
ह्रितिक रोशन अब उन लोगों को प्रेरित करेंगे जो ठीक तरह से बोल नहीं पाते हैं, और उनका ये कदम एक शक्तिशाली प्रेरक कदम के रूप में देखा जा सकेगा ।
अपने बचपन के दौरान, ह्रितिक को हकलाने के कारण काफ़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था । इसलिए काबिल स्टार, ह्रितिक को लगता है हकलाने की वजह से जो शर्मिंदगी उन्होंने बचपन में झेली थी वो कोई और न झेले और इससे कैसे उबरा जाता है और अपनी जिंदगी पर इसका कोई असर नहीं आने देना चाहिए, इन सबका पाठ अब ह्रितिक अपने प्रशंसकों को पढ़ाएंगे ताकि हर ऐसे लोग बिना किसी शर्मिंदगी के साथ अपना जीवन जिएं ।
ह्रितिक कहते हैं, “तब, मैं खुद को कमजोर समझता था, सक्षम, सबके समान और सामान्य नहीं समझता था । स्कूल और कॉलेज सब मुझे बेकार लगते थे । बच्चे वैसे तो बहुत प्यारे होते है लेकिन अनजाने में वो कई बार अपमानजनक बातें कर जाते है । इस मामले में पर्याप्त जानकारी या शिक्षा का न होना ही एक समस्या थी । दर असल हमें जागरुकता की जरूरत है ।”
एक शारीरिक विकलांगता के कलंक और खतरों को अपने शुरुआती संवेदीकरण के कारण, ह्रितिक रोशन ने अपने पिता राकेश रोशन की फिल्म कोई मिल गया में एक स्वलीन व्यक्ति की भूमिका निभाई है... संजय लीला भंसाली की फ़िल्म गुजारिश में एक लकवेग्रस्त आदमी भूमिका निभाई और हाल ही में, संजय गुप्ता की फ़िल्म काबिल में अंधे आदमी का किरदार बखूबी निभाया ।
















