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बुधिया सिंह, जिसने महज 4 साल की उम्र में  भुवनेश्वर से पुरी तक लगातार दौड़कर 65 किलोमीटर की दूरी तय कर सबसे छोटा मैराथन धावक बनकर विश्व रिकॉर्ड बनाया, वो आज 14 साल का हो गया है ।

नन्हें धावक बुधिया सिंह के जीवन पर बनी फ़िल्म बुधिया सिंह- बोर्न टू रन  सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है । लेकिन बुधिया का कहना है कि वह कुछ भी याद नहीं कर सकता ।  बुधिया लड़खड़ाते हुए बुदबुदाकर बोला, मैं बहुत छोटा था । मैं उस वक्त बच्चा था । 10 साल बीत चुके हैं ।  ये 10 साल मैंने मैराथन दौड़ के प्रशिक्षण के लिए स्पोर्ट्स हॉस्टल में बिताए हैं ।  लेकिन मुझे दौड़ने के लिए आज्ञा नहीं दी गई । मैं अपने देश का नाम रोशन करना चाहता हूं  ।

बुधिया सिंह को महज 4 साल ही उम्र में वैश्विक स्तर पर खूब प्रसिद्दी मिली । बुधिया कहता है, मैंने ये फ़िल्म देखी, लगा जैसे मैं किसी और के जीवन को देख रहा था । यह अतुल्य था! मैं बहुत खुश हूं कि सोमेन्द्र पाढी ने मेरे जीवन के ऊपर फ़िल्म बनाई ।

बुधिया सिंह असल जिंदगी में फ़िल्में नहीं देखता है । इस पर बात करते हुए बुधिया ने कहा, जब मैंने फ़ाइनली इस हफ़्ते ये फ़िल्म देखी तो मैं फ़िल्म में दिखाई गई किसी भी घटना को याद नहीं कर सका । न तो प्रसिद्धि और न ही सराहना....कुछ नहीं । क्या वाकई ये सब मेरे साथ हुआ था ?

बुधिया फ़िल्मी पर्दे पर अपनी कहानी और बाल कलाकार मयूर पटोले , जिसने फ़िल्म में बुधिया का किरदार अदा किया है, की अदाकारी को देखकर बहुत प्रभावित हुआ । जब मैं बच्चा था तबकी तस्वीरें मैंने देखी हैं > मयूर लुक में भी बिल्कुल वैसा ही दिख रहा है और किया भी उसी तरह है जैसा मैंने 4 साल की उम्र में किया था । यह अद्भुत है । जब वह फ़िल्म के बाद मेरे पास खड़ा हुआ, तो मुझे लगा कि जैसे मैं अपना बचपन देख रहा था ।

14 साल की उम्र में बुधिया सिंह फ़िर से दौड़ने के लिए उत्सुक है । इस पर बुधिया सिंह कहता है, लेकिन अब वो मुझे अनुमति नहीं देंगे । सरकार कहती है कि, मैं  प्रोफ़ेशनली दौड़ने के लिए अभी बहुत ही छोटा हूं ।  जब मैं 18 साल का हो जाऊंगा तब ही वे मुझे दौड़ने के लिए अनुमति देंगे । मैं अपने देश के लिए दौड़ना चाहता हूं । मैं ओलपिंक मेडल वापस लाना चाहता हूं । लेकिन मुझे एक अच्छे कोच की जरूरत है ।

बचपन में बुधिया के कोच बिरंची दास का किरदार फ़िल्म में मनोज वाजपेयी ने निभाया है । अपने कोच के बारें में बात करते हुए बुधिया कहता है, मुझे उनके बारें में ज्यादा कुछ याद नहीं है । लेकिन मुझे बताया गया कि वो मुझे अपने लड़के की तरह प्यार करते थे और मुझे हमेशा प्रोत्साहित करते थे । अब वह इस दुनिया में नहीं हैं । मुझे उनके जैसे ही एक दूसरे कोच की जरूरत है ।

फ़िल्म की शूटिंग के दौरान वास्तविक बुधिया स्क्रीन के बुधिया के सम्मुख आया ।

वास्तविक बुधिया को याद करते हुए, जब फ़िल्म की शूटिंग ओड़िसा में हो रही थी तब बुधिया सिंह वहां आया था । बुधिया ने कहा कि, जिस लड़के ने मेरा किरदार निभाया है वह भी उन गलियों में दौड़ा जिसमें मैं दौड़ा था । मैंने उसे देखा । यह मेरे अपने बचपन जीने की तरह था, जो कि मुझे अब याद नहीं है । हर किसी ने मुझे और मेरी उपलब्धी को भूला दिया है । यहां तक की मुझे भी याद नहीं है कि मैं क्या किया था । मैं फ़िल्म के निर्देशक सोमेन्द्र पाढी को पर्दे पर मेरी कहानी दिखाकर मुझे एक बार फ़िर जिंदा करने के लिए सिर्फ़ धन्यवाद नहीं दे सकता ।