महामारी के दौर ने सिनेमा के पैटर्न को पूरी तरह से बदलकर रख दिया । कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन में जहां सिनेमाघर बंद थे इसलिए फ़िल्मों को डायरेक्टली ओटीटी प्लेतफ़ॉर्म पर रिलीज किया गया जो काफ़ी हद तक अनलॉक के बाद भी जारी है । अनलॉक के बाद अब फ़िल्मी कारोबार फ़िर से पटरी पर आ गया है ऐसे में फ़िल्ममेकर्स ने अपनी-अपनी फ़िल्मों को उसकी थिएटर रिलीज के 4 हफ़्ते बाद ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज करने का फ़ैसला किया । बता दें कि इससे पहले फ़िल्म इंडस्ट्री में 8 हफ़्ते के बाद फ़िल्म को ओटीटी पर रिलीज करने का चलन था । लेकिन थिएटर में कम होते कारोबार को देखते हुए फ़िल्ममेकर्स ने 4 हफ़्ते बाद ही अपनी फ़िल्म के डिजीटल प्रीमियर करने का फ़ैसला किया । क्योंकि ऐसा करने से उन्हें ओटीटी दिग्गज ज्यादा से ज्यादा रकम दे देते थे । ओटीटी दिग्गज चाहते थे कि जितनी जल्दी फ़िल्म उनके प्लेटफ़ॉर्म पर आएगी उतनी ज्यादा मोटी रकम वे मेकर्स को देंगे ।

BREAKING: 1 अगस्त से बॉलीवुड फ़िल्में थिएटर में रिलीज होने के 8 हफ़्ते बाद ही ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज होंगी ; लाल सिंह चड्ढा, रक्षा बंधन और ब्रह्मास्त्र समेत सभी फ़िल्मों के डिजीटल प्रीमियर के लिए करना होगा इंतजार

लाल सिंह चड्ढा, रक्षा बंधन का 8 हफ़्ते बाद ही डिजीटल प्रीमियर होगा

4 हफ़्ते बाद फ़िल्म को ओटीटी पर रिलीज करने के फ़ैसले पर सभी ने सहमती जताई जिसमें शामिल थे- फ़िल्म से जुड़े लोग, थिएटर एग्जीबिटर्स इत्यादि । उनका मानना था कि मेकर्स बॉक्स ऑफ़िस पर कम कमाई से जूझ रहे हैं ऐसे में फिल्म का ऑनलाइन प्रीमियर करके इसकी भरपाई की जानी चाहिए । हालांकि, पिछले कुछ महीनों में हर जगह 100 फीसदी ऑक्यूपेंसी के साथ सिनेमा हॉल चलने लगे। कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफ़िस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की जिससे लगने लगा कि फ़िल्म बिजनेस फ़िर से पटरी पर आने लगा है ।

नतीजतन, विभिन्न शेयरहोल्डर्स ने फ़ैसला किया कि अब उनकी फ़िल्म थिएटर में रिलीज होने के 8 हफ़्ते बाद ही ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज होगी । ये नियम 1 अगस्त से रिलीज होगा । यानि 1 अगस्त से जो भी फ़िल्में रिलीज होंगी उन्हें इस नियम का पालन करना होगा । यानि लाल सिंह चड्ढा, रक्षा बंधन, ब्रह्मास्त्र और लाइगर जैसी बड़ी फ़िल्में,जो जल्द ही रिलीज होने वाली हैं, थिएटर में रिलीज होने के 8 हफ़्ते बाद ही ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज होंगी ।

फ़िल्मी कारोबार फ़िर से पटरी पर लौट आया है

इस बात को सिनेपोलिस इंडिया के सीईओ देवांग संपत ने भी कंफ़र्म किया है । उन्होंने कहा, “ऐसा कोई नियम नहीं था। यह निर्माताओं और प्रदर्शकों के बीच एक आपसी समझ थी (असामान्य परिस्थितियों के कारण)। लेकिन अब, निर्माता खुद हमारे पास पहुंच गए हैं और नाटकीय रिलीज के लिए विशिष्टता खिड़की पर जोर दिया है ।”

फिल्म प्रदर्शक और डिस्ट्रीब्यूटर अक्षय राठी ने समझाया, “यह एक पारस्परिक रूप से सभी का मिला जुला कदम है । आरआरआर और केजीएफ - चैप्टर 2 जैसी फिल्मों ने 1000 करोड़ का शुद्ध कारोबार किया । वहीं द कश्मीर फाइल्स और भूल भुलैया 2 जैसी फिल्मों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है । जुग जुग जियो ने भी वास्तव में अच्छा प्रदर्शन किया है । ऐसे में फ़िल्मी कारोबार सामान्य हो गया है । प्रोडक्शन सेक्टर और एग्जीबिशन सेक्टर के बीच पूर्ण आपसी सहमति और समझौते के साथ, मेरा मानना है कि ओटीटी पर फ़िल्मों का 8 हफ़्ते बाद रिलीज होना ही सही है जो निर्माताओं के हित में है । स्ट्रीमिंग और सैटेलाइट अधिकार एक निश्चित कीमत पर बेचे जाते हैं। अगर फिल्म इन प्लेटफॉर्म पर बहुत अच्छा करती है, तो इसमें कोई फायदा नहीं है।

हालांकि, बॉक्स ऑफिस ही एकमात्र ऐसी जगह है जो आपको एक अभूतपूर्व उलटफेर देती है । यह तभी हो सकता है जब आप इसे बॉक्स ऑफिस पर उचित मौका दें, यानी जब दर्शक 'ये फिल्म तो 2-4 हफ़्तों में ओटीटी पे आ ही जाएगी' के बारे में नहीं सोच रहे हों । किसी भी चीज़ से ज्यादा, यह सिनेमाघरों में फिल्में देखने के इच्छुक दर्शकों की आदत को फिर से बनाने के बारे में है । और इससे अंततः उत्पादकों को ही लाभ होता है । बॉक्स ऑफिस कलेक्शन जितना अधिक होगा, निर्माता को उतना ही अधिक लाभ होगा ।”