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जांच समिति (ईसी) द्वारा प्रमाण पत्र देने से इंकार किए जाने के बाद, छोटे बजट की गुजराती फ़िल्म सलगतो सवाल अनामत, कथित तौर पर गुजरात में हार्दिक पटेल समर्थक आरक्षण आंदोलन पर आधारित है, को पुनरीक्षण समिति (आर सी) द्वारा सेंसर प्रमाण पत्र देने से इंकार कर दिया गया है । अब इस फ़िल्म के पास ये विकल्प है कि वह या तो न्यायाधिकरण जाए या उड़ता पंजाब से आजादी का सबक ले, फ़िल्म माननीय अदालतों से भी संपर्क कर सकती हैं ।

हालांकि इस मामले में ऐसी कोई संभावना नहीं है, राजनीतिक संवेदनशीलता के मुद्दे को उठाती ये फ़िल्म को कोई कानूनी सहारा मिल जाए, ऐसा तो नहीं लगता, लेकिन फ़िर भी फ़िल्ममेकर अपनी फिल्म को रिलीज करने के लिए कानूनी विकल्प का सहारा लेने में सक्षम होंगे । सूत्रों के मुताबिक, 'हार्दिक पटेल आरक्षण आंदोलन पर आधारित सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए बनी गुजराती फ़िल्म पर प्रतिबंध लगा दिया है' ।

इसी तरह के कारणों में फ़ंसी डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी की फ़िल्म मोहल्ला अस्सी, जो कि बनारस जैसे पवित्र शहर को गलत तरीके से पेश कर रही थी साथ ही भगवान के वेश में लोगों का गाली-गलौच करना, को भी इसी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया था । सूत्रों के मुताबिक, “फिल्म को जांच समिति द्वारा प्रमाण पत्र देने से इंकार कर दिया गया था । पुनरीक्षण समिति (आर सी), जिसने इस सप्ताह यह फ़िल्म देखी , ने भी फिल्म को प्रमाणित करने के लिए मना कर दिया है ।”

संयोग से वाराणसी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्वाचन क्षेत्र है और जिसे द्विवेदी की फिल्म में घेराबंदी के तहत दिखाया गया है । जहां तक सेंसर प्रमाणपत्र का सवाल है, राजनीति से भरी ये दोनों फ़िल्में कौनसा रास्ता चुनेंगी, ये देखना दिलचस्प होगा ।