पिछले महीने 25 जनवरी को रिलीज़ हुई शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम की पठान बॉक्स ऑफ़िस पर सफलता की नई इबारत लिख चुकी है । न केवाल भारत बल्कि विदेशों में भी पठान की धूम देखी गई । अब तक की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फ़िल्म बनकर उभरी शाहरुख खान की पठान ने अपनी ऐतिहासिक कमाई से कई बड़ी फ़िल्मों को पीछे छोड़ दिया है । और अब पठान एक और इतिहास रचने जा रही है । सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बनीं पठान 24 फरवरी को बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर रिलीज़ होने जा रही है । दिलचस्प बात यह है कि पठान, लगभग 8 साल बाद पड़ोसी देश बांग्लादेश में रिलीज होने वाली पहली बॉलीवुड फिल्म होगी ।

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बांग्लादेश में रिलीज होगी शाहरुख खान की पठान 

बता दें कि, बांग्लादेश में 5 दशकों से भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगा हुआ है । 2015 में अस्थायी रूप से प्रतिबंध हटा लिया गया था और सलमान खान-अभिनीत वांटेड (2009) पहली भारतीय फिल्म बनी, जो बांग्लादेश में रिलीज हुई थी । हालांकि, इससे बांग्लादेशी कलाकार और वहाँ के मनोरंजन जगत से जुड़े लोग ख़ासे नाराज़ हुए क्योंकि उन्हें लगा की, यह बांग्लादेशी फिल्म उद्योग को पंगु बना सकता है । विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व लोकप्रिय बांग्लादेशी अभिनेता शाकिब खान ने किया । इस बीच, प्रदर्शनकारियों ने वांटेड के पोस्टर फाड़ दिए और थिएटर के बाहर कतार में खड़े फिल्म देखने वालों से फिल्म का बहिष्कार करने का अनुरोध किया । इस बीच, नाराज प्रदर्शकों ने शाकिब खान अभिनीत फिल्मों का बहिष्कार करने का भी फैसला किया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आमिर खान की 3 इडियट्स (2009) और शाहरुख खान की माई नेम इज खान (2010) जैसी फिल्में भी उस समय बांग्लादेश में रिलीज हुई थीं । लेकिन स्थानीय फिल्म उद्योग के विरोध और दबाव के चलते प्रतिबंध फिर से लगा दिया गया।  इस बीच, बांग्लादेशी बॉलीवुड प्रेमियों ने पायरेटेड प्रिंट पर नई रिलीज को देखाना जारी रखा ।

हालाँकि,रिपोर्ट्स के अनुसार, 19 फिल्म-संबंधित संघों ने सर्वसम्मति से बांग्लादेशी सिनेमाघरों में हिंदी फिल्मों की रिलीज़ की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की है । हालांकि, पेंच यह है कि पड़ोसी देश में एक साल में सिर्फ 10 हिंदी फिल्मों को ही रिलीज होने की इजाजत होगी ।

इस फैसले से न केवल देश के फिल्म प्रेमियों बल्कि विशेषज्ञों और उद्योग जगत के लोगों में भी चर्चा हुई है। उनमें से कुछ का मानना है कि हिंदी फिल्मों को अनुमति देने का निर्णय स्थानीय फिल्म उद्योग के लिए हानिकारक हो सकता है । दूसरी ओर, कई लोगों की राय है कि हिंदी फिल्में बांग्लादेश में प्रदर्शनी क्षेत्र को एक नया जीवन दे सकती हैं, खासकर कोविड कहर के बाद। कुछ लोगों ने यह भी तर्क दिया कि जब हॉलीवुड फिल्मों को रिलीज करने की अनुमति दी जाती है, तो हिंदी फिल्मों को बांग्लादेश के सिनेमाघरों में रिलीज़ क्यों नहीं किया जा सकता ।