भारत में जहाँ ज़्यादातर इंडी फ़िल्म कंपनियाँ कुछ ही सालों में बंद हो जाती हैं, वहीं फर्स्ट रे फिल्म्स ने 10 साल पूरे कर एक मिसाल कायम की है, वो भी बिना सुरक्षित रास्ता अपनाए। इस कंपनी ने हमेशा हटकर कहानियाँ बनाई हैं, भारत की पहली सोशल मीडिया थ्रिलर मोना डार्लिंग (2016 - अमेज़न प्राइम), देश की पहली मेनस्ट्रीम LGBTQ+ रोड ट्रिप फ़िल्म हम भी अकेले, तुम भी अकेले (2020 - जियोहॉट स्टार) और दुनिया की पहली एनिमल-लवर विजिलांटे एक्शन फ़िल्म लक्कड़बग्घा (2023 - BookMyShow स्ट्रीम)। फर्स्ट रे फिल्म्स एकमात्र भारतीय "स्टार्ट-अप" इंडिपेंडेंट प्रोडक्शन हाउस है जिसने हाई-कॉन्सेप्ट सिनेमा के ज़रिए अपनी जगह बनाई।

अंशुमान झा की फर्स्ट रे फिल्म्स की नई फ़िल्में
अब, जब यह अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर रही है, कंपनी और तेज़ी से आगे बढ़ने को तैयार है। अगले 12 महीनों के लिए इसने 6 नई फ़िल्मों की लिस्ट जारी की है—जिनमें से 3 फ़िल्में अगले 6 महीनों में थिएटर में रिलीज़ होंगी और 3 की शूटिंग शुरू होगी।
थिएटर में आने वाली फ़िल्में हैं:
* लॉर्ड कर्ज़न की हवेली - अंशुमान झा का डायरेक्टोरियल डेब्यू, एक डार्क कॉमेडी थ्रिलर।
* हरी का ओम - हरीश व्यास की दिल को छू लेने वाली पिता-पुत्र की कहानी।
* लक्कड़बग्घा 2 - इस साल की शुरुआत में शूटिंग पूरी करने वाली बहुप्रतीक्षित सीक्वल।
इसके अलावा, स्टूडियो 2026 में तीन नई फ़िल्मों की शूटिंग शुरू करेगा। इनमें तीन नए हिंदी डायरेक्टर और दो नए चेहरे शामिल होंगे, जिन्हें एक अनोखी लव स्टोरी में लॉन्च किया जाएगा।
2026 की फ़िल्में:
1. ओवी एंड द मोंक - महामारी के दौरान पिता को खोने के बाद एक बहादुर बच्चा (ओवी) हिमालय की यात्रा पर निकलता है, ताकि एक फँसे हुए कुत्ते (मोंक) को उसके मालिक तक पहुँचा सके। इस सफर में उसे करुणा, साहस और ज़िम्मेदारी का असली अर्थ मिलता है।
2. बजरंगी - बिहार की पृष्ठभूमि पर आधारित यह सशक्त ड्रामा सेवा के मायने को नए सिरे से परिभाषित करता है और परंपरा व फ़र्ज़ पर नई दृष्टि देता है।
3. अभी-अनटाइटल्ड नॉयर-थ्रिलर - मिलेनियम के मोड़ पर मुंबई में सेट, जुड़वा किरदारों पर आधारित एक साहसी कहानी, जिसे एक पुरस्कार विजेता भारतीय फ़िल्ममेकर बनाएँगे।
अंशुमान झा, अभिनेता, निर्माता और फर्स्ट रे फिल्म्स के संस्थापक ने कहा,“इंडिपेंडेंट फ़िल्ममेकिंग विश्वास और जुनून पर टिकी होती है। मैंने हमेशा माना है कि फ़िल्में नहीं, बल्कि बजट फेल होते हैं। 10 साल तक टिके रहना इस बात का सबूत है कि दर्शक नई, ईमानदार और अलग कहानियों को अपनाने के लिए तैयार हैं। हमारे निवेशकों का शुक्रिया, जिनके विश्वास ने हमें आगे बढ़ाया - उनका भरोसा साबित करता है कि फ़िल्में सांस्कृतिक असर डालने के साथ-साथ लंबे समय में लाभदायक भी हो सकती हैं, जैसा कि A24 ने वैश्विक स्तर पर दिखाया है। मेरी ख्वाहिश है कि यह इकोसिस्टम मेरे बाद भी बना रहे। हम सिर्फ प्रोजेक्ट्स नहीं बना रहे, बल्कि ऐसा सिनेमा बना रहे हैं जो ईमानदार है, दुनिया भर के टैलेंट के साथ मिलकर बनाया गया है और जो समय की कसौटी पर खरा उतरेगा। हमारा नया स्लेट साहसी, हटकर और यादगार है।”
इस नए ऐलान के साथ, फर्स्ट रे फिल्म्स ने एक बार फिर साबित किया है कि वह भारत के फ़िल्म जगत में एक दुर्लभ और निडर आवाज़ है - जो हर चीज़ से ऊपर स्टोरीटेलिंग, रिस्क लेने और ओरिजिनलिटी को रखती है।
















