सिडनी इस अक्टूबर एक खास मौके का गवाह बनेगा, जब इंडियन फिल्म फेस्टिवल वापसी कर रहा है। 9 से 11 अक्टूबर 2025 तक चलने वाला यह तीन दिवसीय कार्यक्रम बेहतरीन भारतीय सिनेमा और कहानियों से सिडनी के दर्शकों को जोड़ने वाला है। इस फेस्टिवल का आयोजन मीतू भौमिक लांगे एएम कर रही हैं, जो इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न की संस्थापक भी हैं। इस बार का सिडनी संस्करण अभिनेता-फिल्ममेकर टन्निष्ठा चटर्जी की फिल्म फुल प्लेट से शुरू होगा, जिसे अशुतोष गोस्वामी और अनुप चिटनिस ने प्रोड्यूस किया है।

टन्निष्ठा चटर्जी की फुल प्लेट होगी ओपनिंग नाइट फिल्म
फुल प्लेट में कीर्ति कुल्हाड़ी मुख्य भूमिका में हैं, जबकि शारीब हाशमी, मोनिका डोगरा और इंद्रनील सेनगुप्ता अहम किरदार निभा रहे हैं। इस फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर हाल ही में बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025 के लिए तय किया गया था। यह कहानी मुंबई की एक मुस्लिम गृहिणी की है, जिसके पति के एक्सीडेंट के बाद उसे घर चलाने के लिए काम करना पड़ता है। इस बदलाव से उसका पति असुरक्षित महसूस करता है और इसी सफर में उसकी अपनी सोच और ज़िंदगी भी बदल जाती है।
फेस्टिवल की ओपनिंग फिल्म बनने पर टन्निष्ठा चटर्जी ने कहा, “मेरी ज़िंदगी के सबसे कठिन दौर में, यह जानना कि कहानियाँ अब भी मायने रखती हैं, मेरे लिए सब कुछ था। जब मीतू ने मुझसे कहा कि फुल प्लेट को सिडनी के इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ सिडनी की ओपनिंग फिल्म बनाना चाहती हैं, तो मैं विनम्र और बेहद आभारी महसूस कर रही थी। यह फिल्म संघर्ष, हिम्मत और उम्मीद से पैदा हुई है, और इसे सिडनी के दर्शकों के साथ साझा करना मेरे लिए एक पूरा सफर पूरा करने जैसा है।”
फेस्टिवल डायरेक्टर मीतू भौमिक लांगे एएम ने कहा, “फुल प्लेट से फेस्टिवल की शुरुआत करना वाकई खास है। टन्निष्ठा का साहस और हर मुश्किल के बावजूद यह कहानी बताने का उनका दृढ़ संकल्प यही दिखाता है कि भारतीय सिनेमा क्यों महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ मनोरंजन नहीं करता, बल्कि सच्चाई दिखाता है, घाव भरता है, और सोच को चुनौती देता है। हमें खुशी है कि हम सिडनी के दर्शकों का स्वागत इस फिल्म और तीन दिनों के ऐसे सिनेमा से कर रहे हैं, जो सोचने पर मजबूर करेगा, जश्न मनाएगा और प्रेरित करेगा।”
तीन दिनों के इस फेस्टिवल में भारत और भारतीय डायस्पोरा से जुड़ी 15 से अधिक फ़िल्में दिखाई जाएँगी। इनमें अलग-अलग भाषाओं और शैलियों की स्वतंत्र और फीचर फ़िल्में, शॉर्ट्स और डॉक्यूमेंट्री शामिल होंगी। इसके अलावा पैनल डिस्कशन, प्रश्नोत्तर सैशन और फ़िल्ममेकर से बातचीत जैसी गतिविधियाँ भी होंगी, जिससे दर्शक सीधे कलाकारों और उनकी कहानियों से जुड़ सकेंगे।
















