अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल की हेरा फेरी (2000) भारतीय सिनेमा को कल्ट कॉमेडी फ़िल्म है जो इतने सालों बाद भी यादगार है । जहां हेरा फेरी 3 के लिए लोग आँखें गड़ाए बैठे हैं वहीं, इसकी पहली फ़िल्म हेरा फेरी (2000) इस महीने 31 मार्च को 25 साल पूरे कर रही है । ऐसे में हर कोई चाहता है कि यह फिर से थिएटर में रिलीज हो और जब बॉलीवुड हंगामा ने फ़िल्म के निर्माता फिरोज ए. नाडियाडवाला से इस बारें में एक्सक्लूसिव बातचीत की तो उन्होंने बताया कि ये फैसला वो अकेले नहीं ले सकते ।

EXCLUSIVE: 25वीं एनिवर्सरी पर क्या फिर से रिलीज होगी अक्षय कुमार, परेश रावल और सुनील शेट्टी की हेरा फेरी ? प्रोड्यूसर फिरोज ए. नाडियाडवाला तोड़ी चुप्पी

मीम्स की दुनिया की किंग है हेरा फेरी

जब बॉलीवुड हंगामा ने फिरोज ए. नाडियाडवाला से पूछा कि, क्या वह हेरा फेरी को इसकी 25वीं सालगिरह पर सिनेमाघरों में वापस लाना चाहेंगे। इस पर फिरोज ए. नाडियाडवाला ने कहा, “यह एक ऐसा फैसला है जो मैं अकेले नहीं लूंगा। ऑन पेपर, मैं फिल्म का मालिक हूं, लेकिन नैतिक रूप से, अक्षय जी, परेश जी और सुनील जी भी फिल्म के उतने ही मालिक हैं (मुस्कुराते हुए)। इसलिए, हम मिलकर फैसला लेंगे ।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे यकीन है कि जब भी हम इसे फिर से रिलीज करेंगे, तो यह बॉक्स ऑफिस पर धमाका मचा देगी। दिलचस्प बात यह है कि फिर हेरा फेरी (2006) को रिलीज हुए 19 साल हो चुके हैं और हेरा फेरी को रिलीज हुए 25 साल हो चुके हैं। फिर भी, हमने इसे जीवित रखने के लिए कोई सचेत प्रयास या कोई आर्थिक प्रयास नहीं किया है। ये अपने आप हुआ है!”

मीम्स की दुनिया में, हेरा फेरी और फिर हेरा फेरी ने कल्ट का दर्जा हासिल कर लिया है। फिरोज ए. नाडियाडवाला ने इसका सारा श्रेय लेखक नीरज वोरा को दिया, “यह सब नीरज जी के मजाकिया और हास्यपूर्ण संवादों की मासूमियत के कारण संभव हुआ। हम सभी ने उनसे यही सीखा है कि आप जो कह रहे हैं वह निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है लेकिन आप कैसे कह रहे हैं यह उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। नीरज ने हमें और फिल्म उद्योग को यह मूल्यवान सबक सिखाया है।”

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उन्होंने आगे बताया, “नीरज जी हाफ शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहनकर सेट पर बैठते थे और शॉट्स को बहुत बारीकी से देखते थे। अगर एक्टर्स संतोषजनक प्रदर्शन नहीं करते थे, तो वे डायरेक्टर से कहते थे, प्रियं सर, एक मिनट। फिर वे एक्टर्स से सख्ती से कहते थे, 'तुम लोगों ने क्या किया?'। एक्टर्स जवाब देते थे, 'जो डायलॉग था, वही तो बोला'। वे जवाब देते थे, 'जैसा मैंने बोला, वैसे डायलॉग बोल'। उनके हाथ में पूरी लगाम थी। नीरज जी की सहमति के बिना एक भी टेक ओके नहीं होता था।”