दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DPIFF) फिल्म इंडस्ट्री के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक माना जाता है। यह भारतीय सिनेमा की विरासत को सम्मानित करता है और देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के कलाकारों की प्रतिभा को पहचान देता है। इसी सम्मान की प्राप्ति कर रही हैं ईशा कोप्पिकर अपनी अगली फिल्म रॉकेटशिप के साथ एक ऐसा प्रोजेक्ट जो उनके दिल के बेहद करीब है।

ईशा कोप्पिकर की रॉकेटशिप
फिल्म इंडस्ट्री में बिना किसी गॉडफादर के कदम रखने वाली ईशा ने सुभाष घई के प्रतिष्ठित व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल एकेडमी के छात्रों के साथ यह फिल्म बनाना चुना। उनका यह कदम असली प्रतिभा को प्रोत्साहित करने और मेहनती नए कलाकारों को पहचान देने की दिशा में एक सुंदर पहल है।
और अब इस मेहनत को मिला है सम्मान रॉकेटशिप का चयन न केवल एक बल्कि दो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित फिल्म फेस्टिवल्स में हुआ है प्रतिष्ठित दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 और मोक्खो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025 में।
अपनी खुशी जाहिर करते हुए ईशा ने कहा, “यह सम्मान सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि पूरे ‘रॉकेटशिप’ टीम के लिए है, जिन्होंने दिल लगाकर इस फिल्म को बनाया। सच में सपने उड़ान भरते हैं, और मुझे खुशी है कि फिल्म और टीम को यह पहचान मिल रही है। मैं खासतौर पर उन छात्रों के लिए खुश हूं, जिन्होंने बिल्कुल शुरुआत से अपने करियर की नींव रखी और इतनी मेहनत की। दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए चयनित होना बहुत बड़ी उपलब्धि है। मुझे गर्व है कि इन बच्चों ने यह मुकाम हासिल किया, और मुझे यकीन है कि आने वाले समय में ये बहुत आगे जाएंगे।”
कुछ सप्ताह पहले रिलीज हुए फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों और समीक्षकों से खूब सराहना मिली थी। रॉकेटशिप एक भावनात्मक कहानी है एक मां की अटूट ताकत और एक बेटी के अडिग सपनों के बंधन की, जो पूरे देश के परिवारों के दिलों को छू लेगी।
फिल्म का निर्माण हरमनराय सिंह सहगल ने किया है, पटकथा और निर्देशन अर्जुन मेनन का है, और इसमें ईशा कोप्पिकर के साथ बाल कलाकार अमायरा शर्मा मुख्य भूमिकाओं में हैं।
















