4.5 Excellent

Dabangg

‘दबंग’ देहाती पृष्ठभूमि पर बनी एक्शन से भरपूर, मां-बेटे और सौतेले भाई के रिश्तों के बीच एक मसालेदार मनोरंजक फिल्म है, जिसमें दर्शकों के लिए सबकुछ है। यह फिल्म नई, खूबसूरत और आकर्षक बोटल में पुरानी शराब है और इसके ब्रैंड एम्बैसेडर हैं सलमान खान। इसमें सलमान एक अलग किस्म के पुलिस अधिकारी हैं जो भ्रष्ट तो हैं लेकिन उनकी छवि रॉबिनहुड की तरह है और जो अपराधियों से अपने अंदाज में निपटता है।

इस फिल्म में सलमान की शक्तिशाली भूमिका उनके जानदार अभिनय के साथ उभरकर सामने आती है और एक जादू-सा छा जाता है। फिल्म में सलमान के लिए दिल दहला देनेवाला एक्शन है और है सुपरहिट संगीत।

उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि में बनी ‘दबंग’ चुलबुल पांडे (सलमान खान) की कहानी है, जिसका बचपन काफी उथल-पुथल भरा रहा। पिता की मौत के बाद उसकी मां (डिम्पल कपाड़िया) दूसरे आदमी प्रजापति पांडे (विनोद खन्ना) से शादी करती है। उन्हें एक बेटा होता है माखनचंद (अरबाज खान)।

अपने पिता और सौतेले भाई से परेशान चुलबुल अपनी मंजिल खुद तय करने का फैसला करता है और उनसे नाता तोड़ लेता है।

जिंदगी के प्रति अपना खास नजरिया लेकर राजो (सोनाक्षी सिन्हा) चुलबुल की जिंदगी में आती है, तो उसका नजरिया बदल जाता है। लेकिन चेड्डी सिंह (सोनू सूद) उसे हमेशा उसके सौतेले भाई के खिलाफ भड़काता रहता है, पर जैसा कि होना था, माखनचंद की आंखें खुल जाती हैं और वह अपने भाई के साथ खड़ा हो जाता है।

वैसे तो ‘दबंग’ की कहानी में ऐसा कुछ नहीं है, जिसे कुछ नया कहा जा सके, लेकिन इसमें सलमान हैं जिनकी मौजूदगी से ही फिल्म में चार चांद लग जाते हैं। सलमान की भूमिका उनके आम प्रशंसकों को दीवाना बना देगी।

इस फिल्म की दो अन्य विशेषताएं हैं ए. विजयन का एक्शन और साजिद-वाजिद और ललित पंडित का संगीत। सलमान के एक्शन दृश्य दर्शकों के जिस्म में सनसनी भर देंगे और उनके चाहनेवालों को वे बहुत पसंद आएंगे। फिल्म का अंत बहुत बढ़िया है और इसी के लिए इस फिल्म को दुबारा भी देखा जा सकता है।

निर्देशक अभिनव सिंह कश्यप ने आम दर्शकों के मनोरंजन के लिए यह फिल्म बनाई है और वे उसमें कामयाब भी हुए हैं। आम दर्शकों के लिए फिल्म बनाने की मंशा के साथ अभिनव ने इस बात का खास ध्यान रखा है कि फिल्म नाटकीय और भावनात्मक दृश्यों में भी अतिनाटकीय न हो जाए। इसलिए दर्शक सिनेमाघर से बाहर सिर धुनते हुए नहीं निकलते।

फिल्म में महेश लिमये की सिनेमाटोग्राफी उपयुक्त है। और सलमान के लिए लिखे गए विशेष संवाद तो दर्शकों की तालियों और सीटियों के लिए काफी हैं।

आम दर्शकों की बात आती है तो सलमान उनके दिलों के राजा हैं और यह फिल्म यह साबित भी करती है। यह फिल्म उनके ‘स्टारपॉवर’ को साबित करने का मौका देती है और सलमान उसमें कामयाब भी हुए हैं। यह फिल्म भी सलमान के करियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक होगी।

सोनाक्षी सिन्हा बेहद ताजगी भरी हैं, उनके अभिनय में आत्मविश्वास है और वे सलमान के साथ बहुत ही आकर्षक ढंग से जंची हैं। खास बात यह है कि उनकी अभिव्यक्ति बहुत ही सटीक है और इतने बड़े सितारों के बीच भी वे पूरे विश्वास के साथ अपनी भूमिका को अंजाम देती हैं।

अरबाज खान प्रभावी हैं और अपनी भूमिका के साथ इंसाफ करते हैं। सोनू सूद बेहद रोमांचक हैं और सलमान का सामना पूरे दमखम के साथ करते हैं।

विनोद खन्ना अपनी नकारात्मक भूमिका में उत्कृष्ट हैं। डिम्पल वाकई में लाजवाब हैं। अनुपम खेर हमेशा की तरह अद्भुत हैं और यही बात ओम पुरी पर भी लागू होती है। महेश मांजरेकर को ज्यादा अवसर नहीं मिला है। टीनू आनंद काफी प्रभावी हैं और मलाइका अरोड़ा ने तो दर्शकों का दिल ही जीत लिया है।

आखिर में यह कि सलमान के दीवानों के लिए यह फिल्म खरा मनोरंजन है। अगर आप ‘दबंग’ से सौ प्रतिशत उम्मीद करते हुए सिनेमाघर में जाते हैं, तो 200 प्रतिशत संतुष्टि लेकर बाहर आते हैं। यह फिल्म मनोरंजन की पूरी गारंटी देती है।