Rakesh-Roshan-threatens

निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन बहुत गुस्से में हैं । खास बातचीत के दौरान पता चला कि उन्हें फ़िल्म इंडस्ट्री छोड़ने की धमकी मिली है । दुखी और नाराज फ़िल्ममेकर राकेश रोशन ने कहा कि, "फिल्म उद्योग में 50 वर्षों के बाद जो खेल मेरे साथ खेला जा रहा है उसे समझने में असमर्थ हूं । मैं और मेरा बेटा बहुत ही साधारण लोग हैं । हम सिनेमा से प्यार करते है । और हम इसका हिस्सा हैं, एक बड़ा लाभ कमाने के लिए नहीं बल्कि हम मनोरंजन उद्योग का एक हिस्सा होने का आनंद लेते है । दुर्भाग्य से यहां जो भी राजनीति चल रही है वो सब हमारी समझ या सहिष्णुता से परे है ।”

इस विश्वासघात ने राकेश रोशन को अंदर तक तोड़ दिया है, “मैं फिल्म निर्माण के उस पुराने स्कूल से आता हूं जहां यहां तक की ऑफ़िशियली कॉंट्रेक्ट्स को दूर रखा जाता है । सिर्फ़ एक दूसरे से कहे शब्द काफ़ी होते हैं । लेकिन यहां पर प्रदर्शकों और वितरकों ने अपने शब्दों को तोड़ते हुए अपना वादा तोड़ दिया, पता नहीं किस दवाब में…मुझे नहीं पता । मुझे बहुत दुख हुआ । यदि ऐसे ही अनैतिक तरीकें चलते रहे तो मुझे फिल्म निर्माण से इस्तीफा देना होगा । मैं ये सब झेलने में समर्थ नहीं हूं ।”

वह ऐसे दोषारोपण वाले खेल खेलने के लिए तैयार नहीं है । "मैं किसी भी अन्य फिल्म की ओर उंगली नहीं उठा रहा हूँ । लेकिन फिल्म व्यवसाय के अस्तित्व की खातिर हमें और अधिक पेशेवर होने की आवश्यकता है । मुझे नहीं पता कि किस प्रकार के दवाब में आकर प्रदर्शकों ने काबिल के साथ ये छल किया । लेकिन भविष्य में, यदि प्रदर्शक इसी तरह के दबाव के आगे झुकते रहे तो एक दिन हमें अपनी दुकान बंद करनी पड़ेगी । वहीं दूसरी तरफ़, प्रदर्शक और वितरक एक समान दिन पर रिलीज होने वाली फ़िल्मों के लिए समान संख्या में स्क्रीन स्पेस देंगी तो किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं होगा ।”

भारतीय फिल्म उद्योग के निगमीकरण द्वारा बहुत सारी उम्मीद जगाई गई थी । लेकिन राकेश रोशन कहते हैं कि वो सारी उम्मीदें धराशायी हो गईं । "हमने सोचा था कि कॉर्पोरेट जगत अगले दस सालों तक हमारी फ़िल्म इंडस्ट्री को आगे ले जाएंगे । लेकिन हम वास्तव में बीस साल पीछे हो गए । यदि हम ऐसे ही कुत्ते का कुत्ता बैरी वाली हरकत करते रहेंगे तो मुझे यह पद छोड़ना होगा । मैंने कई दलित नायक के बारे में फिल्में बनाई हैं । क्योंकि जब मैं इस उद्योग में आया तो मेरे पास किसी का सपोर्ट नहीं था । फिल्म निर्माण के लिए मैंने अपने तरीके से संघर्ष किया । आज मुझे लगता है मैं सेना से लड़ रहा हूं जिससे की मैं नहीं लड़ सकता । मैं उन्हें नहीं समझता ।"