क्या पाकिस्तान का इरादा पूरी तरह से भारतीय फ़िल्मों पर प्रतिबंध लगाना है ? और इसके पीछे बहाना कश्मीर मुद्दा बनाया जा रहा है न कि कोई और प्रसंग ।
पाकिस्तान से जो खबरें आ रही हैं उनके अनुसार , लाहौर उच्च न्यायालय में वकील इश्तियाक चौधरी द्वारा दायर की गई एक याचिका में सभी भारतीय फिल्मों की प्रदर्शनी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है जब तक कश्मीर मुद्दा हल नहीं हो जाता । यानी याचिका के अनुसार जब तक कश्मीर मुद्दा हल नहीं हो जाता तब तक पाकिस्तान में भारतीय फ़िल्में नहीं दिखाई जानी चाहिए ।
जब तक की वे कश्मीर मुद्दा और पाकिस्तान में बॉलीवुड फ़िल्मों की स्क्रीनिंग के बीच कोई संबंध नहीं बिठा सकते तब तक दंग बॉलीवुड बांशिंदों ने इस मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी देने से इंकार किया है । एक बहुत ही वरिष्ठ और विपुल फिल्म निर्माता ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया, कि , "यदि वो पाकिस्तान में बॉलीवुड फ़िल्मों पर रोक लगा देंगे तो वे देश के मूवी थिएटरों में क्या दिखाएंगे, वो तो इतनी फ़िल्में बनाते ही नहीं हैं या कहें वहां पर तो फ़िल्म निर्माण लगभग कुछ भी नहीं है । और पाकिस्तानी कलाकारों का क्या, जिसने भारत में अपना करियर बनाया है ? उन्हें भी बॉलीवुड में घुसने से रोक दो ?
पाकिस्तान के एक प्रमुख फिल्म निर्माता ने प्रस्तावित प्रतिबंध की घोषणा को असंगत करार दिया । ऐसा कदम असल में बॉलीवुड फ़िल्मों की पायरेसी को बढ़ावा देगा । सभी सरकारों को मेरी यही सलाह है कि कला और संस्कृति से राजनीति को दूर रखें ।
















