें में बात कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कुछ भी कंफ़र्म नहीं हुआ है क्योंकि टाइगर बागी 2 और यशराज फ़िल्म की सिद्धार्थ आंनंद द्दारा निर्देशित फ़िल्म जिसमें ह्रितिक रोशन भी नजर आएंगे और इसकी शूटिंग अगले साल से शुरू होगी, में व्यस्त है ।”

प्रिंस सिद्धार्थ कौन थे ?

प्रिंस सिद्धार्थ का जन्म लुंबिनी में 563 ईसा पूर्व इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर मे हुआ था । जन्म समारोह के दौरान, साधु द्रष्टा आसित ने उनके पिता को बताया कि या तो यह बच्चा तो एक महान राजा बनेगा या एक महान पवित्र पथ प्रदर्शक बनेगा अगर उसने बुढ़ापे, बीमारी, मौत और भटकते तपस्वी को देखा । राजा ने जीवन के इन चार वास्तविकताओं से युवा राजकुमार को ढालने की कोशिश की । लेकिन जब वह 29 साल के हुए तो, सिद्धार्थ अपने रथोत्तर से बाहर निकल चुके थे और उन्हें पहली बार पीड़ा का सामना करना पड़ा था ।उन्होंने ऋषियों के अनुसार चार साइट को देखा था: बुढ़ापे वाला एक आदमी, बीमारी से पीड़ित व्यक्ति, एक लाश और भटकते तपस्वी और एक तपस्वी के जीवन के लिए अपनी भौतिक संपत्ति को त्यागने का निर्णय लिया। । सिद्धार्थ विवाहोपरांत एक मात्र प्रथम नवजात शिशु राहुल और पत्नी यशोधरा को त्यागकर संसार को जरा, मरण, दुखों से मुक्ति दिलाने के मार्ग की तलाश एवं सत्य दिव्य ज्ञान खोज में रात में राजपाठ छोड़कर जंगल चले गए । वर्षों की कठोर साधना के पश्चात बोध गया (बिहार) में बोधी वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे सिद्धार्थ गौतम से बुद्ध बन गए ।