नेटफ्लिक्स की क्लास, गिल्टी, और हॉटस्टार की कैडेट्स जैसी हिट सीरीज़ों में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराने के बाद, एक्टर और आध्यात्मिक खोजी चयन चोपड़ा अब निकल पड़े हैं अपने अब तक के सबसे निजी सफर पर — फिल्म अव्यान के ज़रिए। यह कोई आम फिल्म नहीं, बल्कि आत्मा, खामोशी और खुद की खोज का सिनेमाई अनुभव है, जिसे रचा है सुनील कोठारी ने और डायरेक्ट किया है गौरव खटी ने।

अव्यान में चयन चोपड़ा
अव्यान में चयन बनते हैं आकाश — एक टैलेंटेड लेकिन खोया हुआ म्यूज़िशियन, जो दुनियावी भ्रम और बेचैनी से टूटता है और कुछ गहराई में डूब जाने को तरसता है। उसका यह रूहानी सफर ले जाता है उसे बनारस की गलियों में — जहां हर घाट, हर नज़र, और हर धूल का कण उसके भीतर कुछ बदल देता है।
चयन कहते हैं, “जब पहली बार अव्यान की स्क्रिप्ट पढ़ी, तो कुछ अंदर हिल गया। आकाश एक किरदार नहीं लगा, वो जैसे मेरी ही परछाईं था। वो सिर्फ म्यूज़िक बजाता नहीं — वो सुनता है, महसूस करता है। मैं खुद को उसमें देख पा रहा था ।”
“मैं अपने करियर के ऐसे मोड़ पर था, जहां मैं सिर्फ एक्टिंग नहीं, आत्मा से जुड़ाव चाहता था। अव्यान ने वो मौका दिया — और बनारस ने मुझे भीतर तक बदल डाला। शूट के दौरान मैं संगीत को जीने लगा था, सिर्फ बजाने नहीं।”
फिल्ममेकर सुनील कोठारी बताते हैं, “चयन के ऑडिशन में एक नैचुरल तीव्रता और मासूमियत थी। वो एक्टिंग नहीं कर रहे थे — वो महसूस कर रहे थे। तभी हमें पता चल गया था कि आकाश मिल गया है। सच कहें तो हमने उन्हें कास्ट नहीं किया — हमने उन्हें पहचान लिया।”
डायरेक्टर गौरव खटी जोड़ते हैं, “ये फिल्म एक दुआ है जो सफर के भेस में है। आकाश की आत्मा की भाषा है संगीत — बस वही सच्चा माध्यम है जो उसके सवालों को ढो सकता है। अव्यान धर्म की बात नहीं करता, ये याद दिलाता है कि हम कौन हैं — उस शोरगुल से परे।”
2025 में रिलीज़ के लिए तैयार अव्यान सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक दरवाज़ा है — अपने भीतर की तरफ़, खामोशी की तरफ़, और शायद... ईश्वर की तरफ़।
अव्यान देखी नहीं जाती — महसूस की जाती है। जैसे कोई धीरे-धीरे जलता हुआ मंत्र — जो क्रेडिट्स के बाद भी दिल में गूंजता रहता है।
















