कुछ प्रतिष्ठित अखबारों में छपी खबर के मुताबिक, संजय लीला भंसाली उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सामंजस्य स्थापित करने के इरादे में हैं जिन्होंने अपने राज्यों में पद्मावती पर प्रतिबंध लगा दिया है, फ़िल्ममेकर से जुड़े बेहद करीबी सूत्र ने इन खबरों को मानने से सरासर इंकार किया है ।

सूत्रों के मुताबिक, “यह स्पष्ट रूप से एक ऊबाऊ पत्रकार के दिमाग की उपज है जो अपने काम में कुछ उत्तेजना की तलाश में है । मुख्यमंत्रियों से मिलने या किसी अन्य समूह या व्यक्ति के साथ संभवत: सुलह स्थापित करने की कोई योजना नहीं है । संजय लीला भंसाली एक सुस्पष्ट चर्चा के लिए संसदीय समिति से मिलने के लिए दिल्ली गए थे । यह संसद के सम्मान की खातिर किया गया था। इसके अलावा निर्देशक का किसी भी व्यक्ति को उनकी फिल्मों को रिलीज़ करने के लिए मनाने का कोई इरादा नहीं है ।"

पद्मावती के करीब एक अन्य स्रोत का कहना है कि फिलहाल योजना बहुत ही शांत और लो-प्रोफाइल बनाना है । सूत्र ने बताया, "वे सेंसर बोर्ड द्दारा पद्मावती को देखने का इंतजार कर रहे हैं और गुजरात चुनावों की बात है त वो इसकी अगली रिलीज डेट से पहले खत्म हो चुके होंगे ।"

अब सवाल ये है कि सीबीएफसी पद्मावती को क्यों नहीं देख रही है और प्रमाणित क्यों नहीं कर रही है ? "यह सवाल प्रसून जोशी से बार-बार संसदीय समिति ने पूछा था । लेकिन उसमें कोई भी उचित जवाब नहीं दिखता है," सूत्र ने बताया ।

अब यदि भंसाली अफ़वाह की बात करें तो, यहां संजय लीला भंसाली से मीडिया की सट्टा कल्पनावादी वर्गों को चेतावनी दी गई है: "सिर्फ इसलिए कि मैं नहीं बोल रहा हूं, कृपया कुछ भी मनगढ़ंत मत बनाओ ।"