पहले ये सूचित किया गया था कि सेलिब्रिटिज़, जो कई विज्ञापनों को एंडोर्स करते हैं,  ने गुमराह करने वाले विज्ञापन किए तो उन्हें जेल हो सकती है । उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा पारित एक नए मसौदा के अनुसार, यदि सेलिब्रिटिज़ ऐसे भ्रामक विज्ञापनों का हिस्सा बनें जो लोगों को गुमराह करते हैं, तो उन्हें 50 लाख जुर्माने के साथ 5 साल की जेल भी हो सकती है ।

पिछले साल, 30 वर्षीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को निरस्त करने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2015 को पेश किया था । अप्रैल 2016 में,  एक संसदीय स्थायी समिति ने भ्रामक विज्ञापनों और उसमें शामिल मशहूर हस्तियों के लिए भारी जुर्माना और कारावास लागू करने के लिए अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थी ।

सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने भ्रामक विज्ञापनों से निपटने के लिए कड़े प्रावधानों तथा ऐसे विज्ञापन करने वाली हस्तियों की जवाबदेही तय करने का प्रस्ताव किया है । सूत्रों के मुताबिक, पहली बार अपराध पर 10 लाख रूपये का जुर्माना व दो साल की सजा का प्रस्ताव है. वहीं अगर कोई सेलिब्रिटी या एंबैडसर दूसरी बार या आगे और गलती करता है तो 50 लाख रूपये तक का जुर्माना या पांच साल की सजा हो सकती है ।

भ्रामक विज्ञापन करने वाली हस्तियों यानी सेलिब्रिटी पर जवाबदेही तय करने संबंधी एक नये मसौदा विधेयक पर आज विचार किया जाएगा । मिलावट पर लगाम लगाने के लिए मंत्रालय ने कड़े दंड व जुर्माने का प्रस्ताव किया है । इसके तहत लाइसेंस का निलंबन व रद्द किया जाना भी शामिल है ।

सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्री अरूण जेटली की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह की बैठक आज होनी है । इसमें मसौदा विधेयक को मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष पेश करने से पहले उपभोक्ता मंत्रालय विभाग द्वारा सुझाए गए प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा ।