निंदा से उदारवाद को विभाजित करने के लिए एक बहुत बारिक रेखा है । हमारे फ़िल्ममेकर को इस लाइन को आसानी से क्रॉस करने का मौका मिला हुआ है । राजकुमार हिरानी की हालिया रिलीज संज़ू में तिरस्कार की सीमा पर एक गुस्ताख सीक्वंस है, जिसमें एक बहुत ही प्रतिष्ठित अनुभवी राजनीतिक नेता का जिक्र है, जिसके माध्यम से संजय दत्त अपनी गंभीर कानूनी समस्याओं में ढिलाई बरतने की उम्मीद करते हुए दिखाई देते है ।
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संजू में बरती गई काफ़ी ऐतिहात
स्पष्ट रूप से वह राजनीतिक नेता (फ़िल्म में अंजन श्रीवास्तव द्वारा निभाया गया किरदार) जो अपनी कविता करने के कौशल को लेकर जाने जाते है, और जिनके पास एक शानदार व्याख्यात्मक कौशल है, संजय दत्त के सामने बस सो गया, जबकि बाद में उसकी पीड़ा को सुना ।
मजाकिया अंदाज में रणबीर कपूर के संजय दत्त ने हमें बताया, ''हम अभी भी नहीं जानते कि, क्या उसने मेरी समस्याओं को सुनने से बचने के लिए सोने का नाटक किया था या वह वास्तव में सो गया था ।"
हर कोई जानता है उस नेता को
हमारे देश के प्रतिष्ठित राजनेताओं से परिचित कोई भी व्यक्ति यह जरूर जानता होगा कि ये फिल्म किस नेता के बारे में बता रही है । हम यह भी जानते हैं कि असल में संजय दत्त 1999 में न्यूयॉर्क के दौरे के दौरान मदद के लिए तत्कालीन प्रधान मंत्री से मिले थे ।
सेंसर के प्रमुख प्रसून जोशी ने एक बहुत सम्मानित राजनीतिक नेता के इस लगभग स्पष्ट संदर्भ पर टिप्पणी न करने का फैसला किया, जबकि सेंसर बोर्ड के एक सदस्य ने कहा, ''हम सभी जानते थे कि फिल्म किसके बारे में बता रही थी । लेकिन उन्होंने इसे सिर्फ़ 'एक राजनेता' के तौर पर उल्लेख किया । अगर हमने इसके बारे में शोर मचाया तो सम्मानित राजनेता का नाम सार्वजनिक हो जाएगा इसलिए फिल्म की टीम ने इससे इंकार कर दिया होगा ।''
विडंबना यह है कि राजनेता की पहचान छुपाकर, संजू मीडिया में संशयात्मक स्थिति से बचने के लिए इसका सहारा लेती है ।
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चूंकि संजय दत्त, रणबीर कपूर और परेश रावल ने संजू में काफ़ी ऐतिहात बरती है और इस बात का खास ध्यान रखा है कि किसी का भी कोई अपमान न हो जिससे मीडिया में हड़कंप मच जाए और इसलिए उन्होंने बिना किसी नेता का नाम लिए वो सीन किया, जबकि हर कोई जानता है कि वह नेता कौन है ।
















