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सम्राट पृथ्वीराज एक बहादुर राजा की कहानी है । 12वीं शताब्दी के अंत में, पृथ्वीराज चौहान (अक्षय कुमार) अजमेर के राजा हैं । वह अपनी बहादुरी और दयालुता के लिए जाने जाते हैं । एक दिन, मीर हुसैन (अंशुमान सिंह) उसके दरवाजे पर आता है और उससे मदद मांगता है । वह गजनी के क्रूर राजा मोहम्मद गोरी (मानव विज) का भाई है । मीर हुसैन को मोहम्मद गोरी की मालकिन चित्रलेखा (राधा भट्ट) से प्यार हो जाता और वह उसके साथ भाग जाता है । मोहम्मद गोरी अब मीर हुसैन को मारना चाहता है । इसलिए मीर हुसैन ने पृथ्वीराज चौहान से मदद मांगी । पृथ्वीराज चौहान ने उसकी मदद करने का फैसला किया, भले ही इसका मतलब युद्ध के मैदान में मोहम्मद गोरी का सामना करना पड़े । युद्ध तराइन में होता है जहाँ पृथ्वीराज चौहान विजयी होते हैं । मोहम्मद गोरी पकड़ा जाता है लेकिन पृथ्वीराज चौहान उसे आजाद कर देता है । इस बीच, पृथ्वीराज चौहान को कन्नौज की राजकुमारी संयोगिता (मानुषी छिल्लर) से प्यार हो जाता है । वह भी उसके प्यार में पड़ जाती है, हालांकि दोनों एक दूसरे से कभी नहीं मिले हैं । फ़िर भी, वे पत्र लिखते हैं और एक-दूसरे को उपहार भेजते हैं और वहीं दोनों का प्यार परवान चढ़ता है । संयोगिता के पिता जयचंद (आशुतोष राणा) को पृथ्वीराज चौहान से जलन होती है । उसे लगता है कि वह दिल्ली के सिंहासन का असली उत्तराधिकारी है । हालाँकि, पृथ्वीराज चौहान को सिंहासन पर बैठने के लिए चुना जाता है । जयचंद फिर एक यज्ञ और संयोगिता के स्वयंवर का आयोजन करते हैं । न्योता सभी राजाओं को दिया जाता है लेकिन पृथ्वीराज चौहान को नहीं । फिर भी, पृथ्वीराज चौहान कन्नौज पहुंचते हैं और संयोगिता को भगा ले जाते है । अपमानित जयचंद बदला लेने का फैसला करता है । वह मोहम्मद गोरी को निमंत्रण भेजता है और उसे पृथ्वीराज चौहान को हराने में मदद करने के लिए कहता है । आगे क्या होता है इसके लिए पूरी फ़िल्म देखने होगी ।

Samrat Prithviraj Movie Review: प्रेरक और मनोरंजक है अक्षय कुमार की सम्राट पृथ्वीराज

सम्राट पृथ्वीराज चंद वरदाई द्वारा लिखित पृथ्वीराज रासो पर आधारित है । कहानी सशक्त और प्रेरक है । डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी की पटकथा अच्छी है । उन्होंने कुछ बहुत ही मनोरंजक और नाटकीय दृश्यों को शामिल किया है । डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी के डायलॉग कमजोर हैं ।

डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी का निर्देशन ठीक है । उन्होंने भव्यता को बहुत अच्छे से संभाला है और कुछ दृश्यों को असाधारण रूप से निष्पादित किया है । जाहिर है कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए अपना सब कुछ लगा दिया है । हालाँकि, कुछ सीक्वंस बाजीराव मस्तानी [2015], पद्मावत [2018], पानीपत [2019] आदि जैसी फिल्मों का फ़ील देते है । फ़िल्म की गति अच्छी है, लेकिन कुछ जगहों पर, कहानी काफी तेजी से आगे बढ़ती है । यह विशेष रूप से सेकेंड हाफ में होता है, जहां तराइन की दूसरी लड़ाई को दिखाया नहीं जाता है और यह फ़िल्म के प्रभाव को कम करता है ।

सम्राट पृथ्वीराज की शुरूआत एक दिलचस्प नोट पर शुरू होती है । अक्षय कुमार की एंट्री देखकर आप दंग रह जाएंगे । तराइन की पहली लड़ाई ताली बजाने लायक है । फिल्म फिर इंटरमिशन प्वाइंट के दौरान गिरती है और फ़िर खूबसूरती से उठती है । सेकेंड हाफ में, पृथ्वीराज चौहान संयोगिता को दरबार में अपने बगल में बैठने के लिए कहते हैं, जो प्रभावित करता है । क्लाइमेक्स वाकई काबिले तारीफ है ।

अक्षय कुमार काफी डैशिंग लग रहे हैं और गजनी वाले पोर्शन में उनका प्रदर्शन शानदार है । बाकी दृश्यों में, उनका प्रदर्शन दब गया है लेकिन ओअवरऑल प्रभावशाली है । मानुषी छिल्लर ने आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की है । वह आश्चर्यजनक दिखती है और एक अच्छा प्रदर्शन देती है । सोनू सूद (चंदवरदाई) सहायक भूमिका में बेहतरीन लगते हैं । संजय दत्त (काका) को एक दिलचस्प किरदार निभाने को मिलता है लेकिन यह एक कैरिकेचर बन जाता है । मानव विज दुश्मन के रूप में शानदार लगते हैं । आशुतोष राणा भरोसेमंद हैं । साक्षी तंवर (जयचंद की पत्नी) ठीक है । मनोज जोशी अपने कैमियो में छाप छोड़ते हैं । अंशुमन सिंह और राधा भट्ट को ज्यादा स्कोप नहीं मिलता है ।

शंकर-एहसान-लॉय का संगीत लुभाने में विफल रहता है । साथ ही फिल्म में कई गाने भी हैं । 'हरि हर' इकलौता गाना है जो सबसे अलग है । यह उत्साह जोड़ता है और देखने में काफी आकर्षक है । 'हद कर दे' और 'योद्धा' को शूट बहुत अच्छे से किया गया है । 'मखमाली' कुछ खास नहीं है । संचित बलहारा और अंकित बलहारा का बैकग्राउंड स्कोर सिनेमाई एहसास देता है ।

मनुष्नंदन की सिनेमैटोग्राफी टॉप क्लास है । सुब्रत चक्रवर्ती और अमित रे का प्रोडक्शन डिजाइन विस्तृत और वास्तविक सा लगता है । फ्रांज स्पिलहौस और परवेज शेख के एक्शन बिना किसी खून खराबे के शानदार है और फ़िल्म के मनोरंजन को बढ़ाते है । संजीव राजसिंह परमार की वेशभूषा शाही और वास्तविक सी लगती है । yfx का VFX ग्लोबल स्टेंडर से मेल खाता है । आरिफ शेख की एडिटिंग साफ-सुथरी है लेकिन सेकेंड हाफ में बहुत तेज लगती है ।

कुल मिलाकर, सम्राट पृथ्वीराज भारतीय इतिहास के महानतम राजाओं में से एक की प्रेरक और मनोरंजक गाथा है । बॉक्स ऑफिस पर, इसका कारोबार दूसरे दिन से आगे बढ़ेगा । इस फ़िल्म में अच्छा बॉक्स ऑफ़िस कले्क्शन करने की पूरी क्षमता है ।